संपादकीय

मिट्टी में मिलाया आतंक

वाह, देश के जांबाज सैनिको! क्या निशाना था, क्या लक्ष्य चिह्नित किए गए और मात्र 25 मिनट के ऑपरेशन में ही उन अड्डों, मुख्यालयों, मस्जिदों और मदरसों को मिट्टी और मलबा कर दिया गया, जहां आतंकी पनाह लेते थे। वे पाप, हिंसा और गुनाह के ‘हरम’ थे। पहलगाम नरसंहार में यहीं के आतंकियों ने हमारी बहू-बेटियों के ‘सिंदूर’ मिटा दिए थे। एक ही प्रतिघात में 35 साल पुराने प्रतिशोध भी ले लिए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया था। उनका यह कथन भी सार्थक साबित हुआ कि आतंकियों की बची-खुची जमीन को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। हमारी सेनाओं ने 6-7 मई की दरमियानी रात में 1.05 बजे से 1.30 बजे के मात्र 25 मिनट के समय में आतंकियों के 9 अड्डे मिट्टी में मिला दिए और 100 से अधिक आतंकियों को ढेर कर दिया। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मुहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठनों के मुख्यालयों को भी नेस्तनाबूद कर दिया। जैश के सरगना मसूद अजहर की टिप्पणी ही हमारे हमलों की आक्रामकता की पुष्टि करती है-काश! मैं भी मर जाता, तो अच्छा होता।’ ऑपरेशन में उसकी पत्नी, बेटे, बहन-बहनोई, भांजा-भांजी, भांजे की बीवी, भतीजा आदि खानदान के 10 लोगों को भी ‘मिट्टी’ होना पड़ा। सरगना के करीबी 4 लोग भी मारे गए। पहलगाम में आतंकियों ने भारत की बेटियों को कहा था-तुम्हें नहीं मारेंगे। जाओ और मोदी को बता दो।’ मोदी को तो खुद एहसास था कि ‘सिंदूर’ मिटाया गया है, लिहाजा उनके आदेश पर सेनाओं ने साझा ऑपरेशन तय कर, सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर, रात के अंधेरे में 24 मिसाइलें दाग कर आतंकियों के बिल बिखेर दिए, लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत और फौज को भनक तक नहीं लगी। पाकिस्तान का ‘डिफेंस सिस्टम’ सोया ही रहा। यह फौज किस आधार पर परमाणु हथियार के इस्तेमाल के दंभ भरती रही है? वाह सैनिको! तुम्हें देश का सलाम, नमन और साधुवाद! देश के लिए यह गौरव और गर्व का दिन है। हालांकि 21 आतंकी ठिकाने चिह्नित किए गए थे। अर्थात 12 आतंकी बिल अभी शेष हैं।

हम अफसोस कर रहे हैं कि हाफिज सईद, मसूद अजहर, सलाहुद्दीन सरीखे आतंकी सरगनाओं को जिंदा क्यों छोड़ा गया? शायद अब वे देखेंगे कि अपनों की मौत कितनी भयावह और पीड़ादायक होती है! बहरहाल अभी तो भारत की सेनाओं ने आतंकवाद का प्रथम चरण ही ‘मिट्टी’ किया है। आरंभ है प्रचंड, पाकिस्तान होगा खंड-खंड! आतंक के बिलों में अब भी ‘सपोले’ जिंदा हैं। उन्हें भी कुचलना है। अभी तो पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, उसका संभावित पलटवार, शेष है। पाकिस्तान ने कबूल किया है कि उसके 31 लोग मारे गए हैं, जबकि कई घायल हुए हैं। उसके पंजाब में आपातकाल घोषित किया गया है। हमने सिर्फ उन्हें मारा है, जिन्होंने हमारी बहू-बेटियों का ‘सिंदूर’ पोंछ दिया था। उन्हें ‘सिंदूर’ की कीमत और उसका महत्व क्या पता! बहरहाल भारतीय ऑपरेशन में किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान, दफ्तर और रिहायशी इलाके या इमारत को खंडित नहीं किया गया है। यह आतंकियों पर ही लक्षित आक्रमण था। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने सभी बड़े देशों को ब्रीफ किया है कि हमला आतंकी अड्डों और हत्यारों पर किया गया। चीन और तुर्किये के बयान पाकपरस्त रहे, क्योंकि यह उनकी विवशता थी। अब यदि पाकिस्तान ने पलटवार कर हमला किया, तो पूरा पाकिस्तान हमारी सेनाओं के निशाने पर होगा। फिर युद्ध हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने स्पष्ट चेतावनी दे दी है। हमारी सेनाएं और अद्र्धसैन्य बल फिलहाल ‘सुपर अलर्ट’ हैं। कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। बहरहाल अब हमें आतंकवाद पर स्पष्ट राष्ट्रीय नीति बनानी होगी। भारत पाकिस्तान को ‘आतंकी देश’ और ‘शत्रु देश’ घोषित करे। पाकिस्तान के मारे गए फौजियों के ताबूतों पर राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जनरल मुनीर के नाम के फूल अर्पित किए गए। ताबूतों को पाकिस्तान के झंडे में लपेट कर फौजियों ने सलामी दी। आतंकियों को राजकीय सम्मान से ‘अलविदा’ कहा जाएगा, तो पाकिस्तान की आतंकी सोच बेनकाब होती है। इस छोटे से ऑपरेशन से पाकिस्तान की फौज को मनोवैज्ञानिक तौर पर लकवा मार सकता है, यह विशेषज्ञों का मानना है। सेनाओं ने पाकिस्तान के भीतर 100 किलोमीटर तक हमला किया, पाक की फौज को भारत की सेनाओं की क्षमता का एहसास हो जाना चाहिए।

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