संपादकीय

मणिपुर में शांति का इंतजार

मणिपुर में शांति बहाली के लिए सभी पक्षकारों का किसी आम सहमति पर आना जरूरी है। वहां तीन पक्ष हैं – मैतेई, कुकी और नगा। यह विवाद शुरू हुआ था मैतेई समुदाय को ST का दर्जा देने की मांग के साथ। कुकी और नगा इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन, जिस तरह से इस विवाद में जंगल और जमीन का मुद्दा, अवैध प्रवासियों की समस्या, ड्रग्स का जाल और दूसरे कानूनी पहलू उभरते चले गए, उससे स्पष्ट है कि गतिरोध कई मोर्चों पर है और इन सभी पर काम किए जाने की जरूरत है। जब भी ऐसा लगता है कि मणिपुर में हालात शायद कुछ बेहतरी की ओर बढ़ रहे हैं, तभी करीब डेढ़ बरस से सुलग रही आग फिर भड़क उठती है। इस महीने की शुरुआत से राज्य में जिस तरह एक के बाद एक हिंसक घटनाओं का सिलसिला चला है, उसने चिंता और बढ़ा दी है। केवल मणिपुर ही नहीं, यह पूरे देश के लिए सोचने की बात है कि आखिर मई 2023 से शुरू हुए विवाद को अभी तक क्यों सुलझाया नहीं जा सका।

अराजक तत्व
राज्य में चल रहा विरोध-प्रदर्शन दिन-ब-दिन और हिंसक होता जा रहा है। अब रॉकेट और बम चल रहे हैं और पुलिस अफसरों को चिंता जतानी पड़ रही है कि सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ अत्याधुनिक घातक हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा।

घातक हथियार

अगर प्रदर्शन आम लोगों और स्टूडेंट्स का है, तो ये हथियार कहां से आ रहे? पिछले दिनों राज्य के पहले मुख्यमंत्री के आवास पर रॉकेट से हमला हुआ था। इसी शनिवार को एक मंत्री के आवास पर ग्रेनेड अटैक हुआ। इन घटनाओं से पता चलता है कि राज्य में ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जो हालात को सामान्य नहीं होने देना चाहते।

विवाद के कई पहलू

मणिपुर में शांति बहाली के लिए सभी पक्षकारों का किसी आम सहमति पर आना जरूरी है। वहां तीन पक्ष हैं – मैतेई, कुकी और नगा। यह विवाद शुरू हुआ था मैतेई समुदाय को ST का दर्जा देने की मांग के साथ। कुकी और नगा इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन, जिस तरह से इस विवाद में जंगल और जमीन का मुद्दा, अवैध प्रवासियों की समस्या, ड्रग्स का जाल और दूसरे कानूनी पहलू उभरते चले गए, उससे स्पष्ट है कि गतिरोध कई मोर्चों पर है और इन सभी पर काम किए जाने की जरूरत है।

अपना फायदा

एक बड़ी समस्या यह आ रही है कि हर पक्ष मणिपुर को बस अपनी नजर से देख रहा है। कुकी समुदाय को लगता है कि राज्य का मौजूदा सीएम एन बीरेन सिंह का नेतृत्व उनके साथ न्याय नहीं कर सकता। मैतेई समुदाय चाहता है कि राज्य सरकार को केंद्रीय सुरक्षा बलों की कमान भी दे दी जाए। वहीं, तीसरा धड़ा यानी नगा समुदाय अपने लिए अलग प्रशासनिक ढांचे की मांग कर रहा है, जबकि मैतेई राज्य के किसी भी तरह के बंटवारे के खिलाफ हैं। कुल मिलाकर स्थिति बहुत उलझी हुई है, जिसे संवेदनशीलता के साथ सुलझाने की जरूरत है।

बाहरी संकट
पूर्वोत्तर ने लंबे समय तक उग्रवाद की मार झेली है। मौजूदा संकट से पुरानी समस्या के फिर सिर उठाने का खतरा पैदा हो गया है। इस ओर ध्यान इसलिए भी जाता है क्योंकि पड़ोसी म्यांमार में जुंटा को सत्ता संभालने में मुश्किल आ रही है। सशस्त्र विद्रोहियों की ताकत वहां बढ़ रही है। केंद्र की नजर इस पर जरूर होगी। म्यांमार की उथल-पुथल मणिपुर में कोई हलचल न मचाए, इसके लिए अपना घर जल्द से जल्द ठीक करना होगा।

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