तो क्या बढ़ेगी आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन, टैक्सपेयर्स के बीच क्यों बढ़ी टेंशन?

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक आ गई है। 15 सितंबर की डेडलाइन से पहले ही लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। वजह है- पोर्टल की दिक्कतें और धीमी फाइलिंग की रफ्तार। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार डेडलाइन बढ़ाएगी?
नई दिल्ली| इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख नजदीक आ गई है। 15 सितंबर की डेडलाइन से पहले ही लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। वजह है- पोर्टल की दिक्कतें और धीमी फाइलिंग की रफ्तार। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार डेडलाइन बढ़ाएगी?
आईटीआर फाइल करते वक्त अक्सर हम कुछ बातों पर गौर नहीं करते, जो बाद में एक बड़ी गलती बन जाती है। इससे रिफंड मिलने में भी दिक्कत आती है। आइए इन गलतियों के बारे में एक-एक करके बात करें। ताकि आप आईटीआर फाइल करते वक्त इनका ध्यान रखें।
इन गलतियों से करें बचाव
असेसमेंट ईयर (Assessment Year) गलत चुनना
आईटीआर फाइल करते वक्त अक्सर लोग असेसमेंट ईयर को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। अगर कोई व्यक्ति 2024-25 में होने वाली कमाई के लिए आईटीआर फाइल कर रहा है, तो उसे असेसमेंट ईयर 2024-25 चुनना होगा। हालांकि अक्सर लोग इसमें गलत चयन कर लेते हैं।
आईटीआर फॉर्म गलत चुनना
इनकम टैक्स की ओर से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए कई तरह के फॉर्म जारी किए जाते हैं। अक्सर टैक्सपेयर इस बात से कंफ्यूज रहते हैं कि उनके लिए आईटीआर फाइल करते वक्त कौन-सा फॉर्म जरूरी है।
- आईटीआर 1- सैलरी
- आईटीआर 2- सैलरी + कैपिटल गेन
- आईटीआर 3- बिजनेस + कैपिटल गेन
- आईटीआर 4- बिजनेस से हुई कमाई
आईटीआर 1 सबसे आसान है, आईटीआर 1 के तहत इनकम टैक्स वहीं फाइल करता है, जिनकी कमाई केवल सैलरी से हो रही हो। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति जो शेयर बाजार या कहीं और निवेश करते हैं या उनकी कमाई के अन्य सोर्स भी है, वे आईटीआर 2 फॉर्म का उपयोग करता है।
ITR फाइल के बाद वेरीफाई न करना
आमतौर पर टैक्सपेयर इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर तो देते हैं, लेकिन वेरीफाई करना भूल जाते हैं। ऐसे में रिफंड मिलने में भी परेशानी आती है। इसलिए आईटीआर फाइल करने के बाद वेरीफाई करना ना भूले, नहीं तो आपको बड़ी परेशानी हो सकती है।



