अंतर्राष्ट्रीय

परमाणु वार्ता से पहले ट्रंप सरकार का बड़ा कदम, ईरान पर नए प्रतिबंध; 30 लोग और कंपनियां शामिल

US-Iran Nuclear Talks: अमेरिकी और ईरान के बीच इस हफ्ते होने वाली परमाणु वार्ता से पहले ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। इसके तहत 30 लोगों और कंपनियां पर कई तरह की कार्रवाई की जाएगी।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान पर एक बार फिर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। ये प्रतिबंध करीब 30 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर लगाए गए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये लोग और कंपनियां ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, ड्रोन बनाने के काम और चोरी-छिपे तेल बेचने में मदद कर रहे हैं। अमेरिका के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने इन प्रतिबंधों की घोषणा की। इसमें कुछ ऐसे जहाज भी शामिल हैं जिन्हें ईरान की ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। ये पुराने तेल टैंकर हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों के बावजूद गुपचुप तरीके से तेल बेचने के लिए किया जाता है।

प्रतिबंध के तहत क्या हुई कार्रवाई?
इन प्रतिबंधों का मतलब यह है कि जिन लोगों और कंपनियों पर कार्रवाई हुई है, वे अमेरिका में रखी अपनी किसी भी संपत्ति या बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। साथ ही, कोई भी अमेरिकी कंपनी या नागरिक इनके साथ कारोबार नहीं कर सकेगा। हालांकि, माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर लोगों के पास अमेरिका में ज्यादा संपत्ति नहीं है, इसलिए यह कदम ज्यादा प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है।

परमाणु कार्यक्रम पर जल्द होगी बातचीत
अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते जिनेवा में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत होने वाली है। अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच ओमान की मध्यस्थता में यह वार्ता होगी। बातचीत से ठीक पहले अमेरिका का यह कदम दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि ईरान पहले 60 प्रतिशत तक यूरेनियम शुद्ध कर चुका था, जो हथियार बनाने के स्तर (90 प्रतिशत) से ज्यादा दूर नहीं है। वहीं ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह हथियार नहीं बना रहा।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखेगा, ताकि वह अपने परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को सीमित करने पर मजबूर हो जाए। अब सबकी नजर जिनेवा में होने वाली बातचीत पर है कि क्या दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो पाता है या तनाव और बढ़ेगा।

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