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जब चंद्रशेखर ने दे दिया प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, इस्तीफे की वजह जासूसी के आरोप?

नई दिल्ली: 6 मार्च का दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाम के साथ जुड़ा है। उन्होंने 6 मार्च 1991 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। चंद्रशेखर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन के दौरान ही समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए थे। वह 1977 से 1988 तक जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे थे। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखर ने 10 नवंबर, 1990 से 21 जून, 1991 तक की अल्प अवधि के लिए प्रधानमंत्री पद संभाला।

क्या ये थी इस्तीफे की वजह?

चंद्रशेखर युवा तुर्क के नाम से मशहूर थे। ऐसा कहा जाता है कि जासूसी के आरोपों के चलते चंद्रशेखर की सरकार गिरी थी। हालांकि, सियासी जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस के सपोर्ट से वो प्रधानमंत्री बने थे। इस दौरान जब कांग्रेस का हस्तक्षेप सरकार में बढ़ने लगा तो उन्होंने इसका विरोध किया। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए गए कि चंद्रशेखर ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जासूसी कराई। इन्हीं आरोपों के चलते कांग्रेस नेतृत्व ने चंद्रशेखर सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जैसे ही सरकार अल्पमत में आई तो चंद्रशेखर ने बिना देर किए पीएम पद से इस्तीफा दे दिया।

केवल 7 महीनों के लिए प्रधानमंत्री रहे

6 मार्च 1991 को चंद्रशेखर ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वह सबसे कम समय के लिए इस पद पर रहने वाले देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे। वह केवल 7 महीनों के लिए प्रधानमंत्री रहे। देश के 9वें प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर के नाम के साथ दो अनोखी बातें जुड़ी हैं। वह समाजवादी आंदोलन से निकले एकमात्र नेता रहे जो देश के प्रधानमंत्री बने। इसके अलावा वह ऐसे नेता थे जो सीधा प्रधानमंत्री बन गए।

चंद्रशेखर केंद्र तो क्या किसी राज्य में कभी मुख्यमंत्री या किसी मंत्री पद पर नहीं रहे और सीधे मंत्रियों के प्रधान बने। वह 1977 से 1988 तक जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 10 नवंबर, 1990 से 21 जून, 1991 तक के बेहद कम समय के लिए प्रधानमंत्री पद संभाला। दरअसल, उन्होंने इस्तीफा तो 6 मार्च 1991 को ही दे दिया था, लेकिन उन्हें अगली व्यवस्था होने तक इस पद पर बने रहने की जिम्मेदारी दी गई थी।


पूर्व पीएम चंद्रशेखर के बारे में जानें

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक किसान परिवार में जन्मे चंद्रशेखर को उनके क्रांतिकारी विचारों और गर्म स्वभाव के लिए जाना जाता था। वह समाजवाद के मजबूत स्तंभ आचार्य नरेंद्रदेव के शिष्य थे और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अपने छात्र जीवन में ही समाजवादी आंदोलन में शामिल हो गए थे। स्टूडेंट पॉलिटिक्स में वह फायरब्रैंड के रूप में देखे जाते थे। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर राम मनोहर लोहिया के साथ शुरू किया था। 8 जुलाई 2007 को लंबी बीमारी के बाद चंद्रशेखर का दिल्ली में निधन हो गया था।

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