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जंगल के ऊपर से जमीन के अंदर तक नजर रखने वाला दुनिया का पहला सैटेलाइट जुलाई में लॉन्च होगा, जानें क्या है ISRO की प्लानिंग

नई दिल्ली : दुनिया का पहला ड्यूअल रडार अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ‘ निसार’ 16 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। इसे नासा और इसरो ने मिलकर बनाया है। यह दुनिया का पहला और सबसे महंगा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। यह जंगलों के ऊपर से भी अंदर तक देखने में सक्षम है। यह दो फ्रीक्वेंसी के ड्यूल बैंड रडार से धरती के ऊपर से लेकर नीचे तक की हर हलचल को देख सकेगा। करीब 13 हजार करोड़ रुपये की लागत वाला यह सैटेलाइट मिशन धरती पर हो रहे हर छोटे-बड़े बदलाव पर नजर रखेगा, चाहे वह जमीन में हलचल हो, जंगल की कटाई हो, ग्लेशियर का पिघलना हो या फसलों की हालत।

धरती की निगरानी करने वाला दुनिया का पहला सैटेलाइट

इसरो के पूर्व वैज्ञानिक और इसी मिशन पर काम कर चुके वैज्ञानिक राधा कृष्णन ने बताया कि निसार यूरोपीय एजेंसी के सैटेलाइट से इस मायने में अलग है कि यह जंगलों के ऊपर से नीचे तक आसानी से देख सकता है। पेड़ों की घनी छांव हो या बर्फ की मोटी परत, यह उसके नीचे हो रहे बदलाव भी सटीकता से पकड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के चंद्रयान में भी दो L-बैंड और S-बैंड के ड्यूल रडार हैं लेकिन यह धरती की निगरानी नहीं करता बल्कि चांद का डाटा एकत्र कर रहा है। निसार धरती की निगरानी करने वाला यह दुनिया का पहला सैटेलाइट है जिसमें दो अलग अलग बैंड के रडार हैं। यही वजह है कि यह घने जंगल के नीचे भी आसानी से रडार के जरिए डाटा एकत्र करेगा।

किन कामों में मदद करेगा

  • जंगलों की बायोमास (वन संपदा) की निगरानी: पेड़ों की घनी हरियाली के नीचे तक देख सकेगा, जंगल कितने बचे हैं या कितनी कटाई हो रही है, इसका सही आंकलन करेगा।
  • ग्लेशियर की हलचल पर नजर: बर्फ पिघल रही है या ग्लेशियर खिसक रहे हैं, इसकी लगातार निगरानी करेगा।
  • टेक्टोनिक स्टडी: जमीन की प्लेटों में हो रही हलचल, दरार या धीरे-धीरे हो रहे बदलावों का पता लगाएगा — भूस्खलन से पहले चेतावनी देने में मददगार।
  • खेती-किसानी में मदद: फसल की हालत, मिट्टी की नमी, जमीन के नीचे मौजूद पानी (ग्राउंड वाटर) की स्थिति जैसी जानकारी देगा।
  • भू-वैज्ञानिक अध्ययन (Geosciences): पहाड़ों, मैदानों, नदियों और धरती की सतह में हो रहे लंबे समय के बदलावों का अध्ययन करेगा।
  • वाटर साइंस: नदियों का बहाव, बाढ़, मिट्टी में नमी, पानी की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी जुटाएगा।
  • प्राकृतिक आपदाओं में मदद: बाढ़, आग, भूकंप या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी आपदाओं के दौरान धुआं, बादल या राख में भी साफ तस्वीरें और डेटा देगा।

दुनिया में सबसे अलग क्यों है निसार?

  • ड्यूल रडार से लैस दुनिया का पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट
  • इसमें L-बैंड और S-बैंड, दोनों तरह के रडार मौजूद हैं
  • अभी तक यूरोपियन स्पेस एजेंसी का सेंटिनल सैटेलाइट सिर्फ सिंगल रडार पर काम करता है
  • हर 12 दिन में पूरी धरती का चक्कर लगाकर अपडेट देगा

सार तकनीक पर आधारित सैटेलाइट

सार सैटेलाइट दिन और रात दोनों समय धरती की सतह की तस्वीरें ले सकते हैं। ये कैमरे से सीधी तस्वीरें लेने की बजाय रडार सिग्नल का इस्तेमाल कर बादल, धुआं और राख के आर-पार जाकर साफ तस्वीरें देते हैं। यही वजह है कि बाढ़, जंगल में आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी आपदाओं के समय ये सैटेलाइट बेहद कारगर होते हैं। रडार सिग्नल घने जंगलों और पेड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं।

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