संपादकीय

महू, जश्न में दंगे की लपटें

टीम इंडिया के चैंपियंस ट्रॉफी जीतने पर देश भर में जश्न मनाया गया। ढोल-नगाड़े बजाए गए। आतिशबाजियां छोड़ी गईं। जश्न में सभी धर्मों, मतों, नस्लों, जातियों के लोग शरीक थे। एक भारतीय रंग ही मस्ती में सराबोर था। लिहाजा यह सवाल स्वाभाविक है कि जीत का जश्न, अंतत:, सांप्रदायिक कैसे हो गया? दंगे और पथराव के हालात कैसे बन गए? मध्यप्रदेश के इंदौर जिले का महू शहर बाबा अंबेडकर की जन्म-स्थली है और गुजरात राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्रधानमंत्री मोदी का गृह-राज्य है, लिहाजा जीत के जश्न पर हिंदू-मुसलमान कैसे हो गए? दंगे देश भर में होते रहे हैं, लेकिन क्या टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत पर भी दंगे की लपटें जलने लग सकती हैं? बेंगलुरु और कानपुर के सांप्रदायिक दंगों से हम यह आश्चर्यजनक सवाल पूछते रहे हैं कि एक उबलती हुई भीड़ आखिर कहां से आ जाती है? पत्थर, ईंटें, डंडे और कुछ तलवारें अचानक कहां से सामने आ जाती हैं? अब सवाल यह भी है कि क्या धर्म और मजहब के नाम पर देश में गली-मुहल्ले चिह्नित किए जा सकते हैं? संविधान में कहां उल्लेख है कि यह मुस्लिम मुहल्ला है और यह हिंदू-बहुल बस्ती है? संविधान के किस अनुच्छेद में यह प्रावधान है कि रामनवमी, हनुमान जयंती, मां दुर्गा आदि की शोभा-यात्राएं किसी मुस्लिम या अन्य सांप्रदायिक बहुल गली-मुहल्ले या इलाके से नहीं गुजर सकतीं? कहां लिखा है कि जीत के जश्न में ‘भारत माता की जय’, ‘टीम इंडिया जिंदाबाद’ और ‘वंदे मातरम’ सरीखे नारे इस्लाम-विरोधी हैं? अथवा जामा मस्जिद के सामने से उद्घोष करते लोग नहीं गुजर सकते? कमोबेश अंबेडकर की जन्म-स्थली महू में सांप्रदायिक दंगे की वजह जीत का जश्न कभी नहीं रहा। एक तस्वीर पूरी दुनिया ने देखी होगी! शमी ने विराट कोहली को अपनी मां से मिलवाया। विराट ने सबसे पहले उस मां के पांव छुए। मुस्लिम मां ने भी अपने सगे बेटे की तरह हिंदू बेटे को भी दुलार दिया।

आशीर्वाद दिया। इस्लाम में पांव छूने की परंपरा नहीं है, लेकिन हिंदुओं में यह सबसे बड़ा संस्कार माना जाता है। इस सांप्रदायिक सद्भाव और इनसानियत को समझने की कोशिश करें। इस्लाम के कठमुल्ला शमी की मां के खिलाफ भी फतवा जारी कर सकते थे! लेकिन समन्वय और इनसानी इज्जत के तौर पर उन लम्हों को देखा गया। महू के दंगई भी इससे सबक सीख सकते हैं। दरअसल देश के हरेक इलाके में हिंदू-मुसलमान साथ-साथ रहते आए हैं। तनाव भी फैला है और दंगे भी हमारा विभाजक अतीत रहा है, लेकिन टीम इंडिया की जीत तो ‘राष्ट्रीय’ है। टीम में प्रमुख तेज गेंदबाज मुहम्मद शमी भी हैं और अन्य हिंदूवादी भी हैं। उनकी ताकत मिश्रित होती है, तो वह ‘भारतीय’ बनती है और हम विश्व को जीतते आए हैं। महू में जश्न का जुलूस जामा मस्जिद के सामने से गुजरा, तो अचानक पथराव शुरू कर दिया गया। बाद में वाहनों, दुकानों और मंदिर तक में आगजनी की गई। घर भी फूंकने की कोशिश की गई। ये शब्द भी सुनाई दिए-‘तुम्हारे राम को बुलाओ, तुम्हारी गाड़ी जल रही है। कौन तुम्हें बचाएगा?’ एक युवती, बुजुर्ग महिला और एक युवा व्यक्ति ने इन शब्दों को सत्यापित किया है। उधर मुस्लिम पक्ष के आरोप हैं कि जामा मस्जिद के सामने से ‘श्रीराम’ के नारे लगाती हुई भीड़ गुजरी। बहरहाल बढ़ती नफरत को रोकना होगा।

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