जल संरक्षण से बदली किसानों की तस्वीर, राजपुर का सामुदायिक चेक डेम बना ग्रामीण समृद्धि का मॉडल

00 विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत बना चेक डेम किसानों के लिए साबित हुआ वरदान
00 भू-जल स्तर बढ़ा, 10 हेक्टेयर भूमि को मिली सिंचाई, 1671 मानवदिवस का हुआ रोजगार सृजन
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए किए जा रहे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड की ग्राम पंचायत राजपुर में निर्मित सामुदायिक चेक डेम आज जल संरक्षण, रोजगार सृजन और कृषि समृद्धि का उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। इस परियोजना ने न केवल वर्षा जल को संरक्षित किया है, बल्कि किसानों को वर्षभर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।ग्राम पंचायत राजपुर में भागवत के खेत के समीप निर्मित इस सामुदायिक चेक डेम के निर्माण के लिए 16.02 लाख रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। परियोजना के पूर्ण होने तक कुल 15.69 लाख रुपए व्यय किए गए, जिसमें 2.79 लाख रुपए मजदूरी एवं 12.55 लाख रुपए सामग्री पर खर्च किए गए। इस कार्य से कुल 1671 मानवदिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे स्थानीय श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला, पलायन में कमी आई और अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
10 हजार घनमीटर से अधिक जल संरक्षण क्षमता
12 मीटर स्पैन वाले इस चेक डेम की 10,080 घनमीटर जल संरक्षण क्षमता पूरे क्षेत्र की जल व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रही है। पहले जहां वर्षा का अधिकांश पानी बहकर नालों में चला जाता था, वहीं अब वही पानी संरक्षित होकर धीरे-धीरे भू-जल भंडार को समृद्ध कर रहा है। इसका परिणाम यह हुआ कि आसपास के कुएं, हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है तथा गर्मियों में भी पानी की उपलब्धता पहले की तुलना में बेहतर बनी रहती है।
खेती हुई आत्मनिर्भर, किसानों की बढ़ी आय
इस परियोजना का लाभ श्री भगवाता सुखराम, श्री बुसाहु राम सिंह, श्रीमती चितरेखा पुनित, श्री ईष्वरी मधुर सिंह तथा श्री केवल पचरू सहित अनेक किसानों को मिल रहा है। पहले जहां खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, वहीं अब किसान खरीफ के साथ-साथ रबी और सब्जी फसलों की भी सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से उत्पादन में वृद्धि हुई है, खेती की लागत कम हुई है और किसानों की आय में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। तकनीकी सहायक सुश्री पूजा पटेल के अनुसार चेक डेम का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया है तथा इससे लगभग 10 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकती है। यह संरचना जल संरक्षण के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सूखे की स्थिति में किसानों को राहत प्रदान करने तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जल संरक्षण से गांव को मिला स्थायी समाधान
ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक के अनुसार चेक डेम बनने के बाद वर्षा जल गांव में ही संरक्षित हो रहा है, जिससे खेतों में लंबे समय तक नमी बनी रहती है और किसानों को समय पर सिंचाई उपलब्ध हो जाती है। किसानों का कहना है कि अब फसल खराब होने की चिंता काफी कम हो गई है तथा खेती अधिक लाभकारी बन गई है। राजपुर का यह सामुदायिक चेक डेम आज केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन, ग्रामीण रोजगार और कृषि समृद्धि का एक सफल एवं प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है। यह परियोजना इस बात का सशक्त प्रमाण है कि यदि वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण किया जाए तो जल संकट का स्थायी समाधान संभव है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा एवं नई दिशा दी जा सकती है।



