राजनीति

राहुल गांधी के शेर

भारतीय राजनीति का दुखांत इतना ही नहीं है। वह इससे भी आगे जाता है। उसकी मां इस बात पर जिद्द किए बैठी हैं कि इसे हर हालत में भारत का प्रधानमंत्री बनाना है। बस एक छलांग ही तो बची है। अब ‘विपक्ष के नेता’ तक की सीढ़ी पर तो बैठे ही हैं। राहुल गांधी की भी अपनी जिद्द है। जब तक प्रधानमंत्री नहीं बना देते तब तक मेरे ये ‘शेर’ हर जगह, मौके-बेमौके ऐसे ही घूमेंगे। लेकिन लगता है पानी सिर से गुजरने लगा है। कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने वाले इन दस नेताओं की पिटाई वहां की साधारण जनता ने कर दी। क्या कांग्रेस या राहुल गांधी इस प्रकरण से कुछ सीखेंगे…

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर आजकल दुनिया के सब देशों में चर्चा चल रही है। कहा जा रहा है कि भविष्य इसी बुद्धिमता का बचा है। इसको लेकर चौथा विश्व सम्मेलन पिछले दिनों भारत की राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ था। इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिक, उद्योगपति, राजनीतिज्ञ, विश्वविद्यालय, छात्र व अन्य लोग एकत्रित हुए थे। कई देशों के मुखिया इसमें भाग ले रहे थे। भारत के लिए यह सचमुच गौरव की बात थी कि इस वैश्विक सम्मेलन का आयोजन करने का अवसर उसे मिल रहा था। लेकिन कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसमें गड़बड़ करने की शायद पहले से ही योजना बना रखी थी। उसके दस नेताओं ने इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवा रखा था। इसके लिए यकीनन गुप्त रूप से तैयारी की गई होगी। किसी प्रेस से टी-शर्ट पर नरेंद्र मोदी की टीका टिप्पणी वाला चित्र छपवाया गया। उस टी शर्ट पर एक दूसरी साधारण कमीज पहन ली गई। पंजीकरण तो था ही। इस प्रकार कांग्रेस के ये दस नेता भारत मंडपम में दाखिल हो गए। कांग्रेस के इन नेताओं ने वहां विश्वभर के लोगों के सामने अपने शरीर के ऊपरी भाग के कपड़े उतार दिए। शुरू में तो वहां एकत्रित लोगों ने यही समझा कि ये भी शायद एआई से निर्मित भारत के रोबोट हैं जिनका प्रदर्शन किया जा रहा है। सम्मेलन के शुरू में ही गलगोटिया विश्वविद्यालय ने एक कृत्रिम चीनी कुत्ते को अपना कह कर भद्द पिटवा ली थी। इसलिए नारे लगाते इन दस लोगों को देख कर शुरू में भ्रम होना ही था कि शायद भारत निर्मित रोबोट हैं। कुछ लोगों ने तो यह भी समझा होगा कि भारत ने एआई के क्षेत्र में इतनी बड़ी छलांग लगा ली है कि वह आर्गेनिक एआई तक पहुंच गया है जहां रोबोट मनुष्यों की तरह सोचता भी है।

