ट्रंप का इशारा, भारत ने की तारीफ… रूस-अमेरिका बैठक पर क्यों थी भारत की नजर,

नई दिल्ली: अमेरिका और रूस की मीटिंग बुरी तरह से फेल हुई है तो क्या अब इसका खामियाजा भारत को उठाना पड़ेगा। क्या अमेरिका अब भारत पर लगने वाले टैरिफ को और ज्यादा बढ़ा देगा। ये सवाल इसलिए उठने लगे हैं, क्योंकि अमेरिका ने मीटिंग के पहले ही ऐसी धमकी जारी की थी। हालांकि, मीटिंग के बाद के घटनाक्रम देखकर ऐसा लगता तो नहीं है। दरअसल, ट्रंप और पुतिन की मीटिंग खत्म होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिस तरह के बयान दिए हैं, उससे ऐसा लगता तो नहीं है कि ट्रंप अब भारत पर टैरिफ और ज्यादा बढाएंगे। बल्कि, कुछ एक्सपर्ट्स यह भी दावा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में ट्रंप भारत पर लगाए गए टैरिफ कम भी कर सकते हैं।
मीटिंग के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर भारत पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए गए तो यह उनके लिए विनाशकारी होगा। इसके बाद ट्रंप ने कहा कि अगर मुझे ऐसा करना पड़ा तो मैं करुंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा नहीं करना पड़ेगा। ट्रंप के इस बयान से ही अब कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस को साधने के लिए भारत पर दबाव बनाने की उनकी रणनीति बुरी तरह से फेल हो गई है और इस बात का अहसास उन्हें भी हो गया है। ट्रंप अब तक यह मानकर चल रहे थे कि अगर भारत पर दबाव बनाया जाएगा तो वह रूस को सीजफायर के लिए मना लेगा, लेकिन उनके हालिया बयान से लग रहा है कि अब उन्होंने इस रणनीति को छोड़कर आगे बढ़ने का मन बना लिया है।
यूक्रेन युद्ध का जंग अंत देखना चाहती है दुनिया- भारत
भारत सरकार ने ट्रंप और पुतिन के बीच हुई बैठक का स्वागत किया है। भारत ने दोनों नेताओं के नेतृत्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह बेहद प्रशंसनीय कदम है। बैठक में हुई प्रगति पर संतोष जताते हुए भारत की तरफ से कहा गया कि कि आगे का रास्ता केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आगे बढ़ने का रास्ता केवल बातचीत और कूटनीति से ही खुल सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा दुनिया यूक्रेन में चल रहे युद्ध का जल्द से जल्द अंत देखना चाहती है।
किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके दोनों वैश्विक नेता!
बता दें कि ट्रंप और पुतिन के बीच बैठक का वही नतीजा निकला है, जो पहले से ही अनुमानित था। दोनों ही नेता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके। न ही इस बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सीजफायर पर बात हुई और न ही डोनाल्ड ट्रंप के हथकंडों से पुतिन जरा से भी दबाव में नजर आए। मीटिंग में पहुंचे व्लादिमीर पुतिन के आत्मविश्वास का आलम यह था कि उन्होंने साफ कह दिया कि अब अगली बैठक रूस में होगी। वैसे तो दो वैश्विक शक्तियों की इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर थी, लेकिन भारत ने बैठक पर विशेष ध्यान लगा रखा था। अलास्का में ट्रंप और पुतिन के बीच हुई लगभग तीन घंटे की बैठक के बाद दोनों नेताओं ने एक छोटी सी प्रेस कॉंफ्रेंस की।



