बदलेगा संभल, बढ़ेगा संभल! अब दंगे की कहानी से नहीं, धर्म नगरी के लिए जाना जाएगा, UP को मिलने वाला नया तीर्थ स्थल

संभल: उत्तर प्रदेश सरकार अब धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर एक और बड़े केंद्र को स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. संभल को अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की कतार में लाने की योजना बनाई जा रही है. यह पहल केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास, पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है.
संभल का महत्व हिंदू मान्यताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है, जहां इसे भगवान कल्कि का जन्मस्थान माना जाता है. भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार के रूप में कल्कि का उल्लेख पुराणों में मिलता है, और यही विश्वास संभल को विशेष धार्मिक पहचान देता है. संभल का इतिहास और धार्मिक परंपरा इसे अन्य तीर्थ स्थलों से अलग बनाती है. यहां मौजूद अनेक प्राचीन मंदिर, कुंड, घाट और पवित्र स्थल इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण हैं.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के तहत कुल 68 तीर्थ स्थलों (तीर्थ), 19 महाकूप (प्राचीन कुएं) और कई ऐतिहासिक धार्मिक संरचनाओं का पुनरुद्धार किया जाएगा. इन स्थलों में प्रमुख रूप से कल्कि तीर्थ, भुवनेश्वरी, चंद्रेश्वर और नैमिषारण्य जैसे स्थान शामिल हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं. यह पहल केवल पुराने स्थलों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस कर एक समग्र धार्मिक अनुभव प्रदान करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है.
24 कोसी परिक्रमा यात्रा का पुनरुद्धार
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘वंशगोपाल 24 कोसी परिक्रमा यात्रा’ का पुनरुद्धार है. लगभग 52 किलोमीटर लंबा यह मार्ग श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है. संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने कहा, इस परिक्रमा को लगभग 50 साल बाद फिर से शुरू किया जा रहा है, क्योंकि 1972 के बाद इसे रोक दिया गया था. 52 किलोमीटर लंबे इस रास्ते के कुछ हिस्सों पर लोगों ने कब्जा कर लिया था, लेकिन लगभग 4-5 महीनों में पूरे रास्ते को खाली करवा लिया गया. अब इस प्रोजेक्ट के तहत इसे विकसित और चौड़ा किया जाएगा, जिसमें पैदल परिक्रमा करने वालों के लिए 3 मीटर चौड़ा और जमीन से थोड़ा ऊपर उठा हुआ एक अलग फुटपाथ भी बनाया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि संभल में पहचाने गए 87 तीर्थस्थलों में से ज़्यादातर, जिनमें कल्कि, भुवनेश्वरी, चंद्रेश्वर और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं, 24 कोसी परिक्रमा मार्ग के दायरे में ही आएंगे.
परिक्रमा मार्ग की विशेषताएं
कुल लंबाई: 52 किलोमीटर
कच्चा मार्ग: 31.5 किलोमीटर
पक्का मार्ग: 20.5 किलोमीटर
प्रस्तावित चौड़ाई: 7 मीटर
पैदल यात्रियों के लिए: 3 मीटर चौड़ा ऊंचा फुटपाथ
इस परियोजना के तहत मार्ग को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है और इसे सभी मौसमों में उपयोग योग्य बनाने के लिए विकसित किया जा रहा है. सरकार ने इस परिक्रमा मार्ग के विकास के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.
यह है बजट
- सिविल काम: 155 करोड़ रुपये
- भूमि अधिग्रहण (58 हेक्टेयर): 130 करोड़ रुपये
- यूटिलिटी शिफ्टिंग और वन कार्य: 13.5 करोड़ रुपये
- तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाएं: लगभग 36 करोड़ रुपये
सूत्रों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट एक बड़े बदलाव की योजना का पहला कदम है, जिसके तहत सरकार संभल को एक खास आध्यात्मिक जगह के तौर पर स्थापित करना चाहती है और इसे मथुरा और वृंदावन के जाने-माने सर्किट से जोड़ना चाहती है. इसी मकसद से, सरकार ने संभल के धार्मिक ढांचे को मज़बूत करने के लिए कुछ और प्रोजेक्ट मंज़ूर किए हैं, जिनमें सुविधाओं के लिए 224.40 लाख रुपये, 141 साल पुराने मनोकामना मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए, और कुरुक्षेत्र तीर्थ के पर्यटन विकास के लिए 175.29 लाख रुपये शामिल हैं. यूपी सरकार के पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक मामलों के अतिरिक्त मुख्य सचिव,अमृत अभिजात ने कहा, 24 कोसी परिक्रमा पर लगभग 6 से 7 लाख श्रद्धालुओं के आने के साथ, संभल को इस तरह से विकसित किया जा रहा है ताकि साल भर लगातार पर्यटन बना रहे और स्थानीय आर्थिक गतिविधियां बढ़ें.
इन तीन चरण में होंगे काम
सूत्रों ने बताया कि यह सुधार सिर्फ सड़कों से जुड़ा प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि इसे एक पूरे धार्मिक गलियारे के तौर पर देखा जा रहा है, जो जिले भर के मुख्य तीर्थस्थलों को आपस में जोड़ेगा. एक ‘विजन डॉक्यूमेंट’ (दृष्टिकोण दस्तावेज) तैयार किया गया है, जो अभी अपने आखिरी चरण में है. इसमें संभल प्रोजेक्ट को तीन चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव दिया गया है. पहले चरण में परिक्रमा मार्ग को फिर से ठीक करके, और मंदिरों, घाटों और कुंडों का संरक्षण करके आध्यात्मिक पुनरुद्धार पर जोर दिया जाएगा. दूसरे चरण में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर काम होगा, जिसमें सड़कों का विकास, साफ-सफ़ाई, पार्किंग और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास शामिल है. तीसरे चरण में, सरकार 84-87 धार्मिक स्थलों को फिर से ठीक करके और एक प्रस्तावित ‘कल्कि संग्रहालय’ बनाकर संभल को एक धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर और ज़्यादा पहचान दिलाएगी. यह संग्रहालय संभल के भगवान कल्कि से जुड़े इतिहास और महत्व को उजागर करेगा.
अन्य विकास कार्य और योजनाएं
- सरकार ने संभल के धार्मिक और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है.
- 141 वर्ष पुराने मनोकामना मंदिर का सौंदर्यीकरण
- कुरुक्षेत्र तीर्थ का विकास
- तीर्थ स्थलों के आसपास सुविधाओं का विस्तार
- इन परियोजनाओं का उद्देश्य संभल को एक संपूर्ण धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है.


