उत्तर प्रदेश में BJP से राजपूतों की नाराजगी का सच, पार्टी को कितना नुकसान होने की आशंका
पिछले हफ्ते गुजरात ही नहीं उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में अचानक भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ राजपूतों के कुछ संगठनों ने मोर्चा संभाल लिया. यह बड़ा ही अचंभित करने वाला था. क्योंकि उत्तर प्रदेश में इस समय ठाकुर बीजेपी के कट्टर समर्थक हैं. पूर्वी यूपी के राजनीतिक गलियारों में यहां तक कहा जाता है कि गैर-बीजेपी दल का ठाकुर नेता केवल शरीर से ही उस पार्टी में है, आत्मा उसकी बीजेपी में होती है. जाहिर है कि जब ऐसी बातें हो रही हों तो, ठाकुरों की बीजेपी से असंतोष की बात पर कौन यकीन करेगा? पर ये गॉसिप नहीं है, हकीकत है. पर सवाल यह है कि यह असंतोष किस लेवल का है और इसके क्या परिणाम हो सकते हैं.
सहारनपुर से दिल्ली की ओर जाने वाले हाइवे पर 7 अप्रैल को एक अलग फिजा थी. ननौता गांव पश्चिमी यूपी के ठाकुर समाज के लोगों के जुटान का गवाह बना था. क्षत्रिय समाज संघर्ष समिति की ओर से यहां आयोजित क्षत्रिय स्वाभिमान महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए पश्चिमी यूपी ही नहीं राजस्थान और हरियाणा से भी लोग आए थे. फिलहाल इस जुटान का सबसे बड़ा इफेक्ट यह हुआ कि नेशनल मीडिया में यह बात आ गई कि बीजेपी से राजपूत नाराज हैं. इससे पहले कि ये मामला बड़े बीजेपी की आतंरिक मशीनरी राजपूतों को मनाने में जुट गई है. बताया जा रहा है कि 11 अप्रैल को मेरठ में सिसौली में,13 अप्रैल को गाजियाबाद के धौलाना और 16 अप्रैल के सरधना के खेड़ा में क्षत्रिय स्वाभिमान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा. इस तरह से यूपी के पहले चरण और दूसरे चरण की सीटों पर बीजेपी का काम खराब करने की तैयारी है.
ऐन चुनाव के एक हफ्ते पहले इस तरह का जुटान होना संदेह तो पैदा कर ही रहा है. केवल टिकट कम मिलने का बहाना लेकर इतना बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा किया जा सकता था. जाहिर है कि पार्टी के ही कुछ लोग इसके पीछे हैं. मेरठ के वरिष्ट पत्रकार प्रेमदेव शर्मा कहते हैं कि राजपूत संगठनों में कई गुट हैं. बीजेपी को लेकर सामने आया असंतोष पूरी तरह गुटबाजी का नतीजा है.
कहा जा रहा है कि मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान पश्चिमी यूपी में भाजपा के फायरब्रांड चेहरे रहे सुरेश राणा, संगीत सोम और चंद्रमोहन को हाशिए पर भेजे जाने से ठाकुर समाज में नाराजगी है. सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ में पकड़ रखने वाले सुरेश राणा को भाजपा ने बरेली मंडल की जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं चंद्रमोहन बागपत जिले के प्रभारी हैं, जो सीट भाजपा के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के खाते में गई है. पश्चिमी यूपी में जो ठाकुर चौबीसी भाजपा की जीत की कहानी लिखती थी, उसी ठाकुर चौबीसी ने भाजपा के बहिष्कार का एलान कर दिया है. इन बगावती तेवरों ने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से प्रत्याशी संजीव बालियान की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ा दी हैं.
31 मार्च को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से दो दिन पूर्व खतौली विधानसभा के ठाकुर बाहुल्य ग्राम मढ़करीमपुर में संजीव बालियान अपने जनसंपर्क में गए थे. जहां उनके काफिले पर हमला हुआ. इसमें कई गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं. बालियान ने आरोप लगाया कि उनपर हमला संगीत सोम के इशारे पर हुआ है. संगीत सोम के भाई एक दिन पहले इस गांव में गए थे जिस पर संगीत ने स्पष्ट किया कि उनके भाई उस गांव में काफी दिन से नहीं गए है. मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद मुख्य मंच के पीछे बने सेफ हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया और सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम व केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान के साथ एक बैठक भी की.


