संपादकीय

अप्रत्याशित जनादेश

आम चुनाव का जनादेश बेहद अप्रत्याशित रहा। बेशक भाजपा-एनडीए के पक्ष में स्पष्ट बहुमत लगता है, लेकिन भाजपा अपने बूते बहुमत के जादुई आंकड़े को छूती नहीं लगती। भाजपा अभी तक 243 सीटों पर विजयी रही है, जबकि मतगणना जारी थी। बहुमत के लिए कमोबेश 272 का आंकड़ा अपेक्षित है। दूसरी ओर कांग्रेस 97 सीटें जीती थी। यह आंकड़ा 2019 की 52 सीटों से लगभग दोगुना है। यह आलेख लिखने तक ‘इंडिया’ गठबंधन ने 228 सीटें जीत कर देश को चौंका दिया है। भाजपा को सबसे बड़ा झटका उप्र में लगा, जहां वह 70 से अधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही थी, लेकिन अब आंकड़ा 35 के करीब थमता लगता है। सपा और कांग्रेस 40 सीटों से भी आगे थीं। उप्र ने भाजपा की स्पष्ट जीत के तमाम समीकरण उलट दिए हैं। पार्टी नेतृत्व समझ ही नहीं पा रहा है कि आखिर उप्र में ऐसा झटका क्यों लगा? उप्र के अलावा पश्चिम बंगाल में ‘दीदी’ का करिश्मा एक बार फिर चला और भाजपा सबसे शानदार जीत हासिल करने में नाकाम रही है। ममता बनर्जी की पार्टी ‘तृणमूल कांग्रेस’ कुल 42 सीटों में से 32 सीट पर निर्णायक तौर पर आगे थी। राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों में भी, भाजपा के लिए, खूब उलटफेर हुए। तमिलनाडु और पंजाब में तो भाजपा ‘शून्य’ रही है। दक्षिण भारत की पहली उम्मीद केरल साबित होता लगता है, जहां भाजपा 2 सीटों पर आगे थी। अब की बार आंध्रप्रदेश, केरल में भाजपा का खाता खुलता लग रहा है। हालांकि तेलंगाना में भाजपा बेहतर प्रदर्शन करती लग रही है, लेकिन कर्नाटक का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा, जिसकी अपेक्षा थी। आंध्रप्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी-भाजपा गठबंधन को विधानसभा में प्रचंड बहुमत मिला है, लिहाजा नए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू होंगे। बेशक गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड आदि राज्यों में भाजपा ने लगभग ‘क्लीन स्वीप’ किया है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा पहली बार बहुमत हासिल करने में नाकाम रही है।

अब भाजपा आत्ममंथन करेगी कि अयोध्या वाली संसदीय सीट पर उसका प्रत्याशी क्यों पराजित हो गया? क्या राम मंदिर से अधिक प्रभाव अन्य जातियों और मुद्दों का रहा? बहरहाल अकेली भाजपा न तो 370 का लक्ष्य हासिल कर पाई और 400 पार तो बहुत दूर की कौड़ी है। हम अपने आलेखों में जिक्र करते रहे हैं कि संविधान बदलने और लोकतंत्र खत्म होने सरीखे मुद्दों ने उप्र, राजस्थान, हरियाणा जैसे राज्यों के ग्रामीण अंचलों में लोगों को सोचने पर विवश किया था, लिहाजा वोट भाजपा के पक्ष में नहीं डाले जाएंगे। ऐसा ही कुछ हुआ है कि भाजपा पराजित हुई है। इनसे आरक्षण का मुद्दा भी शंकित हुआ। उसके मद्देनजर भी वोट बदले गए। बेशक नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लें, क्योंकि भाजपा-एनडीए के पक्ष में फिलहाल 298 सीटों का समर्थन है। इनमें करीब 240 सीटें भाजपा की हैं और 227 सीटें कांग्रेस नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन के पक्ष में हैं। गौरतलब यह है कि टीडीपी की 16 और जद-यू की 14 सीटें एनडीए और मोदी सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की है। शरद पवार भी नायडू और नीतीश के संपर्क में बताए जाते हैं। क्या तोडफ़ोड़ का खेल शुरू हो गया है? क्या यह अनिश्चितता केंद्र सरकार की स्थिरता पर सवाल साबित हो सकती है? 2024 के जनादेश ने साबित किया है कि कांग्रेस इस देश से कभी भी खत्म नहीं की जा सकती।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी केरल की वायनाड और रायबरेली सीटों से जीत रहे हैं। कांग्रेस को इस चुनाव में 97 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस चुनाव में अखिलेश यादव की सपा ने भी जबरदस्त जीत हासिल कर अपना नेतृत्व साबित किया है। अब ओडिशा में भी भाजपा सरकार बनेगी। जनता ने नवीन पटनायक के विकल्प के तौर पर भाजपा का शासन चुना है। कोई जीता, कोई हारा, लेकिन भारत देश का सबसे बड़ा लोकतंत्र निर्विवाद रूप से विजयी रहा। लोकसभा चुनाव का एक संदेश यह भी है कि आम आदमी पार्टी के पक्ष में सहानुभूति की कोई लहर नहीं चली। दिल्ली में सभी सात सीटें भाजपा जीत रही थी, जबकि पंजाब में भी आप कुछ खास नहीं कर पाई।

Show More

Daily Live Chhattisgarh

Daily Live CG यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, बिजनेस, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button