ज्योतिषी

गृह क्लेश से मुक्ति के लिए लौंग का यह उपाय दिलाएगा राहत

इसे आज़माइए
गृह कलह से मुक्ति के लिए लौंग डालकर देसी गाय के घृत का पंचमुखी दीपक प्रज्ज्वलित करें और सुबह और रात्रि में कपूर और गुगल से घर को सुगंधित करें। लाभ होगा, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।

ज्ञान का पिटारा

-अष्टम भाव पर मंगल या शनि, अथवा दोनों की पूर्ण दृष्टि हो तो यह स्थिति किसी गंभीर दुर्घटना से हानि की चुगली करती है। यदि इस घर में कोई ग्रह न हो और इस पर किसी भी ग्रह की दृष्टि न हो तो मनुष्य जीवन में सदगुरु का आशीर्वाद प्राप्त करके सत्कर्मों की ओर बढ़ता है और मोक्ष का वरण करता है। ऐसा प्राचीन ग्रंथ कहते हैं।

– भाग्य स्थान का स्वामी सप्तम भाव में है तो विवाह के बाद भाग्योदय होता है। शुक्र एकादश भाव में हो तो विवाह के बाद धन प्रदान करता है। सप्तम भाव का स्वामी भाग्य भाव में हो तो विवाह के बाद भाग्य चमकता है। यदि सप्तमेश लग्न में हो, या लग्नेश सप्तम भाव में आसीन हों अथवा पंचमेश सप्तम भाव में हों या सप्तमेश पंचम भाव में विराजमान हो तो पति-पत्नी का वैवाहिक जीवन ताउम्र प्रेम से सराबोर होता है।

बात पते की

यदि कुंडली के तृतीय भाव में केतु आसीन हो तो व्यक्ति को जीवन में मिश्रित परिणाम मिलते हैं। ये लोग दैहिक रूप से शक्तिशाली और दीर्घायु होते हैं। इनमें धीरज सामान्य लोगों से अधिक होता है। करियर उत्तम रहता है। निडर और साहसी होते हैं। व्यर्थ की चिंताएंऔर उलझनेंइन्हें परेशान करती हैं। राजनीतिक कार्यों में विशेष रुचि होती है। जीवन में लोकप्रिय और सफल रहते हैं। परिश्रम से आगे बढ़ते हैं। इन्हें ससुराल वालों, दोस्तों और भाइयों से विशेष फ़ायदा होता है। दान-पुण्य़ और परोपकार में इनकी अधिक रुचि होती है। मददगार प्रवृत्ति के लोगों की संगति ये पसंद करते हैं। 45 वर्ष की आयु के बाद इनके धन की हानि का योग निर्मित होता है। इन्हें विपरीत लिंगियों का पूर्ण सुख मिलता है। सुस्वादु भोजन इनकी कमजोरी होती है। अंतर्मन अनजाने डर से हैरान परेशान रहता है। इनका चित्त भ्रम और व्याकुलता से लबालब होता है। ये भूत-प्रेतों में विश्वास करते हैं। नकारात्मक केतु सामाजिक भय का कारक बनता है। भाइयों को पीड़ा पहुंचती है। मित्र कष्ट का सबब बनते हैं। बाहों में दर्द रहता है। व्यर्थ के वाद विवाद होते हैं।

सवाल- गरल योग या कालकूट योग क्या है? -सिमरन जुनेजा
जवाब- जन्मकुंडली में शनि और चंद्रमा की युति से कालकूट योग बनता है। इसे विष योग भी कहते हैं। शनि और चंद्रमा एकदूसरे से दृष्ट हो तो भी यह योग बनता है। यानी शनि और चंद्रमा की एकदूसरे पर नज़र से इस योग का निर्माण होता है। चंद्रमा अमृत तुल्य है और शनि की दृष्टि अमिय रस को गरल में रूपांतरित करती है। यह योग जीवन में अपार अपमान का कारक बनता है। व्यक्ति को बार-बार विश्वासघात का सामना करना पड़ता है। यह जीवन को अथाह उदासी और निराशा से भर देता है। जिस भाव में यह योग बनता है, उस भाव के सुख पर नकारात्मक असर डालता है। जिस घर पर इस योग की दृष्टि पड़ती है, उस भाव के गुणों और सुख का बंटाधार हो जाता है। लेकिन शनि और चंद्रमा में अगर 12 डिग्री का अंतर हो तो यह योग निर्मित नहीं होता।

सवाल- पराक्रम भाव कौन सा है? इस भाव से क्या आकलन किया जाता है। -सोहन शास्त्री
जवाब- जन्म कुंडली का तृतीय भाव पराक्रम भाव कहलाता है। इस भाव से व्यक्ति का प्रभाव, रुतबा, क्षमता, बल और धैर्य का पता लगाया जाता है। इसी भाव से छोटे भाई-बहनों का विचार किया जाता है। श्रवण यानि सुनने की क्षमता, हाथ, कंधे, फेफड़े और गले की स्थिति का संकेत यही भाव देता है। जीवन में समर्थकों, अनुयायियों और सेवकों का बोध इसीसे होता है।

सवाल- कर्क राशि का बृहस्पति शुभ है या अशुभ ? -विद्योतमा मिश्र
जवाब- सदगुरुश्री कहते हैं कि जन्म कुंडली में यदि कर्क राशि में वृहस्पति आसीन हो तो व्यक्ति शुभ कर्मों की ओर आकृष्ट होकर अगले जन्म में उत्तम कुल में जन्म लेता है। यदि लग्न में उच्च का चंद्रमा हो और वो किसी पापी ग्रह से दृष्ट न हो तो व्यक्ति ज़िन्दगी को बहुत अच्छी तरह जीता है और जीवन का समापन बहुत शांति और हर्ष के साथ होता है। ऐसा पवित्र ग्रंथों में वर्णित है।

सवाल- क्या ज्योतिष में अच्छी हैंड राइटिंग का भी कोई योग होता है? – -कनिका साहनी
जवाब- हां! सदगुरुश्री कहते हैं कि बुध जब तृतीय भाव में आसीन होते हैं तो हैंड राइटिंग को आकर्षक बनाते हैं।

Show More

Daily Live Chhattisgarh

Daily Live CG यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, बिजनेस, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button