अनोखा रिवाज: पहले दुल्हन सुनाती है सुंदरकांड की चौपाई तब होती है शादी, 7 नहीं 4 फेरे से पूरा होता विवाह

आगरा: आपने कई जाति धर्मों और जनजातियों में शादी की अलग-अलग रीति-रिवाज और रस्में देखी होंगी. कई बार क्षेत्र के हिसाब से भी रीति रिवाज बदलते हैं. ऐसे रीति रिवाज दूसरी जगह देखने को नहीं मिलते लेकिन मूल रूप से गुजरात व मध्यप्रदेश के इलाकों में रहने वाले घुमंतू जाति बागरी समाज के लोगों में एक अनोखा शादी का रिवाज़ है. यहां शादी से पहले दुल्हन को रामायण और सुंदरकांड की चौपाइयां याद करके सुनानी होती है. ये अनोखा रिवाज़ सालों से इस समाज के लोगों में चला आ रहा है. आगरा में भी इसी रिवाज को पूरा करते हुए दीपक और रोशनी की शादी हुई है जो कि अब लोगों में काफी मशहूर हो रही है.
मूल रूप से झांसी की रहने वाली रोशनी की शादी आगरा के रहने वाले दीपक के साथ हुई है. दीपक आगरा के सेक्टर तीन आवास विकास में रहते हैं और वह कपड़ों के बदले बर्तन बेचने का काम करते हैं. मंगलवार को उनकी शादी झांसी की रहने वाली बागरी समाज की रोशनी के साथ हुई. घुमंतू जनजाति समाज का काम देख रहे संघ के लोगों ने दीपक और रोशनी का आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया. रोशनी आगरा जाकर बेहद खुश हैं.
आगे भी शिक्षा की अलख जगाना चाहती है रोशनी
रोशनी ने बताया कि उनके परिवार में कुल मिलाकर 10 सदस्य हैं. बागरी समाज में कई सालों से प्रथा चली आ रही है कि जब भी कोई लड़की विवाह योग्य होती है. उससे पहले लड़की को रामायण सुंदरकांड ,गीता के कुछ श्लोक व चोपाई कंठस्थ याद कराई जाती है. लड़की को 5 से 10 श्लोक याद होने चाहिए. जब लड़की की शादी होती है, तो वर पक्ष को वधू श्लोक सुनाती है. उन्होंने भी रामायण की चौपाई सुनाई थी तब जाकर उनकी शादी तय हुई. इसके साथ ही उनके यहां कई ऐसे रिवाज हैं जो आम लोगों की शदियों से अलग है. उनके यहां 7 की जगह केवल 4 फेरे होते हैं.
दुल्हन ने सुनाई रामायण की चौपाई तब हुई शादी
श्लोक सुनने के पीछे केवल एक ही वजह बताई जाती है कि लोग धर्म व पुराणों से जुड़े रहें. रोशनी का कहना है कि उन्हें आगे भी पढ़ाई करनी है क्योंकि उनके समाज में ज्यादा लोग पढ़े-लिखे नहीं होते हैं. श्लोक उन्हें उनके स्कूल में सिखाए जाते हैं और जब श्लोक याद हो जाते हैं तो उन्हें उपहार भी दिया जाता है.



