यह एपस्टीन किसका क्या ?.. भारत के लिए जैसे महात्मा ही!

महाराष्ट्र और देश की राजनीति आज किस मोड़ पर आ गई है, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता।
एक-दूसरे का चरित्र हनन, कीचड़ उछालना और अफवाहें फैलाना, इन तीन सिद्धांतों पर राजनीति का तंबू खड़ा है। जेफरी एपस्टीन के भूत ने वर्तमान में भारत और देश के कई हिस्सों में हड़कंप मचा दिया है। छोटे बच्चों का यौन शोषण करने वाले और इन बच्चों को अमीरों की अय्याशी के लिए मुहैया करानेवाले जेफरी एपस्टीन के कारण मानवता की धज्जियां उड़ गई हैं। बिल गेट्स से लेकर अनिल अंबानी और प्रे. ट्रंप, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम इस प्रकरण में आया है। बिल गेट्स की पत्नी ने इस मुद्दे के कारण अपने पति से तलाक ले लिया। छोटे बच्चों के साथ अमानवीय कृत्यों में शामिल रहे व्यक्ति के साथ जीवन बिताना मुश्किल है, ऐसा जाहिर करते हुए उन्होंने गेट्स से नाता तोड़ लिया, वो महात्मा बिल गेट चार दिन पहले भारत के दौरे पर आए थे। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हैदराबाद में उनका स्वागत किया। यह तस्वीर चौंकाने वाली है। कुणाल कामरा, सुषमा अंधारे ने एकनाथ शिंदे पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की इसलिए महाराष्ट्र विधानसभा की अधिकार हनन समिति ने इन दोनों पर कार्रवाई की। कुणाल कामरा के स्टूडियो पर शिंदे के लोगों ने हमला किया, लेकिन एपस्टीन फाइल्स मामले में भारतीय उद्योगपतियों और नेताओं के नाम आने के बावजूद केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी समेत कई लोग अपनी सत्ता की कुर्सी से चिपके हुए हैं, इसे क्या कहा जाए?
एपस्टीन प्रकरण से वैश्विक समाज संरचना में भूचाल सा आ गया, लेकिन कुछ देशों ने इस मामले में सामाजिक और नैतिक जागरूकता बनाए रखी है। जब भारत में बिल गेट्स का स्वागत हो रहा था, तब इटली की फौलादी महिला प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक फैसला लिया। बिल गेट्स की लैब में तैयार हो रहे सभी उत्पादों पर इटली में पाबंदी लगा दी गई। इटली दुनिया का पहला देश है, जिसने ‘आर्टिफिशियल’ और ‘सिंथेटिक’ पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में बिल गेट्स की लैब को आने वाले समय में १०० बिलियन डॉलर्स की कमाई गंवानी पड़ेगी। एपस्टीन फाइल्स में बारंबार नाम आया इसलिए अमेरिकी जनता ने प्रे. ट्रंप के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। ‘द ग्रेट ब्रिटेन’ ने तो सबसे महान ‘नैतिकता’ दिखाई। किंग चार्ल्स के भाई प्रिंस एंड्रयू को ब्रिटेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। एपस्टीन मामले की एक पीड़िता वर्जीनिया गिप्रâे ने आरोप लगाया कि प्रिंस एंड्रयू ने २००१ में १७ साल की उम्र में उसका यौन शोषण किया था। हमें ब्रिटेन से, इटली से क्या सबक सीखना चाहिए? हमारे शासकों को इस पर चिंतन करना चाहिए।
शैतानी करार
भारत ने अमेरिका के साथ जो शैतानी व्यापार करार किया और भारतीय किसानों के हितों को प्रे. ट्रंप के पैरों में गिरवी रख दिया, उसके पीछे की वजह कहीं एपस्टीन की फाइलों में छिपे भारतीयों के रहस्य तो नहीं हैं? मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हरदीप पुरी और एपस्टीन के बीच संपर्क और बातचीत बढ़ गई। सरकारी नीतियों पर एपस्टीन से बातचीत हुई। पुरी और एपस्टीन के बीच कम से कम ६० बार पत्रसंवाद और नौ मुलाकातें हुर्इं। पुरी ५ जून से १० अक्टूबर २०१४ तक एपस्टीन से नौ बार मिले। एक मानव तस्कर, यौन शोषण का जो आरोपी है, ऐसे व्यक्ति से पुरी किसके लिए मिल रहे थे, यह राज खुल न जाए इसलिए प्रे. ट्रंप की शर्तों पर भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया और इधर श्री. मोदी गेटवे ऑफ इंडिया पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ ‘इवेंट’ कर रहे थे। मोदी और उनकी भाजपा भारत और प्रâांस के बीच २१ करार होने का ढोल पीट रहे हैं, लेकिन प्रे. ट्रंप के साथ हुए एक ‘व्यापार करार’ से भारतीय किसानों के अधिकार और स्वतंत्रता खत्म हो गई। इस पर प्रधानमंत्री बोल नहीं रहे हैं।
एपस्टीन कौन है?
