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वो सवाल जो हर देशवासियों के मन में है… पीएम मोदी ने भी शुभांशु से पूछे, जानें क्या मिला जवाब

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में मौजूद शुभांशु शुक्ला से शनिवार को बात की और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से बधाई दी। उन्होंने कहा कि आप मातृभूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतीय दिलों के सबसे करीब हैं। शुभांशु ने भी प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि उनके नेतृत्व ने उनके सपनों को पूरा करने के लिए कई अवसर दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपके नाम में भी शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभारंभ भी है।

पीएम मोदी-सबसे पहले बताइए कि वहां सब कुछ कुशल मंगल है? आपकी तबीयत ठीक है?

शुभांशु शुक्ला- जी प्रधानमंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद, आपकी और 140 करोड़ देशवासियों की शुभकानाओं के लिए धन्यवाद। आप सबके आशीर्वाद और प्यार की वजह से मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं, सुरक्षित हूं। बहुत अच्छा लग रहा है। बहुत नया एक्सपेरियंस है ये। ये जो मेरी यात्रा है पृथ्वी से आर्बिट तक की 400 किमी की यात्रा, वो सिर्फ मेरी यात्रा नहीं है। कहीं न कहीं ये मेरे देश की भी यात्रा है,क्योंकि जब मैं छोटा था, मैं कभी सोच नहीं पाया कि मैं अंतरिक्ष यात्री बन सकता हूं। लेकिन मुझे लगता है कि आपके नेतृत्व में आज का भारत ये मौका देता है, और उन सपनों को साकार करने का भी मौका देता है। मेरे लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। मेरे लिए और मैं बहुत गर्व महसूस कर रहा हूं कि मैं यहां पर अपने देश का प्रतिनिधित्व कर पा रहा हूं।

पीएम मोदी- शुभांशु, आप दूर अंतरिक्ष में हैं जहां ग्रैविटी ना के बराबर है। हर भारतीय देख रहा है कि आप कितने डाउन टू अर्थ हैं। आप जो गाजर का हलवा ले गए हैं,क्या आपने उसे अपने साथियों को खिलाया?

शुभांशु-मैं गाजर का हलवा,मूंग दाल का हलवा और आमरस मैं लेकर आया था। सभी साथियों ने इसका स्वाद लिया और सभी को बहुत पसंद आया।

पीएम मोदी-परिक्रमा करना भारत की सदियों पुरानी परंपरा है, आपको तो पृथ्वी माता की परिक्रमा का सौभाग्य मिला है, अभी आप पृथ्वी के किस भाग के ऊपर से गुजर रहे होंगे?

शुभांशु- थोड़ी देर पहले मैं विंडो से बाहर देख रहा था तो हम हवाई के ऊपर से गुजर रहे थे। हम दिन में 16 बार परिक्रमा करते हैं, हम 16 सनराइज और सनसैट देखते हैं। बहुत ही अचंभित कर देने वाला यह प्रोसेस है। इस परिक्रमा में हम करीब 28 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे हैं, आपसे बात कर रहे हैं, ये गति हमें पता नहीं चलती है क्योंकि हम अंदर हैं। लेकिन कहीं न कहीं ये गति जरूर हमें दिखाती है कि हमारा देश कितनी गति से आगे बढ़ रहा है। हम यहां पहुंचे हैं और हमें यहां से और आगे जाना है।

पीएम मोदी-अंतरक्षित की विशालता देखकर सबसे पहला विचार क्या आया?

शुभांशु-पहली बार हम जब आर्बिट में पहुंच तो पहला जो दृश्य था वो पृथ्वी का था। जब पहली बार हम लोग ऑर्बिट में पहुंचे तो पहला व्यू पृथ्वी का था। इस दौरान पहला ख्याल मन में ये आया कि पृथ्वी पूरी एक दिखती है। कोई बॉर्डर नहीं दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि दूसरी चीज जो गौर की वो ये थी कि जब अंतरिक्ष से भारत को देखा तो पता लगा कि जो हम मैप में को अपने देश को देखते हैं, वो उतना नहीं है। लेकिन भारत सच में बहुत भव्य और बड़ा दिखता है। जितना हम मैप पर देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा। हमें यहां से महसूस होता है कि कोई बॉर्डर नहीं है, कोई देश नहीं है। हम सब इंसानियत का हिस्सा हैं, पृथ्वी हमारा घर है और हम सभी उसके हिस्सा हैं।

पीएम मोदी-शुभांशु आप स्पेस स्टेशन पर जाने वाले आप पहले भारतीय हैं, आपने जबरदस्त मेहनत की है, लंबी ट्रेनिंग करके गए हैं, अब आप रियल सिचुएशन में हैं, सच में अंतरिक्ष में हैं, वहां कि परिस्थितियां कितनी अलग हैं, कैसे एडॉप्ट कर रहे हैं?

