भारत में अब चीतों की संख्या कितनी हुई ? 3 देशों से लाकर कूनो में छोड़े गए, 28 शावकों का यही जन्म हुआ

श्योपुर: मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता का प्रयोग सफल रहा है। कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था शनिवार को पहुंचा। बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए नौ चीतों को कूनो में छोड़ा गया है। 9 में से छह मादा और तीन नर हैं। अब तक तीन देशों के चीतों भारत में आ चुके हैं। जिसके बाद से देश में लगातार चीतों की संख्या बढ़ रही है।
किस देश में कितने चीते आए
भारत में तीन देशों से चीते लाए गए हैं। 45 चीते अभी कूनो नेशनल पार्क में हैं तो 3 गांधीसागर में हैं। अलग-अलग देशों से लाए गए चीतों को कूनो रास आ रहा है। नामीबिया से 8 चीते आए, जिनमें से पांच की मौत हो गई है। 3 अभी पूरी तरह से स्वस्थ हैं। नामीबिया से आए चीतों ने 17 शावकों को जन्म दिया है। दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए जिनमें से 4 की मौत हो चुकी है और 8 पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं। बोत्सवाना से 9 चीते भारत लाए गए हैं।
| किस देश से आए चीते | कितने चीते आए | अभी कितने जीवित |
| नामीबिया | 8 चीते | 3 जीवित बचे |
| दक्षिण अफ्रीका | 12 चीते | 8 जीवित बचे |
| बोत्सवाना | 9 चीते | सभी सुरक्षित |
स्वस्थ्य हैं सभी शावक
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से 8 वर्तमान में कूनो में पूर्णतः स्थापित और स्वस्थ हैं। इनमें से 3 चीतों को गांधी सागर अभ्यारण्य में सफलतापूर्वक स्थानांतरित किया गया है। दक्षिण अफ्रीकी माताओं से जन्मे 10 शावक जीवित और स्वस्थ हैं। भारत में जन्मी पहली वयस्क मादा चीता ‘मुखी’ ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो इस परियोजना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। ‘गामिनी’ दूसरी बार मां बनी है। ‘वीरा’ अपने 13 माह के शावक के साथ खुले जंगल में विचरण कर रही है जबकि ‘निर्वा’ अपने 10 माह के तीन शावकों के साथ संरक्षित बाड़े में है।
भारत में अब कुल कितने चीते
जानकारी के अनुसार, 28 शावकों का जन्म कूनो नेशनल पार्क में हुआ है। बोत्सवाना से 9 चीतों के आने के बाद अब चीतों की कुल संख्या 48 हो गई है, इनमें से 45 कूनो नेशनल पार्क में और 3 गांधी सागर अभयारण्य में हैं।
प्रोजेक्ट चीता की खास बातें
- 1952 में ‘विलुप्त’ घोषित किए जाने के बाद 70 सालों बाद भारत में चीतों की वापसी।
- कूनो नेशनल पार्क में इन चीतों को रखा गया है। उनके प्राकृतिक वास के लिए उपयुक्त माना गया।
- नामीबियाई चीता ‘आशा’ ने पहली बार भारत की धरती पर शावकों को जन्म दिया।
- कई शावकों के जन्म के बाद कूनो से गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में विस्तारित किया जा रहा है।
2022 में हुई थी प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत
दरअसल, भारत ने साल 1952 में खुद को ‘चीता विलुप्त’ देश घोषित किया था। इसके बाद साल 2022 में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले अपने जन्मदिन के मौके पर नामीबिया से लाए गए चीतों के पहले दल को छोड़ा था और उसके बाद यह तीसरा बड़ा दल यहां आया है।