यह शर्म की बात है कि भारतीय ‘मीडिया’ ने एपस्टीन प्रकरण का पूरी तरह से बहिष्कार किया है। श्री. राहुल गांधी ने संसद में पूर्व सेनाप्रमुख नरवणे की किताब के कंटेंट को लेकर कुछ सवाल उठाए थे। जब चीनी सेना टैंकों के साथ भारतीय सीमा तक पहुंच रही थी, तब भारत का राजनीतिक नेतृत्व कोई भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं था। ‘‘आप खुद देख लो’’ यह प्रधानमंत्री का सेना को संदेश था। इस मुद्दे पर राहुल गांधी को बोलने तक नहीं दिया गया। गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा के सांसद दुबे मोदी-शाह की सहमति से भरी संसद में नेहरू और इंदिरा गांधी का चरित्र हनन करते रहे। नेहरू और इंदिरा गांधी को बदनाम करना, चरित्र हनन करना भाजपा वालों का धंधा बन गया है। हमारे सार्वजनिक जीवन में सच और इतिहास के नाम पर भी एक भ्रष्टाचार चलता है। अभी नेहरू घराने को बदनाम करने की होड़ लगी हुई है। नेहरू के खिलाफ जहर फैलाने के लिए भाजपा ने जो मुहिम चलाई है, वह एक दिन उन्हीं पर उल्टी पड़ेगी। ‘कश्मीर फाइल्स’, ‘ताशकंद फाइल्स’, ‘केरल फाइल्स’ इन फिल्मों की मार्वेâटिंग प्रधानमंत्री मोदी ने खुद की। एक दिन ‘हॉलीवुड’वाले ‘एपस्टीन फाइल्स’ पर फिल्म बनाएंगे और नेहरू की बदनामी करने वालों के प्रकरण उसमें होंगे। भारत के कुछ बड़े नेताओं के प्रकरण इस फाइल में हैं, ऐसा बारंबार बताया गया, लेकिन प्रे. ट्रंप के चरणों में भारत की आजादी को गिरवी रखनेवाला ‘व्यापार समझौता’ हुआ और इन छह मामलों के हजारों कागजपत्र गायब हो गए। अमेरिका के एफबीआई अर्थात केंद्रीय जांच एजेंसी के प्रमुख भी एक ‘पटेल’ हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ऐसा खुले तौर पर कहा जाता है। जेफरी एपस्टीन यह सिर्फ एक आपराधिक कथा नहीं है। यह उद्योगपति, राजनेता, बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की काली परछार्इं को दुनिया के सामने लानेवाली ‘लाखों पन्नों की डायरी’ है। राजनीतिक दलाली, राजनीतिक नेटवर्विंâग के लिए एक घटिया आदमी की मदद सभी स्तरों के प्रतिष्ठित माने जानेवाले लोग लेते हैं। ‘व्हाइट हाउस’ में एपस्टीन का ‘नेटवर्क’ था और भारतीय नेताओं ने प्रे. ट्रंप से मिलने के लिए इसी नेटवर्क का इस्तेमाल किया। एपस्टीन जैसे घृणास्पद अपराधी से ‘संवाद’ करने की जरूरत मोदी के खास केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को क्यों पड़ी? क्या भारतीय नेताओं को एपस्टीन के घर का दरवाजा इसलिए खटखटाना पड़ा क्योंकि पूरे अमेरिका का प्रशासन धराशायी हो गया था? इस फाइल में ट्रंप का नाम इतनी बार आया है कि बाइबल में ईसा मसीह का नाम भी उतना नहीं आया है। ट्रंप और एपस्टीन समाज और दुनिया के गुनहगार हैं। इन दोनों गुनहगारों से ‘डील’ करके हमने भारतीय आजादी को अमेरिका के चरणों में गिरवी रख दिया है। फिर भी धर्मांध बनाया गया पूरा समाज मदमस्त होकर निश्चिंत पड़ा है। ऐसा क्यों? इसका जवाब श्री. शरद पोंक्षे ने अच्छा दिया है। वे कहते हैं, ‘‘किसी ने मुझसे पूछा कि आप कभी पेट्रोल-डीजल के दाम पर कुछ नहीं बोलते? मैंने उनसे कहा, अगर कल मेरा पेट्रोल २०० रुपए और डीजल ३०० रुपए हो गया तो मैं पैदल जाऊंगा, लेकिन हिंदू बनकर जाऊंगा। भले ही पेट्रोल-डीजल, सब्जियां महंगी हो जाएं तो भी चलेगा। मैं एक बार ही खाऊंगा, एक कपड़े में ही रहूंगा, लेकिन हिंदू बनकर ही आखिर तक रहना चाहूंगा।’’
ऐसे विचार आम हो जाने पर जेफरी एपस्टीन को कल गणतंत्र दिवस पर पद्मविभूषण से सम्मानित किया जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। देश किस मोड़ पर खड़ा है?



