शोभा-यात्रा, नफरती हिंसा की वजह

जब भी हिंदू देवी-देवता की प्रतिमा की विसर्जन या शोभा-यात्रा निकलती है, तो वह नफरत, अराजकता, वैमनस्य और हिंसा में तबदील क्यों हो जाती है? कई बार हत्याएं भी कर दी जाती हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है। मुसलमानों का कोई मजहबी जुलूस या मौका हो, तो हिंदू उस पर प्रहार नहीं करते। उसमें रोड़ा नहीं अटकाते। यहां तक कि हिंदुओं ने मस्जिद से की जाने वाली अजान पर भी सांप्रदायिक आपत्ति नहीं जताई है। शोभा-यात्रा निकालने की अपनी शोभा है। मुसलमानों को उस पर क्या आपत्ति होनी चाहिए? भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और धार्मिक आजादी का मौलिक अधिकार भी हमें दिया गया है। फिर हिंसा और हत्याओं की क्या वजूहात हो सकती हैं? हम कई बार यह सवाल उठा चुके हैं कि अचानक एक भीड़ कहां से उमड़ आती है? घरों और मस्जिद की छतों से पथराव कैसे होने लगता है? ये छोटे-बड़े पत्थर कहां से, किस तरह इक_ा किए जाते हैं? कुछ शहरों, कस्बों में अचानक तलवारें भी चमकने लगती हैं। तलवारें, डंडे और हथियार कहां से आते हैं? कौन उनकी सप्लाई करता है? क्या पत्थरबाजी, दंगे, खून-खराबे की कोई पूर्व नियोजित साजिश तैयार की जाती है? तो साजिशकार कौन हैं? सिर्फ उप्र के बहराइच में ही सांप्रदायिक हिंसा, आगजनी, तोड़-फोड़ नहीं हुई है। बहराइच को छावनी में तबदील करना पड़ा। करीब 30 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया और 10 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। उप्र के कई इलाकों में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ता रहा है। फिलहाल बहराइच जैसे हालात तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के शहरों और कस्बों में भी पैदा किए गए हैं। सांप्रदायिक हिंसा, दंगे अपने आप ही नहीं भडक़ते, उन्हें सुलगाया और फैलाया जाता है। भारत में दंगों के काले इतिहास मौजूद हैं। दंगे औसतन सभी राज्यों में होते रहे हैं। उनके असंख्य उदाहरण भी मौजूद हैं।
बेशक सरकार किसी भी दल की रही हो! संविधान के किस अनुच्छेद में यह उल्लेख है कि अमुक मुसलमानों का इलाका है, तो ये हिंदू, सिख, ईसाई आदि के इलाके हैं? ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जिन मोहल्लों में मुस्लिम आबादी रहती है, प्रशासन उन्हें ‘संवेदनशील’ घोषित करता है, जबकि गैर-मुस्लिम क्षेत्रों के संदर्भ में ऐसा नहीं है। मुसलमान संवेदनशीलता के आधार पर नाजुक इलाके क्यों हैं? दरअसल देश को इलाकों और मोहल्लों में बांटा नहीं जा सकता। इस बार भी मुसलमानों ने आपत्ति की कि शोभा-यात्रा उनकी मस्जिद के सामने से क्यों गुजरी? क्या यह कानूनन अपराध है या कोई प्रतिबंध लगा रखा है? किसी मुस्लिम की छत से ‘हरा झंडा’ उतारा गया और उसकी जगह ‘भगवा झंडा’ लहराया गया, यह अनैतिक हरकत है। इसका कोई औचित्य भी नहीं है। यह घोर सांप्रदायिक है। अवैध कब्जे की एक हरकत है। यदि ऐसी हरकत कर भी दी गई, तो गोली मार कर एक इनसानी हत्या करने की नौबत क्यों आई? जिस हिंदू नौजवान को मार दिया गया, उसकी शादी मात्र दो माह पहले ही हुई थी। किसी औरत को इस कदर विधवा कर देना क्या ‘मजहबी प्रावधान’ है? जाहिर है कि अलग-अलग समुदायों के लोगों के भीतर नफरत और उन्माद भरे हैं। दूसरी तरफ, यदि शोभा-यात्रा के दौरान उग्रता, हुड़दंग, अभद्र शोर, भडक़ाऊ नारेबाजी की जाती है, तो वह धार्मिक यात्रा भी बेमानी है।


