छत्तीसगढ़

जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां आज ढोल-मांदर की थाप बजती है- मंत्री केदार कश्यप

रायपुर: बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और जनजातीय अस्मिता को सहजने एवं संवारने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आज माँ दंतेश्वरी मंदिर के पावन प्रांगण में जिला स्तरीय बस्तर पंडुम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बस्तर की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला, नृत्य, संगीत एवं रीति-रिवाजों की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने उपस्थित जनसमूह को बस्तर की आत्मा से जोड़ दिया। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि आज बस्तर बदल रहा है, बस्तर की तस्वीर बदल रही है और देश-विदेश में बस्तर की एक नई पहचान बन रही है। जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां आज ढोल-मांदर की थाप बजती है।

जिला स्तरीय एक दिवसीय “जनजातीय गौरव और परंपरा का पर्व बस्तर पंडुम” का हुआ शुभारंभबस्तर की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना है

जिला स्तरीय बस्तर पंडुम के शुभारंभ अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और विरासत को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत दंतेवाड़ा जिले से हुई है और उनके जीवन का आधा से अधिक समय यहीं बीता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध क्षेत्र है। माँ दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकाल, बारसूर, चित्रकूट और तीरथगढ़ जैसे अनेक प्रमुख पर्यटन स्थल बस्तर की पहचान हैं।

बस्तर पंडुम ने बस्तर के बदलते स्वरूप को दर्शाती है

मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल तक पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं। इस आयोजन में 12 विधाओं में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने बस्तर की संस्कृति को सहज और जीवंत रखा है, और यह हम सभी का कर्तव्य है कि इस सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखें। उन्होंने कहा कि पहले बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में जहाँ कभी गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, आज वहाँ ढोल-मांदर की थाप सुनाई दे रही है, जो बस्तर के बदलते स्वरूप को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि हमें केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि पूर्वजों से मिली संस्कृति को उसकी पहचान बनानी है।

पहले अति संवेदनशील जिले आज आकांक्षी जिले में शामिल

श्री कश्यप ने कहा कि अब बस्तर से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और यह क्षेत्र एक समृद्ध एवं विकसित बस्तर के रूप में आगे बढ़ रहा है, जो जिले पहले अति संवेदनशील कहलाते थे, वे आज प्रधानमंत्री द्वारा घोषित आकांक्षी जिलों में शामिल हैं। उन्होंने युवा वर्ग से बस्तर के पारंपरिक गीत, संगीत जैसे ’’आया माचो दंतेश्वरी’’ और ’’साय रेला’’ जैसे पारंपरिक गीतों को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म में फॉलों कर प्रचार-प्रसार करने को आग्रह किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला स्तरीय बस्तर पंडुम के स्टॉलों का निरीक्षण कर पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। कार्यक्रम को विधायक श्री चौतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी और कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव ने भी सम्बोधित किया।

कुआकोंडा पोटाकेबिन-2 के छात्रों के मलखंभ के प्रदर्शन ने लोगों का मन मोहा

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रस्तुति के क्रम में कुआकोंडा पोटाकेबिन-2 के छात्रों ने मलखंभ विधा में साहसिक करतब करते हुए लोगों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर दिया। अपनी फुर्ती और कलाबाजियों से मंत्रमुग्ध करते हुए छात्रों ने मलखंभ का अद्भुत  प्रदर्शन किया। इसके साथ ही ग्राम मोखपाल के नतक दलों ने पारंपरिक नृत्य तथा ग्राम मड़से के कलाकारों ने ठेठ ग्रामीण हाट बाजार के जनजीवन की जीवन्त प्रस्तुति दी। इसके अलावा जगदलपुर से आए बादल एकेडमी से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां भी सराहनीय रही।

इस अवसर पर सदस्य छ.ग.राज्य महिला आयोग श्रीमती ओजस्वी मंडावी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर,नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री कैलाश मिश्रा,जिला पंचायत एवं जनपद के जनप्रतिनिधि, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत सीईओ सहित अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, सर्व समाज प्रमुख उपस्थित रहे।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button