राष्ट्रीय

भरोसा धीरे-धीरे कायम होता है, जल्दी खो भी जाता है, न्याय व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी से काम करें: CJI

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जोर देकर कहा है कि कानूनी व्यवस्था में जनता का विश्वास वकीलों के आचरण पर बहुत हद तक निर्भर करता है। उन्होंने कहा-कानूनी पेशे में जनता का विश्वास उन लोगों की ईमानदारी और निरंतरता पर निर्भर करता है जो वकालत करते हैं।
उन्होंने कहा-हर पेशेवर निर्णय चाहे वह फीस, मुवक्किल की गोपनीयता, हितों के टकराव या अदालत में व्यवहार से संबंधित हो, उस विश्वास को मजबूत या कमजोर करने में योगदान देता है। गांधीनगर में आयोजित गुजरात राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (GNLU) के 16वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत ने युवा विधि स्नातकों को यह सशक्त और व्यावहारिक संदेश दिया।

CJI सूर्यकांत ने कहा-विश्वसनीयता धीरे-धीरे बनती है

  • वेबसाइट ‘लॉ चक्र’ के अुनसार, मुख्य न्यायाधीश द्वारा नैतिक आधारों पर जोर देना महत्वपूर्ण है। वह भी तब जब आज के माहौल में जहां संस्थानों में जनता के विश्वास पर कड़ी नजर रखी जाती है।
  • सीजेआई सूर्यकांत ने छात्रों को याद दिलाया कि विश्वसनीयता धीरे-धीरे बनती है और जल्दी ही खो भी जाती है। वकीलों को न केवल अपनी सफलता के लिए बल्कि न्याय व्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए भी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

वकालत में विशेषज्ञता जरूरी, औसत दर्जे से नहीं चलेगा काम

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि विधि पेशे में विशेषज्ञता को महत्व दिया जाता है, न कि औसत दर्जे को। उन्होंने न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने के लिए ईमानदारी, प्रशिक्षण और अकादमिक जगत और व्यवहार के बीच के अंतर को पाटने पर भी बल दिया। यह आयोजन बीते 28 फरवरी को हुआ था, जिसकी पूरी बातें अब सामने आई हैं।

  वास्तविक सफलता कब मिलती है, ये भी बताया

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-विधि पेशे में हर क्षेत्र में समान रूप से हाथ आजमाने वालों को सफलता नहीं मिलती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक सफलता तब मिलती है जब एक वकील यह समझ लेता है कि इस पेशे में उसकी वास्तविक जगह क्या है और फिर उसी दिशा में निरंतर कार्य करता है।

सीजेआई सूर्यकांत ने युवा विधि स्नातकों को एक सशक्त और व्यावहारिक संदेश दिया। टी-20 क्रिकेट के सरल लेकिन प्रभावशाली उदाहरण का प्रयोग करते हुए, उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपनी क्षमताओं को शीघ्र पहचानें और हर चीज में औसत दर्जे का बनने की कोशिश करने के बजाय उन्हीं क्षमताओं के इर्द-गिर्द अपना करियर बनाएं।

देशभर में 17 लाख रजिस्टर्ड वकील, 50 करोड़ लंबित केस

दीक्षांत समारोह ऐसे समय में हुआ जब भारतीय कानूनी व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। देश भर में 17 लाख से अधिक पंजीकृत वकीलों और 50 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के साथ, दक्षता और विशिष्ट क्षेत्र की विशेषज्ञता की स्पष्ट आवश्यकता है।

  • सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-मेरे प्रिय स्नातकों इस पेशे में आपकी सही जगह क्या है, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका सामना जल्द से जल्द करना आवश्यक है, क्योंकि यह शायद ही कभी उन लोगों को पुरस्कृत करता है जो हर चीज में समान रूप से प्रयास करते हैं।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समझ तुरंत नहीं आती। यह अनुभव, आत्म-चिंतन और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से धीरे-धीरे विकसित होती है।
  • सच्ची विशेषज्ञता समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। कई सफल वकील धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाते हैं। कानून की शिक्षा में नक्शा सिखाया जाता है, लेकिन वास्तविक अभ्यास में जमीनी हकीकत को समझना जरूरी होता है, जहां चुनौतियां जटिल और गतिशील होती हैं।
    नए कानूनों की व्याख्या के लिए विशेषज्ञ वकील जरूरी
  • जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-भारत में भारतीय न्याय संहिता और अन्य नए कानूनों के लागू होने के साथ ही आपराधिक कानून में व्यापक सुधार हो रहे हैं।
  • ऐसे समय में, नए कानूनों के सुचारू कार्यान्वयन और उचित व्याख्या के लिए कुशल और विशेषज्ञ वकीलों की आवश्यकता है। विशेषज्ञ पैरवी से देरी कम हो सकती है, दलीलों की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है और अदालतों को न्याय दिलाने में तेजी आ सकती है।
  • सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-सत्यं वद, धर्मं चर
  • अपने संबोधन के आखिर में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तैत्तिरीय उपनिषद के प्राचीन भारतीय ज्ञान का हवाला देते हुए स्नातकों को उनकी नैतिक जिम्मेदारी याद दिलाई। उन्होंने जिक्र करते हुए कहा-सत्यं वद, धर्मं चर (सत्य बोलो, धर्म के मार्ग पर चलो)। इसके माध्यम से उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विधि में सफलता केवल कौशल पर ही नहीं, बल्कि चरित्र पर भी निर्भर करती है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button