छत्तीसगढ़

पंचायत चुनाव का ग्रामीणों ने किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान, जानिए क्या है वजह…

बलौदाबाजार. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे जिले में लगातार चुनाव बहिष्कार के मामले सामने आ रहे हैं. पहले कसडोल विकासखंड के ग्राम कोट पंचायत में ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था. अब बलौदा बाजार विकासखंड में 23 फरवरी को पंचायत चुनाव होना है, लेकिन यहां ग्राम पंचायत कुकुरदी के ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी है.

ग्रामीण ग्राम पंचायत के बंजर भूमि में बलौदा बाजार से लाकर बसाये गये सांवरा जाति के लोगों को ग्राम कुकुरदी के वार्ड नंबर 12 में शामिल किये जाने का विरोध कर रहे हैं. यह विरोध सन 2013 से चला आ रहा है. पूर्व में सांवरा बस्ती के लोग बलौदा बाजार के वार्ड नंबर 2 में मतदान करते थे और लोकसभा, विधानसभा में भी इन्होंने बलौदा बाजार में ही वोट डाला था. इसके अलावा सोसाइटी से मिलने वाला चांवल भी इन्हें बलौदा बाजार से ही मिलता है, पर अब इन्हें फिर से कुकुरदी ग्राम पंचायत में शामिल किया गया है, जिसे लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है और वे ग्राम पंचायत के साथ ही जनपद व जिला पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं. इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा था.

वहीं बताया जा रहा है कि सांवरा बस्ती से एक महिला ने पंच पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, जिसके बाद वह निर्विरोध पंच निर्वाचित हो चुकी है. ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार को लेकर आज ग्राम कुकुरदी में बैठक किया और एक मत से सभी ने इस पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. 

ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच संतोष धुव ने बताया कि हम सन 2013 से सांवरा बस्ती को ग्राम पंचायत कुकुरदी में शामिल किये जाने का विरोध कर रहे हैं और पहले इसको  पूर्व कलेक्टर ने माना और बस्ती के लोग बलौदा बाजार के वार्ड नंबर 2 में विधानसभा व लोकसभा में मतदान किये थे. पर अब पुनः ग्राम पंचायत कुकुरदी में शामिल किया गया है जिसका ग्रामीणों ने एकमत होकर विरोध करने का मन बनाया है. हमारी मांग है कि उन्हें बलौदा बाजार का ही निवासी रहने दे कुकुरदी में शामिल नहीं करे. और इसको लेकर विरोध कर रहे हैं. 

वही इस संबंध में जब बलौदा बाजार एसडीएम अमित गुप्ता व चुनाव अधिकारी तहसीलदार राजल पटेल से पुछा गया तो उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया. सवाल यह उठता है कि जिला प्रशासन इतने वर्षों के बाद भी ग्राम पंचायत कुकुरदी के ग्रामीणों व बसाहट में बसे सांवरा बस्ती के बीच सामंजस्य क्यों नहीं बैठा पाया और न ही उनकी समस्या का हल कर पाया. अब देखना होगा कि इस बहिष्कार को राज्य चुनाव आयोग किस तरह हल करता है. क्या पुनः चुनाव होगा या सांवरा बस्ती की महिला पंच ही ग्राम पंचायत कुकुरदी का दायित्व संभालेगी..

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