दबंग और कबीर सिंह के मिश्रण में नजर आए शाहिद कपूर

मुंबई। शाहिद कपूर और पूजा हेगड़े की फिल्म देवा रिलीज हो गई है। फिल्म में शाहिद कपूर उग्र पुलिस ऑफिसर अवतार में नजर आ रहे हैं। शाहिद कपूर की ‘देवा’ ने ओपनिंग डे पर वही किया है, जिसकी इससे उम्मीद थी। 1.67 करोड़ रुपS की एडवांस बुकिंग के साथ सिनेमाघरों में उतरी इस फिल्म ने पहले दिन अच्छी कमाई की है। बल्कि यह 2025 में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग पाने वाली बॉलीवुड फिल्म बन गई है। एक सनकी पुलिसवाले के रोल में जहां शाहिद के काम की तारीफ हो रही है, वहीं फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं। अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं तो आपको ये फिल्म मिस नहीं करनी चाहिए। इस फिल्म में शाहिद कपूर दबंग और कबीर सिंह के मिश्रण में नजर आए हैं। ये फिल्म वन टाइम वॉच तो है ही और हो सकता है कि ये शाहिद कपूर की बेहतरीन फिल्मों में से एक बन जाए।
एक सिरफिरे पुलिसवाले देवा (शाहिद कपूर) की कहानी फ्लैश बैक से शुरू होती है, जहां वह एक बहुत बड़े केस को हल करके लौट रहा होता है। तभी उसका एक्सीडेंट हो जाता है और उसकी याददश्त चली जाती है। देवा की याददाश्त जाने वाली बात की जानकारी सिर्फ उसके डॉक्टर और सीनियर फरहान (प्रवेश राणा) को है। दुर्घटना से पहले देवा ने फरहान को बताया था कि उसने केस सॉल्व कर दिया है।
दबंग पुलिसवाला देवा मुजरिमों को बिना कोई प्रोटोकॉल फॉलो किए इतनी बेरहमी से मारता है कि उसके बारे में पत्रकार दीया (पूजा हेगड़े) भी लिख देती है कि वो पुलिस वाला है या माफिया? देवा को मुंबई के एक गैंगस्टर (मनीष वाधवा) की तलाश है, मगर जितनी बार देवा उसे पकड़ने की कोशिश करता है, उतनी बार वह गैंगस्टर पुलिस की पकड़ से भाग निकलने में कामयाब हो जाता है। पुलिस विभाग को शक है कि कोई अंदर का भेदिया है, जो बदमाशों से मिला है।
कहानी में दूसरा ट्रैक भी है, जहां देवा के भाई समान दोस्त रोहन (पावेल गुलाटी) की गोली मारकर उसी दिन हत्या कर दी जाती है, जिस दिन उसे वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाना था। देवा अपने दोस्त और पुलिसवाले के कत्ल की तफ्शीस में जुट जाता है, मगर जब तक वह केस सॉल्व करता, उसकी याददाश्त चली जाती है। याददाश्त जाने के बाद एक बार फिर देवा को रोहन का केस सौंपा जाता है। जैसे-जैसे देवा दोबारा केस की तह में जाता है, उसके हाथ सुराग लगते जाते हैं और अंत में जब उसे अपराधी का पता चलता है, तो उसके साथ-साथ दर्शक भी चौंक जाते हैं।
कैसा है अभिनय?
इंटरवल तक फिल्म कई सवाल और सस्पेंस क्रिएट करने की कोशिश की गई है। लेकिन फर्स्ट हाफ थोड़ा खींचा हुआ है। शाहिद कपूर ने ठीक काम किया है। लेकिन एक्शन कई जगह कन्वींस नहीं करता। शाहिद और पूजा का रोमांटिक सीन जबरदस्ती का लगता है। फिल्म स्लो है। कुछ सस्पेंस है, जिसे जबरदस्ती बनाया जा रहा है। ना हीरो से कनेक्शन बन पाता है और ना ही विलेन का ही कुछ कोई खबर है। फिल्म की कहानी सेम टू सेम 2013 की मुंबई पुलिस पर आधारित है, जो मलयालम फिल्म है। सिर्फ मर्डर की वजह को बदला गया है। पूजा हेगड़े का रोल ओके है। इम्प्रेस नहीं करती। पूरी मूवी शाहिद कपूर पर बेस्ड है।



