लोकसभा में नारेबाजी के बीच बिना बहस के पारित हुए दो और अहम विधेयक, राज्यसभा से ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल भी पास

नई दिल्ली: लोकसभा और राज्यसभा में मंगलवार को एक बार फिर हंगामा व नारेबाजी हुई। लोकसभा में जारी गतिरोध और हंगामे के बीच ही एक दो अहम विधेयकों राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 और केरल विधेयक 2026 को बिना चर्चा के ही ध्वनि मत से पारित करा दिया गया। जबकि राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल को पारित कराया गया।
सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से एनसीडीसी (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में संशोधन करना है, ताकि सहकारी समितियों के लिए निधिकरण प्रक्रिया को तेज और अधिक लचीला बनाया जा सके। इस विधेयक का उद्देश्य सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय, एनसीडीसी (एनसीडीसी) की भूमिका का विस्तार करना है, जो सहकारी समितियों को वित्तपोषित और प्रोत्साहित करता है, ताकि देशभर में सहकारी क्षेत्रों को वित्तपोषित किया जा सके।
केरल विधेयक 2026 भी बिना चर्चा के हुआ पास
केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, भी लोकसभा में लगातार नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश किया, जबकि विपक्षी सांसद 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति और बयान की मांग करते हुए नारेबाजी कर रहे थे।
राज्यसभा से पारित हुआ ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल
वहीं राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद (ट्रिब्यूनल) अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक को सदन में पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अधिकरणों की नियुक्ति प्रक्रिया, सेवा शर्तों, पारदर्शिता, दक्षता और न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना है।
बिल में क्या हैं प्रावधान?
- अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह आयोग अधिकरण व्यवस्था के लिए एक स्वतंत्र, पारदर्शी और संस्थागत ढांचा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा, “अधिकरण सदस्यों का कार्यकाल और स्पष्ट सेवा शर्तें न्यायिक स्वतंत्रता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए विधेयक में 5 वर्ष के कार्यकाल का प्रावधान रखा गया है, जो निर्धारित ऊपरी आयु सीमा के अधीन होगा।”
- मंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्रता के लिए अलग से कोई न्यूनतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल, वेतन, भत्ते तथा अन्य सेवा शर्तों को नियमों के माध्यम से विनियमित करने का प्रस्ताव है। मेघवाल ने कहा कि अधिकरण सुधार का उद्देश्य न्याय तक पहुंच आसान बनाना, कारोबार सुगमता बढ़ाना और वैश्विक सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाना है। इससे भारत के कानूनी और संस्थागत ढांचे को मजबूती मिलेगी और समयबद्ध तथा प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
नित्यानंद राय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केरल का नाम बदलने के विधेयक पर चर्चा नहीं करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। जब हंगामा बंद नहीं हुआ, तो विधेयक को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।



