‘सुनहला’ बन गया रामगढ़ताल का मटमैला पानी, पर्यटन और रोजगार का बना नया केंद्र
गोरखपुर। कभी उपेक्षा और गंदगी का पर्याय माने जाने वाला रामगढ़ताल अब गोरखपुर की पहचान बनता जा रहा है। एक दशक पहले जिस ताल की सुध लेने वाला कोई नहीं था, वही आज पर्यटन, रोजगार और करोड़ों की आय का स्रोत बन चुका है। ताल व उसके आस-पास तीन किमी से अधिक के क्षेत्रफल में बदलता स्वरूप, गोरक्षनगरी के शहरी विकास की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
ताल किनारे का क्षेत्र तेजी से होटल हब के तौर पर विकसित हो रहा है, तो वहीं प्रदेश का पहला विश्वस्तरीय कन्वेंशन सेंटर आकार लेने लगा है। इसके बन जाने के बाद गोरखपुर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन, आयोजन और प्रदर्शनियां आयोजित हो सकेंगी, जिससे शहर को नई पहचान मिलेगी।काशी को भगवान बुद्ध की परिनिर्वाण स्थली और नेपाल से जोड़ने वाले गोरखपुर में पर्यटकों की आवक बढ़ती देख कई नामी कंपनियों को पांच सितारा होटल के लिए ताल किनारे का क्षेत्र भा रहा है। होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट का दो साल पहले शुभारंभ हो चुका है, तो वहीं होटल ताज की नींव पड़ चुकी है।
रोजगार का बड़ा जरिया बना ताल
पिछले पांच साल में रामगढ़ताल, रोजगार का बड़ा जरिया बनकर उभरा है। बड़े-बड़े होटलों के अलावा आस-पास की कालोनियों में तेजी से गेस्ट हाउस की संख्या बढ़ी है। लोग अपने घरों का स्वरूप बदलकर इसे व्यावसायिक स्वरूप दे रहे हैं। ताल के एक किमी के दायरे में ही 70 से अधिक छोटे-बड़े रेस्त्रां खुल चुके हैं।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को भी हर माह करीब एक करोड़ की आय हो रही है। प्राधिकरण को सिर्फ क्रूज से प्रत्येक माह 7.41 लाख, वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स से 25.25 लाख, फ्लोटिंग रेस्त्रां से 4.52 लाख, मोटर बोट से 12.51 लाख और जेएसआर फूड कोर्ट से पांच लाख रुपये, तालबाजार से 5.61 लाख रुपये की आय होती है।
पर्यावरणीय संरक्षण की मिसाल
रामगढ़ताल का विकास केवल पर्यटन और आय तक सीमित नहीं है। ताल की सफाई, हरियाली, वाटर रीचार्जिंग, जैवविविधता संरक्षण और ग्रीन बेल्ट जैसे कार्यों ने इसे पर्यावरणीय संतुलन का उदाहरण भी बना दिया है।
शहर की छवि में बड़ा बदलाव
रामगढ़ताल का कायाकल्प गोरखपुर की छवि को बदल रहा है। एक समय यह ताल उपेक्षा का प्रतीक था, आज यह शहरी विकास और आर्थिक सुधार की मिसाल बन चुका है। स्थानीय निवासी भी इस परिवर्तन को गर्व से देख रहे हैं।



