छत्तीसगढ़

मनरेगा में नियमों का उल्लंघन : पंचायत और प्रशासन पर उठे सवाल

खैरागढ़. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीणों को रोजगार देने की मंशा पर ग्राम पंचायत चोरलाडीह में सवाल खड़े हो गए हैं। यहां मनरेगा के तहत चल रहे कार्य स्थल पर मजदूरों के साथ-साथ जेसीबी मशीन से भी काम कराए जाने का मामला सामने आया है, जिससे योजना के नियमों और पारदर्शिता पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।

जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत छुईंखदान के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चोरलाडीह में मनरेगा के तहत भूमि समतलीकरण और तालाब सुधार का कार्य स्वीकृत है, लेकिन आरोप है कि योजना के तहत मजदूरों से काम कराने के बजाय जेसीबी मशीन का उपयोग किया जा रहा है। मौके पर जब मीडिया टीम पहुंची तो कार्य स्थल पर जेसीबी मशीन क्रमांक CG 08 AQ 2364 से तालाब में कार्य होते देखा गया, जिससे पूरे मामले की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो गए।

मौके पर मौजूद ग्रामीण हिमांचल लिल्हारे ने मीडिया से बातचीत में बताया कि स्थल पर जो उबड़-खाबड़ जमीन है, उसे गांव वालों की सहमति से अपने निजी खर्च पर ठीक कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में गांव में मौखिक सहमति बनी है और पंचायत की इसमें कोई भूमिका नहीं है। उनका यह भी कहना था कि मनरेगा के तहत काम करने का समय अलग है और जेसीबी से काम करने का समय अलग रखा गया है। हालांकि ग्रामीण के इस बयान ने मामले को और उलझा दिया है, क्योंकि जिस स्थल पर मनरेगा कार्य स्वीकृत है, उसी स्थान पर मशीन से कार्य होना नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है।

इस पूरे मामले में सरपंच प्रतिनिधि केवल सिंह ध्रुव का बयान भी सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि वे सुबह लगभग 10 बजे तक ही मौके पर रहते हैं और उसके बाद वहां क्या होता है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। पंचायत प्रतिनिधि का यह बयान जिम्मेदारी से बचने का प्रयास माना जा रहा है, क्योंकि योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी पंचायत और संबंधित अधिकारियों की होती है।

मनरेगा योजना के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार श्रमिकों को रोजगार देना प्राथमिक उद्देश्य है और श्रम आधारित कार्यों में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है। ऐसे में यदि मशीन से कार्य कराया जा रहा है तो यह न केवल योजना के नियमों का उल्लंघन है बल्कि इससे मजदूरों के रोजगार के अधिकार पर भी सीधा असर पड़ता है। फिलहाल इस पूरे मामले में जनपद पंचायत और संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे प्रशासन की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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