संपादकीय

महाकुंभ में वीआईपी बनाम भीड़

भारत में करीब 5.80 लाख लोगों को सरकारी सुरक्षा हासिल है। उन्हें ही ‘अति विशिष्ट’ माना जाता है। उनके आगे-पीछे पुलिस के वाहन दौड़ते हैं और सडक़ का रूट साफ करते रहते हैं। सुरक्षा बलों के जवान और वाहन भी इस जमात की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। भारत के संविधान और गृह मंत्रालय की सुरक्षा संबंधी सूची में सिर्फ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ही देश के ‘अति विशिष्ट चेहरे’ हैं। उनकी सुरक्षा एक संवैधानिक दायित्व भी है। वे प्रयागराज के महाकुंभ में, त्रिवेणी संगम में, पवित्र और आस्थामय स्नान करने गए, उन्हें ‘अति विशिष्ट’ का आतिथ्य दिया गया, सुरक्षा बंदोबस्त किए गए, एक अलग सडक़ उनकी आवाजाही के लिए तय की गई, उन्हें भीड़ के महाजाम में फंसना नहीं पड़ा, हमें इस व्यवस्था और स्थिति पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वे भारत के ‘प्रतीक चेहरे’ हैं। सवाल उन वीआईपी टिकटों पर है, जिनकी बंदरबांट की गई, जिन्हें ऐसा रुतबा हासिल नहीं है और न ही संविधान में उनका कोई प्रावधान है। यदि सुरक्षा-व्यवस्था ऐसे ‘अति विशिष्ट’ व्यक्तियों की सेवा में लगी रही और महाकुंभ तथा आसपास के क्षेत्रों में 20-25 किलोमीटर या उससे भी अधिक का महाजाम श्रद्धालुओं को ‘त्राहि माम’ करने पर विवश करता रहा, तो उस स्थिति पर सवाल भी उठेंगे और बदइंतजामी की आलोचना भी की जाएगी। भारत में अघोषित और वर्गीकरण के तौर पर करीब 10 लाख ‘वीआईपी’ हैं। एक भारत उनका है और दूसरा भारत कीड़े-मकौड़ों की उस महाभीड़ का है, जो देश की सत्ता तो चुनते हैं, लेकिन उनका कोई दर्जा, कोई चेहरा नहीं है।

वे अनाम, अनचीन्ही भीड़ के आम आदमी हैं, जिनकी आस्था और भक्ति वीआईपी जमात के समान ही है। महाकुंभ में ऐसे भक्तों का सैलाब उमड़ा कि मध्यप्रदेश में रीवा, कटनी, सतना सरीखे शहरों में महाजाम लग गया। हालांकि ये शहर प्रयागराज से 300 किलोमीटर तक दूर हैं। अंतत: मुख्यमंत्री मोहन यादव को अपील जारी करनी पड़ी कि अभी महाकुंभ में जाना स्थगित कर दें। यदि आप संगम में डुबकी लगाना ही चाहते हैं, तो अपने जोखिम पर जाएं और पर्याप्त तैयारी के साथ जाएं, क्योंकि अत्यंत लंबे महाजाम लगे हैं। मुख्यमंत्री का ऐसा सावधान करना उचित है, क्योंकि दमघोंटू महाजाम हैं। उसमें बच्चे, बूढ़े, महिला और बीमार सभी फंसे हैं। यदि कोई बीमार बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े, तो उसे उठाना और अस्पताल तक पहुंचाना भी असंभव है। ऐसे हालात के बावजूद आम आदमी किसी भी तरह स्नान करने को आमादा है। यह कैसी भक्ति है! एक जगह तो भीड़ रेल के इंजन में ही घुस गई। किसी तरह उसे बाहर निकाला गया। बहरहाल 5 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी के स्नान के बाद 6 राज्यों के मुख्यमंत्री, 4 राज्यपाल, 40 केंद्रीय मंत्री, सांसद, उद्योगपति और 30 से अधिक नौकरशाह वीआईपी व्यवस्था के कारण संगम पहुंचे और उन्होंने आराम से स्नान किया, आरतियां उतारीं। उन्हें महाभीड़ का एहसास तक नहीं हुआ। सवाल आम आदमी का है।

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