राजनीति

नक्सलवाद के समर्थन के आरोपों पर क्या बोले विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद लिए उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी

नई दिल्लीः उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के ‘इंडिया’ ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने शनिवार को खुद को नक्सलियों का समर्थक बताए जाने पर कहा कि उन्होंने कभी भी ऐसा काम नहीं किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बी. सुदर्शन रेड्डी को नक्सलियों का समर्थक बताया था।

अमित शाह ने क्या लगाए थे आरोप

बी. सुदर्शन रेड्डी को विपक्ष की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर अमित शाह ने कहा था कि ये वहीं सज्जन है जिन्होंने सलवा जुडुम का निर्णय दिया था। अगर यह निर्णय नहीं होता तो नक्सलवाद 2020 तक खत्म हो जाता है। बी सुदर्शन रेड्‌डी ने ऐसा विचारधारा से प्रेरित होकर किया था। केरल ने नक्सलवाद का दंश झेला है। ऐसे में यहां (केरल) के लोग देखेंगे कि कैसे कांग्रेस ने वामपंथियों के दबाव में आकर नक्सलियों के समर्थक को उम्मीदवार बना दिया।

गृह मंत्री के आरोप पर क्या बोले रेड्डी

अमित शाह के आरोप पर रेड्डी ने कहा, ‘मैंने आज तक कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसके बुनियाद पर आप कह सकते हैं कि मैं उनका (नक्सलियों) समर्थक हूं। एक चीज स्पष्ट है कि जजमेंट मेरा नहीं है, मैंने सिर्फ लिखा है, जबकि जजमेंट सिर्फ सुप्रीम कोर्ट का है। तीन लोगों ने इस जजमेंट को हटाने की कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। मुझे लगता है कि पूरा जजमेंट नहीं पढ़ा गया।’ रेड्डी ने सलवा जुडूम वाले फैसले पर कहा, ‘यह फैसला अच्छा है या बुरा है, उसे समाज समझेगा और उस पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। मैंने कभी अपने फैसले की तारीफ नहीं की।’

‘पीटीआई-भाषा’ को दिए इंटरव्यू में रेड्डी ने लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी किए जाने पर कहा, ‘अभी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं सुप्रीम कोर्ट का पूर्व न्यायाधीश हूं। ऐसे में टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा।’

मैं कोई सिक्योरिटी एक्सपर्ट नहीं

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर उन्होंने कहा, ‘मैं कोई सिक्योरिटी एक्सपर्ट नहीं हूं। जो हमला हुआ, उसके बारे में कोई दो राय हो सकती है क्या? निर्दोष को पकड़कर मारा गया। हिंदुस्तान में कोई व्यक्ति ऐसा है क्या, जो पहलगाम को लेकर दूसरी राय रखता हो? पूरे देश की एक ही राय है, वही राय मेरी भी है’

रेड्डी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कहा, ‘मैं इसके डिटेल में नहीं गया हूं। कोई विश्लेषण नहीं किया है। इसी कारण ऑपरेशन के बारे में पूरी जानकारी नहीं है, ऐसे में कुछ भी टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा।’ जातिगत जनगणना पर उन्होंने कहा, ‘इस पर मेरी राय का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय रख दी है।’ उन्होंने कर्नाटक धर्मस्थल विवाद पर कहा, ‘सवाल ये है कि ऐसा हुआ कि नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।’

उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि देश में ‘लोकतंत्र का अभाव’ है और संविधान चुनौतियों से घिरा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर चुने जाने की स्थिति में वह संविधान की रक्षा और संरक्षण के लिए संकल्पित रहेंगे।

लोकतंत्र में संसद में गतिरोध भी आवश्यकः रेड्डी

रेड्डी ने कहा कि लोकतंत्र में संसद में गतिरोध भी आवश्यक है, लेकिन इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अभिन्न अंग नहीं बनने देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा कि पहले घाटे वाली अर्थव्यवस्था की बात होती थी, लेकिन अब ‘डेफिसिट इन डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र का अभाव) है। रेड्डी ने कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र बना हुआ है, फिर भी यह ‘मुश्किल में’ है।

उन्होंने इस विषय पर चर्चा का स्वागत किया कि क्या वर्तमान समय में संविधान पर हमला हो रहा है। रेड्डी ने कहा कि लोकतंत्र व्यक्तियों के बीच टकराव से कम और विचारों के बीच टकराव से ज़्यादा जुड़ा है। सरकार और विपक्ष के बीच संबंध बेहतर होने चाहिए। गुवाहाटी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रेड्डी ने कहा कि ‘संविधान को अक्षुण्ण रखने की उनकी यात्रा जारी है, और अंततः अवसर मिलने पर यह संविधान की रक्षा और बचाव में परिणत होगी।’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘मैं इस यात्रा को भी ऐसा ही मानता हूं, और अंततः अवसर मिलने पर यह संविधान की रक्षा और संरक्षण में परिणत होगी…अब तक, मैं संविधान की रक्षा कर रहा था और यही एक न्यायाधीश को दिलाई जाने वाली शपथ है… इसलिए यह यात्रा मेरे लिए कोई नयी बात नहीं है।’

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