राष्ट्रीय

पाक को कड़ा सबक

पहलगाम में आतंकी हमले के उपरांत पाकिस्तान को भारत ने कड़ा सबक सिखा दिया है। ऐसे समय में सभी राजनीतिक दलों को एकजुटता दिखानी होगी ताकि हर रोज मौत के तांडव से बचा जा सके। क्या सुकून था, क्या हरियाली थी, लेकिन दरिंदगी करने वाले आतंकवादियों को तनिक दर्द नहीं आया कि नई नवेली दुल्हन के सामने उसके पति को मौत के घाट उतार दिया, बच्चों के सामने बाप को मारना, इससे बड़ा काफिर कौन हो सकता है? पत्नियों के विवाह की मेहंदी नहीं गई थी अभी, उनको पति के खून से रंग दिया। कैसे मंसूबे और कैसी कसक, जो छीन ले गई हंसती खेलती जीवन लीलाएं! पहलगाम में हुए इस हमले की घटना पर जितना भी दुख जताया जाए वह दुख कम है। इस हमले ने देश के सभी लोगों के दिलों पर दुखों का एक गहरा भाव प्रकट किया है। इस हमले में मारे गए निर्दोष लोगों का क्या कसूर था? इस दुख को जितना कम करने की कोशिश कर रहे हैं यह दु:ख बढ़ता जा रहा है और बदले की भावना को उत्तेजित कर रहा था। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों को बिना वजह से मार दिया गया। इस हमले में नवविवाहित दुल्हनों का सुहाग का चूड़ा भी नहीं उतरा था कि आतंकवादियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया, विधवा बना दिया। शादी के बाद अपने अरमानों को लेकर कश्मीर घाटी में हनीमून मनाने पहुंचे पर्यटकों को क्या मालूम था कि अब हम घर नहीं पहुंच पाएंगे और इस घाटी में ही अंतिम सांस लेंगे। बहुत ही निंदनीय और जघन्य अपराध हुआ है, जो आतंकवादियों ने मजहब पूछ-पूछ कर गोली मारी है।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, फिर भी यहां पर हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। भले ही केंद्र सरकार के धारा 370 व 35 ए निरस्त करने के बाद कश्मीर में आतंकी घटनाओं में काफी गिरावट व विकास कार्य गति पकड़ रहे थे, लेकिन आतंकवादियों ने पहलगाम में यह मजहबी आतंकवादी हमला करके गोलियां केवल हिंदुओं पर नहीं, बल्कि कश्मीरियत, पर्यटन, रोजगार व विकास पर मारी हंै। सरकार हर स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य कर रही है, मगर कहा जाता है कि लातों के भूत बातों से कहां सुधरते हैं। जिन्हें जन्नत का शौक है, उन्हें देश की सेना ने जहन्नुम की यात्रा करवा दी है। कुंठित मानसिकता व मजहबी कसक खतरनाक होती है। कर्नाटक के शिवमोगा जिले के निवासी मंजूनाथ राव (47) अपने परिवार-पत्नी पल्लवी राव और बेटे अभिजय (18) के साथ छुट्टियां मनाने के लिए पहलगाम पहुंचे थे। मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले इस क्षेत्र में उनका सैर-सपाटा खूनी मंजर में तब्दील हो गया। पल्लवी ने हमले के बाद एक रिश्तेदार को फोन पर बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि यह सेना का कोई अभ्यास है, लेकिन कुछ ही देर में सब कुछ बदल गया। जैसे ही वे बस से उतरकर घास के मैदान की ओर बढ़े, आम कपड़ों में एक आतंकी ने उनके पति को सिर में गोली मार दी। वहां पर जितने सिंदूर मिटे, सेना के सिंदूर ऑपरेशन से विधवाओं को कुछ राहत मिली होगी। अब सवाल यह है कि क्या पाक सबक लेगा या दोबारा ऐसी हरकतें करेगा?

प्रो. मनोज डोगरा

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