शुभांशु-‘यहां तो सबकुछ अलग है। पिछले एक साल तक मैंने ट्रेनिंग की। मुझे सारे सिस्टम्स और प्रोसेस के बारे में पता था। एक्सपेरिमेंट्स के बारे में मुझे पता था। लेकिन यहां आते ही अचानक सबकुछ बदल गया। हमारे शरीर को ग्रेविटी में रहने की इतनी आदत हो जाती है कि सभी चीजें उसी से डिसाइड होती हैं। लेकिन यहां माइक्रो गेविटी है, इसलिए छोटी छोटी चीजें भी मुश्किल हो जाती हैं। मैं अभी जब आपसे बात रहा हूं तो अपने पैरों को बांध रखा है, वरना मैं ऊपर चला जाऊंगा। मैंने जो माइक पकड़ रखा है, इसे छोड़ दूं तो यह तैरता रहता है। पानी पीना, चलना, सोना सबकुछ बहुत मुश्किल है. पता सब होता है, ट्रेनिंग अच्छी है। लेकिन वातावरण बदलता है तो एडजस्ट करने में एक-दो दिन लगते हैं।’

पीएम मोदी-भारत की ताकत साइंस और स्पिरिचुअलिटी दोनों है, आप अंतरिक्ष यात्रा पर हैं, लेकिन अंदर भारत की यात्रा चल रही होगी, भीतर में भारत चल रहा होगा,क्या उस माहौल में मेडिटेशन और माइंडफुलनेस का लाभ भी मिलता है क्या?

शुभांशु-आपसे बात करते वक्त मैंने अपने पैर बांध रखे हैं क्योंकि यहां जीरो ग्रेविटी है, ऐसा नहीं करूंगा तो उड़ने लगूंगा। यहां सोना बहुत बड़ी चुनौती है। यहां माइंडफुलनेस का भी बहुत असर पड़ता है क्योंकि लॉन्च के दौरान की स्थिति बहुत अलग होती है, लेकिन जब दिमाग को शांत रखते हैं तो बेहतर निर्णय ले सकते हैं। ऐसे चैलेंजिंग समय में ये सब बहुत फायदेमंद होता है। ये यात्रा अद्भुत रही, यहां पहुंचने के बाद मुझे लगता है कि ये मेरे देश के लिए बड़ा अचीवमेंट है, मैं देश के बच्चों से कहूंगा कि आप अपना भविष्य बेहतर बनाइए. क्योंकि इससे न सिर्फ बच्चों का बल्कि देश का भविष्य भी उज्जवल होगा। हमेशा एक बात मन में रखें कि ‘स्काई इज नेवर द लिमिटि’। मेरे पीछे जो आप तिरंगा देख रहे हैं ये पहले नहीं था, मैंने कल ही इसे यहां लगाया है, ये मुझे बहुत भावुक करता है।

पीएम मोदी-पीएम मोदी-आप अंतरिक्ष में कई प्रयोग कर रहे हैं, क्या कोई ऐसा एक्सपेरिमेंट है, जो आने वाले समय में एग्रीकल्चर या हेल्थ सेक्टर को फायदा पहुंचाएगा?

शुभांशु-पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों ने 7 यूनिक एक्सपेरिमेंट डिजाइन किए हैं, जिन्हें मैं अपने साथ स्पेस स्टेशन पर लेकर आया हूं, मैं जो पहला एक्सपेरिमेंट करने वाला हूं वो स्टेम सेल्स पर ऊपर बेस्ड है। दरअसल, अंतरिक्ष में आने पर ग्रैविट खत्म हो जाती है तो मसल लॉस होता है, मैं इस पर एक्सपेरिमेंट कर रहा हूं कि क्यो कोई सप्लीमेंट देकर हम इस मसल लॉस को रोक सकते हैं या डिले कर सकते हैं, इसका डायरेक्ट इंप्लीकेशन धरती पर भी है, जिन लोगों का बुढ़ापे में मसल लॉस होता है, उन पर ये सप्लीमेंट यूज किए जा सकते हैं।

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