कॉलेज में जब दूसरे लड़के ढूंढ रहे थे जॉब, तब शुरू किया एक्सपेरिमेंट, अब 14 करोड़ की कमाई से हर कोई दंग

नई दिल्ली: वरुण रहेजा इंदौर के रहने वाले हैं। वह ‘रहेजा सोलर फूड प्रोसेसिंग’ (Raheja Solar Food Processing Pvt Ltd) के संस्थापक हैं। उन्होंने 2018 में मेडिकैप्स यूनिवर्सिटी, इंदौर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। कॉलेज के सालों में जब कई छात्र प्लेसमेंट पर फोकस कर रहे थे, वरुण ने कंपोस्टिंग और सोलर ड्राइंग (सौर सुखाने की प्रक्रिया) के साथ प्रयोग करना शुरू कर दिया। आज वह फसल कटने के बाद (पोस्ट-हार्वेस्ट) होने वाले नुकसान से निपटने के लिए अपने सोलर ड्रायर बेचते हैं। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में उन्होंने 14 करोड़ रुपये की कमाई की है। वरुण ने शार्क टैंक इंडिया में भी हिस्सा लिया। जजों से 1.75 करोड़ रुपये की डील हासिल की। कंपनी ने भारत के 26 राज्यों में 8,000 से अधिक सोलर ड्रायर स्थापित किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह केन्या, मलावी, इंडोनेशिया और भूटान जैसे देशों में फैल चुकी है। आइए, यहां वरुण की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
सोलर ड्राइंग यानी सूरज की रोशनी में सुखाने का कॉन्सेप्ट भारत में नया नहीं है। यह किसानों और घरों के लिए मुफ्त है। भारतीय घरों में पापड़ और अचार को धूप में सुखाना एक प्राचीन परंपरा है जो आज भी जारी है। इंदौर के वरुण रहेजा ने इसी सिद्धांत का इस्तेमाल करके सोलर ड्रायर बनाए हैं। इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। ये किसानों को हर साल होने वाले पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को कम करने में मदद करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, किसानों को पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान के कारण हर साल 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है।
मॉडर्न रिटेल और क्विक कॉमर्स दिग्गज भी ऐसे उत्पाद की डिमांड करते हैं जो एक समान आकार और रंग वाले हों। इन मार्केट स्टैंडर्ड के कारण किसानों के लगभग 20-30% बेहतरीन उत्पादों को सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिया जाता है क्योंकि वह स्टॉक फोटो जैसा नहीं दिखता है। इससे फार्म लेवल पर भारी बर्बादी होती है। इस समस्या को देखते हुए वरुण रहेजा ने फूड प्रोसेसिंग सॉल्यूशन डेवलप करने का फैसला किया। मार्केट को यह दिखाने के लिए कि रिजेक्ट प्रोडक्ट्स के साथ क्या संभव है, वरुण ने एक डी2सी ब्रांड ‘बेयर फ्रूट’ भी लॉन्च किया। यह दिखने में रिजेक्ट फलों को हेल्दी, प्रिजर्वेटिव फ्री सूखे स्नैक्स में बदलता है। इससे बर्बाद होने वाली चीजों से वैल्यू क्रिएशन होता है।
वरुण राहेजा ने 2018 में बीटेक पूरा किया। कॉलेज के सालों में जब कई छात्र प्लेसमेंट पर फोकस कर रहे थे, वरुण कंपोस्टिंग और सोलर ड्राइंग पर प्रयोग करने में जुटे थे। वरुण का सोलर ड्राइंग में पहला एक्सपेरिमेंट 2017-18 में कॉलेज में रहते हुए शुरू हुआ। उन्होंने अपनी सेविंग से लगभग 25,000-30,000 रुपये के निवेश से पहला सौर ड्रायर बनाया। 2018 में अपनी फर्म रजिस्टर की। बाद में 2019 में इसे रहेजा सोलर फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में बदल दिया। उनकी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने पद्म श्री डॉ. जनक पालटा मैकगिलिगन के सानिध्य में इंटर्नशिप की। उनके मार्गदर्शन में वरुण ने सोलर ड्राइंग की प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल की। ये समझा कि कैसे स्थायी तकनीक सीधे किसानों की आय में सुधार कर सकती है।
वरुण रहेजा अपनी मां बबीता के साथ शार्क टैंक इंडिया सीजन 4 में भी दिखाई दिए। उनकी पिच ने पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को कम करने और किसानों को अधिक कमाने में मदद करने पर फोकस किया। उन्होंने 1% इक्विटी के लिए 50 लाख रुपये मांगे। शार्क टैंक के जजों ने 1.75 करोड़ रुपये के सौदे पर 7% इक्विटी के लिए मुहर लगाई। इस सौदे ने कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 40 करोड़ रुपये किया। शो के बाद कंपनी ने अपने किसान नेटवर्क को 65,000 से अधिक तक बढ़ाया। अपने IoT-इनेबल्ड ड्रायर को मजबूत किया। वित्त वर्ष 2025-26 में 25 करोड़ रुपये के रेवेन्यू को पार करने का अनुमान है।



