महाराष्ट्र

वीर सावरकर पर फोकस…शाह के महाराष्ट्र दौरे के बाद क्या होगा बड़ा खेला, बीजेपी-उद्धव के साथ आने की अटकलें

मुंबई: महाराष्ट्र में ‘ठाकरे ब्रदर्स’ के एक साथ आने की अटकलों के बाद एक नई चर्चा सामने आई है। इसमें कहा जा रहा है कि निकाय चुनावों में बीजेपी और उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी की दोस्ती फिर हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि दोनों दलों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत भी चल रही है। अगर ऐसा होता है महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दो फाड़ होने के बाद यह दूसरी सबसे बड़ी सियासी घटना होगी। यह चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब कुछ दिन पहले ही मनसे चीफ राज ठाकरे ने कहा था कि महाराष्ट्र की राजनीति से पवार और ठाकरे ब्रांड को खत्म नहीं किया जा सकता है।

निकाय चुनावों से पहले दोस्ती!
राजनीतिक हलकों में चर्चा छिड़ी है कि महाराष्ट्र में मुंबई के बीएमसी और निकाय चुनावों से पहले भाजपा और शिवसेना यूबीटी के बीच रिश्ते सहज करने की कोशिशें शुरू हुई हैं। इसके लिए राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को एक बड़ा माध्यम बनाने का प्रयास किया जा रहा है, हाल ही में बीजेपी ने वीर सावरकर पर फोकस बढ़ाया है। ऐसा माना जा रहा है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे में स्थानीय चुनावों मे महाराष्ट्र को भगवा गढ़ बनाने पर चर्चा हुई। बीजेपी गुजरात की तरह महाराष्ट्र में अपना वर्चस्व चाहती है जहां पर कांग्रेस लाख कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं कर पाए। देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने के बाद उद्धव ठाकरे ने मुलाकात की थी। तब दोनों के बीच 20 मिनट तक एक साथ रहे थे। यह भी कहा जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी अगर साथ आने को तैयार होती है तो बीजेपी इसके जरूरी माहौल बनाने की तैयारी कर सकती है। बीजेपी से अलग होने के बाद भी शिवसेना यूबीटी का वीर सावरकर पर स्टैंड कायम रहा है।

बीती बातों को भुलाने की कोशिशें
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी ने शिवसेना यूबीटी को संकेत दिया है कि पिछली बातों को भूलकर अगर दोनों दल साथ आते हैं, तो राज्य में राजनीति की नई इबारत लिखी जा सकती है। बीजेपी ने यह भी संकेत दिया है कि अगर शिवसेना यूबीटी फिर से एनडीए में आती है, तो उसे महाराष्ट्र सरकार में भी उचित प्रतिनिधित्व मिल सकता है। पिछली बार मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों की राह अलग हो गई थी और महाराष्ट्र ने पहली बाद 360 डिग्री अलग राजनीति देखी थी। कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से उद्धव ठाकरे सीएम बने थे।

प्रियंका चतुर्वेदी प्रकरण का जिक्र
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने पहला संकेत शिवसेना यूबीटी सांसद प्रियंका चतुर्वेदी को ‘आपरेशन सिंदूर’ के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को शामिल करके दिया था। शिवसेना यूबीटी ने पहले किसी सांसद को इस टीम में शामिल करने से मना कर दिया था, लेकिन अंत में प्रियंका चतुर्वेदी को टीम में शामिल करने का ऐलान किया। तब आदित्य ठाकरे ने कहा था कि वैश्विक मंच पर भारत की एकजुटता के लिए वह सरकार के साथ है लेकिन पार्टी घरेलू फोरम पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करती रहेगी। एक्सपर्ट का कहना है कि पहले भी बीजेपी-शिवसेना के बीच खट्‌टे मीठे रिश्ते रहे हैं लेकिन यूबीटी से दोस्ती में एकनाथ शिंदे का क्या होगा? यह सबसे बड़ा सवाल है। उद्धव ठाकरे बीजेपी के साथ आने से पहले शिंदे को दूर करने की शर्त रख सकते हैं, हालांकि एक्सपर्ट किसी भी संभावना से इनकार कर रहे हैं।

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