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अजीबोगरीब बीमारी, प्लेन की आवाज सुनकर खुशी से लगता रोने, नहीं है कोई इलाज!

दुनिया में ऐसी कई बीमारियां हैं जो बेहद खतरनाक हैं और उसका कोई इलाज भी नहीं है. डिमेंशिया भी ऐसी ही एक बीमारी है. हाल ही में एक शख्स के बारे में चर्चा है जिसे डिमेंशिया हुआ मगर उसके लक्ष्ण काफी अजीब थे. उसे एक खास तरह की आवाज इतनी पसंद आने लगी कि जब-जब वो उसे सुनता, तब-तब उसे खुशी से रोना आ जाता.

डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है जो इंसान की याददाश्त, सोचने की क्षमता, व्यवहार और रोजमर्रा के काम करने की ताकत को धीरे-धीरे प्रभावित करती है. दुनिया भर में लगभग 5.5 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, जबकि अमेरिका में ही करीब 70 लाख लोग डिमेंशिया के मरीज हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में सामने आए एक नए केस स्टडी में डिमेंशिया का एक बेहद अनोखा लक्षण देखने को मिला है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्षण भविष्य में इस बीमारी को पहचानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

प्लेन की आवाज लगने लगी अच्छी
यह मामला 68 साल के एक व्यक्ति का है, जिसे मेडिकल जर्नल में केवल सीपी (CP) नाम से बताया गया है. डिमेंशिया की पहचान होने से करीब दो साल पहले सीपी को एक खास तरह की आवाज से अचानक बेहद लगाव हो गया था. उन्हें स्पिटफायर फाइटर प्लेन के इंजन की आवाज बहुत पसंद आने लगी थी. सीपी अपने घर के पास एक एयरफील्ड के करीब रहते थे, जहां अक्सर स्पिटफायर विमान उड़ते थे. उनकी पत्नी के अनुसार जैसे ही वह विमान की आवाज सुनते, तुरंत बाहर भागकर विमान की ओर हाथ हिलाते और खुशी के मारे उनकी आंखों में आंसू आ जाते थे.

बिहेवियरल फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया से ग्रसित निकला शख्स
दिलचस्प बात यह थी कि यह उत्साह सिर्फ स्पिटफायर विमान की आवाज के लिए ही था. अन्य विमानों की आवाज या सामान्य तौर पर एविएशन में उन्हें कोई खास दिलचस्पी नहीं थी. कुछ समय बाद डॉक्टरों ने जांच के बाद सीपी को बिहेवियरल फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (FTD)नाम की बीमारी से ग्रसित पाया. यह डिमेंशिया का एक दुर्लभ प्रकार है जो मस्तिष्क के फ्रंटल और टेम्पोरल हिस्सों को प्रभावित करता है. आमतौर पर यह बीमारी 45 से 64 वर्ष की उम्र के बीच ज्यादा देखी जाती है. इस बीमारी में मरीजों को सामान्य डिमेंशिया की तुलना में याददाश्त की समस्या कम होती है, लेकिन उनके व्यवहार और व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आ सकता है. कई बार मरीजों में भावनात्मक बदलाव, गुस्सा, अजीब व्यवहार और सामाजिक नियमों की अनदेखी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. सीपी में भी कई ऐसे बदलाव देखने को मिले. उन्हें अचानक मूड स्विंग होने लगे, वे जल्दी चिड़चिड़े हो जाते थे और दूसरों की बात काटने लगे थे. इसके अलावा उन्हें मीठा खाने की आदत भी बढ़ गई थी. इतना ही नहीं, उन्हें शतरंज और शब्द खोजने वाले खेलों का भी बहुत ज्यादा शौक हो गया था. वहीं दूसरी ओर उन्हें पक्षियों की आवाज और तेज आवाज में बोलने वाले लोगों से चिढ़ होने लगी थी.

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