जरा हट के

200 सालों से बेडरुम में दफन था राज, ऊपर आराम से सोता था कपल, नीचे होता था ऐसा काम!

मैनहैटन का एक पुराना घर इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. जहां लोग बेडरूम में आराम से सोते थे, वहीं नीचे एक छिपा हुआ तहखाना था, जहां गुलामों को छिपाकर उनकी जान बचाई जाती थी.

ये खौफनाक नहीं बल्कि बहादुरी का राज है जो अंडरग्राउंड रेलरोड से जुड़ा था. मर्चेंट्स हाउस म्यूजियम, जो ईस्ट फोर्थ स्ट्रीट पर स्थित है, अब इतिहास की नई परत खोल रहा है. ये चार मंजिला ईंटों का घर 1832 में जोसेफ ने बनवाया था, जो एक ज्ञात एबोलिशनिस्ट (गुलामी विरोधी) थे. बाहर से ये घर आसपास के 19वीं सदी के भवनों में घुला-मिला लगता है– डार्क शटर्स और पुरानी दीवारें नजर आती थी. लेकिन दूसरी मंजिल के बेडरूम में वेस्ट वॉल पर बिल्ट-इन ड्रेसर है.

बेहतरीन तरीके से छिपा था राज
क्यूरेटर कैमिल जर्कोविच ने बताया, “हम जानते थे कि कुछ है, लेकिन समझ नहीं पा रहे थे कि क्या?” हाल ही में संरक्षण विशेषज्ञों ने भारी बॉटम ड्रॉअर हटाया. नीचे फर्शबोर्ड्स में एक रफ कट 2×2 फुट का आयताकार छेद मिला. ये शाफ्ट सीढ़ी से ग्राउंड फ्लोर तक जाता है. ये जगह इतनी टाइट है कि मुश्किल से एक-दो लोग छिप सकते थे. विशेषज्ञों का कहना है कि ये डिजाइन जानबूझकर बनाई गई थी, स्लेव हंटर्स और सिटी मार्शल्स से बचने के लिए. उस समय भागे गुलामों की मदद करना कानूनी जोखिम भरा था, इसलिए सब कुछ ‘कम्पलीटली इनविजिबल’ रखा गया था. आर्किटेक्चरल हिस्टोरियन पैट्रिक सिकोन ने कहा, “सफेद अमीर न्यू यॉर्कर्स में एबोलिशनिस्ट होना बहुत दुर्लभ था.”

बने थे कई बिल्डिंग्स
1820-1840 के बीच एबोलिशनिस्ट मूवमेंट में गहरी भागीदारी की. उन्होंने इंटीग्रेटेड चर्चों के ब्लूप्रिंट्स भी डिजाइन किए, जिनमें ऐसे ही छिपने की जगहें थीं. पुरानी फोटोज और डॉक्यूमेंट्स से साबित हुआ कि ये शाफ्ट गुलामों को छिपाने के लिए ही था. कैंडल वैक्स के निशान भी मिले, जो बताते हैं कि यहां लोग छिपकर इंतजार करते थे. ये खोज मैनहैटन में 100 साल बाद पहली कन्फर्म्ड अंडरग्राउंड रेलरोड एंट्री है. अंडरग्राउंड रेलरोड कोई असली रेल नहीं, बल्कि गुप्त नेटवर्क था – जहां एबोलिशनिस्ट्स ने दक्षिण से भागे गुलामों को उत्तर की ओर, खासकर कनाडा तक सुरक्षित पहुंचाया जाता था. हजारों लोगों ने इस रास्ते आजादी पाई थी. न्यू यॉर्क सिटी में इसका रोल अक्सर नजरअंदाज किया जाता था, क्योंकि शहर में गुलामी कानूनी थी, लेकिन कई लोग चुपके से मदद करते थे. मर्चेंट्स हाउस 1965 में मैनहैटन का पहला लैंडमार्क बना. पहले ये ट्रेडवेल फैमिली का घर था, जो 1936 से म्यूजियम है. यहां 19वीं सदी की जिंदगी बरकरार है – फर्नीचर, कपड़े सब ओरिजिनल. लेकिन अब ये डिस्कवरी म्यूजियम की कहानी में शामिल होगी.

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