संपादकीय

फिर कांपी धरती…

शुक्रवार को म्यांमार केंद्रित 7.7 तीव्रता वाले भूकंप ने यहां और थाईलैंड में भारी तबाही मचाई। भूकंप का असर करीब चार मिनट तक रहा। अमेरिकन जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार बारह मिनट के अंतराल के बाद भूकंप का दूसरा झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 6.4 थी। भूकंप का केंद्र म्यांमार के सागाइंग से 18 किमी दक्षिण में था। भूकंप से म्यांमार में भारी तबाही दिखी और पुल व बिल्डिंगें ताश के पत्तों की तरह बिखरती दिखी। म्यांमार में तबाही इतनी ज्यादा बतायी जा रही है कि सैन्य प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय मदद की गुहार लगायी है। इतना ही नहीं भूकंप के झटकों से म्यांमार से करीब एक हजार किमी दूर स्थित थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में कई भवनों के ध्वस्त होने व सड़कें फटने की खबरें हैं। बैंकॉक में एक तीस मंजिला बिल्डिंग धराशायी हो गई। आशंका है कि इसमें अभी 43 मजदूर फंसे हुए हैं। भूकंप के झटकों से सहमे लोग मदद की गुहार लगाते रहे। घायल लोगों से अस्पताल भरे नजर आए। दीवारें फटने, इमारतों के गिरने से लोग दहशत में दिखे। शुरुआत आंकड़ों के अनुसार म्यांमार में 144 लोगों के मरने व सैकड़ों लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। लेकिन अमेरिकन जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार मरने वालों का आंकड़ा हजारों तक पहुंच सकता है। भूकंप के केंद्र के निकट स्थित यंगून ही नहीं म्यांमार के अनेक शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। यहां छह प्रांतों में आपात स्थिति घोषित हुई है। इसके अलावा चीन के कुछ हिस्सों व थाइलैंड में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक तीस मंजिला इमारत के धराशायी होने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई जगहों में इमारतों के रूफटॉप पर बने स्वीमिंग पूल का पानी सड़कों पर बहता नजर आया। भयभीत लोगों के चीखने से मंजर भयावह नजर आ रहा था। लोग मदद की गुहार लगा रहे थे।

दरअसल, थाईलैंड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील नहीं है, लेकिन म्यांमार में आने वाले भूकंप के झटकों का असर यहां दिखता है। भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील न होने के कारण थाईलैंड में भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का उपयोग नहीं होता।जिसकी वजह से ज्यादा नुकसान की आशंका जतायी जा रही है। अस्पतालों में उपचार कराने वालों की लंबी कतारें देखी गई हैं। वहीं 2021 से सैन्य शासन के अधीन और गृहयुद्ध से जूझता म्यांमार इस प्राकृतिक आपदा के बाद हताश नजर आया। इंटरनेट का प्रयोग सीमित होने से वहां की स्थिति जानने में दिक्कत आ रही है। पहली बार सैन्य शासन ने अंतर्राष्ट्रीय मदद की अपील की है। प्रधानमंत्री ने भूकंप पीड़ितों की मदद के लिये अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई को कहा है। म्यांमार के दूसरे बड़े शहर मांडले से भी ऐतिहासिक रॉयल पैलेस व अन्य बिल्डिंगें गिरती नजर आई हैं। मांडले को राजधानी से जोड़ने वाली सड़कों में चौड़ी दरारें देखी गई हैं। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे समेत जर्मनी व चीन की भूकंप पर नजर रखने वाली संस्थाएं भारी जन-धन के नुकसान की आशंका जता रही हैं। अमेरिकी वैज्ञानिक भूकंप का केंद्र धरती से दस किलोमीटर नीचे होना बता रहे हैं। खबरें हैं कि म्यांमार की राजधानी नेपिडो में भी काफी क्षति हुई है। लोग भूकंप के ऑफ्टर शॉक के भय से खुले में रात बिताने को मजबूर हैं। वहीं म्यांमार व थाईलैंड के अलावा इस भूकंप के झटके दक्षिण पश्चिम चीन के यून्नान प्रांत में महसूस किए गए। हालांकि, थाईलैंड में बड़े भूकंपों का इतिहास नहीं रहा है, लेकिन म्यांमार के भूकंप फॉल्ट लाइन पर होने के कारण भूकंप पहले भी आते रहे हैं। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार वर्ष 1930 और 1956 के बीच देश के मध्य से गुजरने वाले सागैंग फॉल्ट के पास रिक्टर स्केल पर सात तीव्रता के छह भूकंप आ चुके हैं। निस्संदेह, पड़ोसी देश म्यांमार में आया भीषण भूकंप भारत के लिये भी चेतावनी है। देश में भूकंपरोधी निर्माण अनिवार्य करने और आपदा-राहत तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है। सरकारी प्रयासों के अलावा लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है।

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