संपादकीय

जंग जारी रहेगी

राष्ट्रपति टं्रप ने अमरीका को संबोधित करते हुए यह निष्कर्ष दिया है कि अभी ईरान के खिलाफ जंग जारी रहेगी। आगामी 2-3 हफ्ते में ईरान पर भीषण हमला किया जाएगा। हम जल्द ही अपने लक्ष्य हासिल कर लेंगे। जो जीत हम हासिल कर रहे हैं, दुनिया ने ऐसी जीत कभी नहीं देखी होगी! राष्ट्रपति टं्रप ने फिर पुराना मुहावरा दोहराया कि हमने ईरान की वायुसेना, नौसेना, मिसाइल-ड्रोन क्षमताएं नष्ट कर दी हैं। यहां तक कि उसके परमाणु ठिकाने भी तबाह कर दिए हैं। अब ईरान परमाणु बम नहीं बना सकता। ईरान के सभी बड़े नेता मार दिए गए हैं। यदि ईरान परमाणु बम बना लेता, तो वह अमरीका-इजरायल के लिए मौत साबित होता! दरअसल जो गलतियां पुराने राष्ट्रपतियों ने की थीं, मैं उन्हें ठीक कर रहा हूं। इस संदर्भ में राष्ट्रपति टं्रप ने खुलासा किया कि द्वितीय विश्व युद्ध 3 साल 8 माह से अधिक और वियतनाम युद्ध 19 साल से अधिक लड़े गए थे। ईरान युद्ध को अभी 32-33 दिन ही बीते हैं और हमने लगभग लक्ष्य पूरे कर लिए हैं। राष्ट्रपति टं्रप ने यह भी दोहराया कि अमरीका युद्ध खत्म करने के बेहद करीब है। हमारी अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है। गैस उत्पादन में अमरीका ‘नंबर वन’ है। हमें तेल के लिए होर्मुज स्टे्रट की जरूरत नहीं है। जिन्हें तेल-गैस की किल्लत है, जरूरत है, वे खुद होर्मुज जाएं। अलबत्ता हमसे तेल खरीदें, क्योंकि अमरीका के पास बहुत कच्चा तेल है।

बहरहाल राष्ट्रपति टं्रप ने अपने राष्ट्रीय संबोधन का सारांश यह दिया है कि ईरान के खिलाफ जंग जारी रहेगी। गौरतलब यह है कि अमरीका ईरान युद्ध पर अभी तक करीब 3.50 लाख करोड़ रुपए खर्च कर चुका है और उसने 200 अरब डॉलर (करीब 19 लाख करोड़ रुपए) का अतिरिक्त बजट मांगा है, लेकिन अमरीकी कांग्रेस फिलहाल उसे पारित करने के मूड में नहीं है। अमरीका का युद्ध पर हररोज का औसतन खर्च 9400 करोड़ रुपए का है। अमरीका में पेट्रोल के दाम 4.06 डॉलर प्रति गैलन के स्तर को छू चुके हैं। इस पर ही हाहाकार मचा है, क्योंकि यह बढ़ोतरी अभूतपूर्व है। ईरान में महंगाई दर 50.6 फीसदी है। यह अकल्पनीय है। अनाज की कीमतें 140 फीसदी और डेयरी उत्पादों की कीमतें 117 फीसदी बढ़ गई हैं। एक किलो चावल के दाम 20 लाख रियाल और दाल की कीमत 35 लाख रियाल है। रोजमर्रा की सभी वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। वस्तुओं की उपलब्धता ही सवालिया है। क्या राष्ट्रपति टं्रप का कोई वैश्विक सरोकार नहीं है? इजरायल की अर्थव्यवस्था का तो कचूमर निकल चुका है। वह तो 1.20 करोड़ की आबादी का छोटा-सा देश है। इजरायल को हर हफ्ते 1.6 अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ अब जनता सडक़ों पर उतर आई है। यदि भारत का उल्लेख करें, तो करीब 55 लाख भारतीयों को खाड़ी देश छोड़ कर भारत लौटना पड़ा है। दुबई की अति सुरक्षित वाली छवि भी खंडित हुई है। खाड़ी देशों से आधे से अधिक भारतीय लौट आए हैं। इससे नया आर्थिक संकट सामने होगा। कुवैत से 20 भारतीयों के शव केरलम के कोच्चि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लाए गए हैं। वे युद्ध और हादसों के शिकार हुए हैं। यह खुलासा विदेश मंत्रालय के सचिव (गल्फ) ने किया है। क्या स्वदेश लौटे भारतीय बेरोजगार हो गए हैं अथवा औने-पौने मेहनताने पर वे भारत में ही काम करने को विवश होंगे? यदि रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत की चर्चा करें, तो मई, 2026 तक भारत सरकार और तेल कंपनियों को कुल 40,484 करोड़ रुपए का घाटा होगा। तेल, एलएनजी, पीएनजी, खाद आदि के घाटे अलग हैं। होर्मुज पर अब भी हमारे 18 जहाज फंसे हैं। यदि ईरान के साथ भारत का व्यापार-सौदा नए सिरे से हो चुका है और ईरान ने 6 लाख बैरल कच्चे तेल का जहाज भारत की ओर रवाना किया है, तो भारत के अपने जहाजों को भी अनुमति दी जानी चाहिए। बहरहाल राष्ट्रपति टं्रप का संबोधन अद्र्धसत्यों और झूठे, फर्जी दावों से भरा था। जिन मुद्दों के आधार पर अमरीका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, वे स्थितियां आज भी मौजूद हैं। परमाणु कार्यक्रम अब भी जिंदा और सक्रिय है, हुकूमत आज भी खामेनेई वाली इस्लामी है, होर्मुज पर ईरान का कब्जा है, तो फिर हमला क्यों किया गया था? डोनाल्ड ट्रंप की कौनसी बात पर विश्वास किया जाए, कौनसी सच्ची है, वह कभी बोलते हैं कि युद्ध खत्म होने वाला है, कभी बोलते हैं कि युद्ध जारी रहेगा। वह पूरी दुनिया को यह जतलाने की कोशिश कर रहे हैं कि युद्ध में उनकी जीत हुई है। इधर ईरान ने कहा है कि वह छह माह तक युद्ध जारी रखने की क्षमता रखता है। ईरान के समर्थन में कई विद्रोही गुटों ने भी अमरीका पर हमले करने शुरू कर दिए हैं।

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