छत्तीसगढ़

अपनी परंपरा और संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए-मुख्यमंत्री साय

रायपुर। इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में करमा तिहार में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्टेज में मांदर पर थाप दी और पारंपरिक करमा नृत्य किया। इस अवसर पर सीएम साय ने कहा सौभाग्य का विषय है हमारे कंवर समाज की ओर से राजधानी रायपुर में समारोह को शुभारंभ किया जा रहा है। समाज एक अच्छी परंपरा का शुरूआत कर रहा है। अपनी परंपरा और संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। हमारे बेटा-बेटी पढ़ लिख कर आगे बढ़ जाते हैं और अपनी परंपरा व संस्कृति को भूल जाते हैं। यह हम सबको याद रखना है कि अपनी परंपरा और संस्कृति को भूलना नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई तरह के करमा है। आज का त्योहार कुंवारी बेटियों की त्योहार है। बेटियों को अच्छा वर और घर मिले इसलिए ये पूजा की जाती है। दशहरा करमा विवाहित बेटी के लिए होता है। जितिया करमा बेटा बेटी के उम्र बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। बीमारी को दूर करने के लिए बांबा करमा मनाया जाता है, युवा बेटा उपासना करते हैं। सूखा दूर करने के लिए पानी करमा होता है, जिसमें इंद्र देव का उपासना की जाती है।

सीएम साय ने कहा कि आज हिन्दी दिवस है। इस साल से मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में होगी, जो हिन्दी में पढ़ना चाहता है उनको हिन्दी में पढ़ाया जाएगा। नई शिक्षा नीति रोजगार परख है। स्कूलों में अपनी भाषा व बोली में पढ़ाई शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री की सोच है कि बच्चों को उनकी भाषा में ही शिक्षा मिले। प्रदेश ये हमने शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ धान कटोरा है, 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान खरीदी की गई है। महतारी वंदन योजना के तहत विवाहित महिलाओं को हर माह एक हजार रुपए दिया जा रहा है। अयोध्या दर्शन योजना चला रही है। आपके समाज के बेटा प्रदेश के विकास लिए काम कर रहा है।

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