संपादकीय

खेल भावना

सरकार ने पाकिस्तान की हॉकी टीम और निशानेबाजों को भारत आने की अनुमति दे दी है। पहलगाम जैसी आतंकी घटना का सामना करने के बावजूद भारत ने खेल भावना को बनाए रख परिपक्वता का सबूत दिया है।

जिम्मेदारी भरा कदम: भारत को हॉकी के एशिया कप और FIH जूनियर वर्ल्ड कप की मेजबानी करनी है। इसके अलावा शूटिंग में ISSF जूनियर विश्व कप भी होना है। दोनों देशों के बीच तनाव को देखते हुए यह असमंजस बना हुआ था कि पाकिस्तान इन इवेंट्स में हिस्सा ले पाएगा या नहीं, लेकिन भारत ने जिम्मेदारी भरा परिचय दिया।

खिलाड़ियों को सजा क्यों: सरकार का यह फैसला ही हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच के अंतर को सामने ला देता है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का निशाना आम लोग बनते हैं, जबकि पहलगाम के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाते वक्त भी भारत ने यही कहा कि उसकी लड़ाई केवल आतंकियों से है, आम लोगों से नहीं। सरकार का मौजूदा फैसला भी इसी भावना से जुड़ा है। पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट के किए की सजा उसके खिलाड़ियों को देना सही नहीं होगा।

खिलाड़ियों को सजा क्यों: सरकार का यह फैसला ही हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच के अंतर को सामने ला देता है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का निशाना आम लोग बनते हैं, जबकि पहलगाम के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाते वक्त भी भारत ने यही कहा कि उसकी लड़ाई केवल आतंकियों से है, आम लोगों से नहीं। सरकार का मौजूदा फैसला भी इसी भावना से जुड़ा है। पाकिस्तानी इस्टैब्लिशमेंट के किए की सजा उसके खिलाड़ियों को देना सही नहीं होगा।

राजनीति और खेल अलग: भारत का कदम इंटरनैशनल हॉकी फेडरेशन और इंटरनैशनल ओलिंपिक कमिटी की नीतियों के अनुरूप है, जो खेल में निष्पक्षता और सहभागिता पर जोर देते हैं। खेल को राजनीति से नहीं मिलाया जा सकता। वैसे भी मेजबान होने के नाते भारत पर जिम्मेदारी ज्यादा है। उसे इन इवेंट्स में सभी प्रतिभागी देशों को समान मौके उपलब्ध कराने चाहिए और उसने यही किया।

नियमों का सम्मान: IOC और FIH जैसी संस्थाओं के नियम बेहद कड़े हैं। पाकिस्तान को अनुमति नहीं देने पर खुद भारत के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं। ईरान ने अपने खिलाड़ियों को इस्राइल का सामना करने से मना किया और इसके चलते 2021 में इंटरनैशनल जूडो फेडरेशन ने उस पर बैन लगा दिया था। खुद पाकिस्तान ने जब 2019 में प्रो लीग हॉकी के पहले तीन मैचों से नाम वापस लिया, तो अंतरराष्ट्रीय संस्था ने उसे पूरे टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया था। भारत ने नियमों का सम्मान किया है।

भारत की उदारता: खेल लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकता है। अतीत में हमने Sports Diplomacy का कमाल देखा है, जिसकी वजह से बातचीत का रास्ता खुला। सरकारों के स्तर पर न सही, आम लोगों के स्तर पर संबंध सुधारने की हर पहल का स्वागत होना चाहिए।

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