चेतना युक्त रोबोट। लेकिन फिर इन दस नेताओं ने अलग अलग मुद्राओं में नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। इनका कहना था कि ये वहां नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए गए थे। कुछ दिन बाद सोनिया गान्धी परिवार के राहुल गान्धी ने स्वयं ख़ुलासा किया कि ये उसके ‘शेर’ थे। अब मामला साफ हो गया था कि यह सारी करतूत किसकी और क्यों थी। पहले चीनी कुत्ते ने भद्द पिटवाई और अब राहुल गान्धी के दस शेरों ने। प्रदर्शन करना कोई बुरी चीज नहीं है। यह समय समय पर करते रहना चाहिए। उससे पता चलता रहता है कि इस दिशा में भी देश कितनी प्रगति कर रहा है। इस काम के लिए भारत ने तो स्थान और सुविधा भी दे रखी है। दिल्ली में ही जहां राहुल गान्धी के दस शेर भारत मंडपम में घुस गए गए थे, सरकार ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनों की सब प्रकार की ‘सुविधापूर्ण प्रदर्शन स्थली’ बना रखी है। लेकिन इन दस शेरों को शायद दुनिया के आगे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करना था। परन्तु एक और प्रश्न भी पैदा होता है। यह विश्व सम्मेलन तो ‘भारत’ का था। यह सम्मेलन मोदी का नहीं था। यहां प्रदर्शन या विरोध का अर्थ था भारत का विरोध। यहां लगाए गए नारे परोक्ष रूप से भारत के खिलाफ लगाए गए नारे ही थे। दरअसल जब कोई व्यक्ति या संस्था अपनी सामान्य बुद्धि से कार्य करती है तो वह कार्य तार्किक हो सकता है। लेकिन जब किसी व्यक्ति या संस्था का संचालन कृत्रिम बुद्धिमत्ता से किया जाने लगे तो उसका विश्लेषण सामान्य पैमानों से नहीं किया जा सकता। उदाहरण के लिए यदि प्रश्न पूछा जाए कि कृत्रिम बुद्धि से संचालित व्यक्ति कैसा व्यवहार कर सकता है, तो इसके कई उत्तर हो सकते हैं, मसलन वह आग में भी कूद सकता है, समुद्र में भी छलांग लगा सकता है, हवा में भी उड़ सकता है, भरी सभा में अपने कपड़े भी उतार सकता है, किसी को खंजर भी घोंप सकता है। यही कारण है कि आजकल जहां एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभों की चर्चा हो रही है वहीं उसके नुकसानों पर भी चर्चा होने लगी है। एआई की सीमा यह है कि उसका नियंत्रण किसी दूसरे के हाथ में होता है।

जैसे कठपुतलियों का नाच बगैरह। लेकिन कई बार गड़बड़ हो जाती है। विवाह में नाचने वाली कठपुतली फिजिक्स के सेमिनार में नाचने लगती है। यकीनन तब वहां शिरकत कर रहा कोई भी उसकी कला की प्रशंसा तो नहीं करेगा बल्कि कहेगा, इसको यहां से निकालो। यदि वही कठपुतली किसी विवाह स्थल पर अपनी कला का प्रदर्शन करेगी तो वाहवाही बटोरेगी। कांग्रेस के ये दस बड़े नेता जो भारत मंडपम में विविध भाव भंगिमाओं में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे यकीनन वाहवाही तो नहीं ही बटोर रहे थे। लेकिन वाहवाही बटोरना उनका शायद उद्देश्य भी नहीं था। उनका उद्देश्य तो भारत की भद्द पिटवाना था। कोई भी मौका हो, कोई भी स्थान हो, वे भारत की भद्द पिटवाने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देंगे। अब तो यह भी कहा जाने लगा है कि गलगोटिया विश्वविद्यालय के चीनी कुत्ते के प्रकरण की भी बाकायदा जांच की जाए, वहां भी कहीं इन ‘भद्द पिटवाने वाली जुंडली’ के तार तो नहीं जुड़े हुए। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने अति उत्साह में आकर यह हरकत की है, शायद वे अपने नेताओं की नजर में अपनी कीमत बढ़वाना चाहते होंगे। शायद ऐसा मान भी लिया गया होता। इस थ्योरी का खंडन स्वयं राहुल गान्धी ने ही समय रहते कर दिया। उसके कहने का भाव यह था कि इन्हें कोई साधारण कार्यकर्ता न समझ लें। ये तो उसके ‘शेर’ हैं। इस मरहले पर डा. नवजोत कौर सिद्धु का ध्यान आता है। सिद्धु परिवार का राहुल गान्धी और प्रियंका गान्धी के साथ बहुत अपनत्व वाला संबंध रहा है।

अपने इन लंबे संबंधों का विश्लेषण करते हुए कुछ दिन पहले ही डा. सिद्धु ने राहुल गान्धी पर टिप्पणी करते हुए दु:ख प्रकट किया था कि वह ‘पप्पू’ के स्तर से ऊपर नहीं उठ पा रहा है। लेकिन भारतीय राजनीति का दुखान्त इतना ही नहीं है। वह इससे भी आगे जाता है। उसकी मां इस बात पर जिद्द किए बैठी हैं कि इसे हर हालत में भारत का प्रधानमंत्री बनाना है। बस एक छलांग ही तो बची है। अब ‘विपक्ष के नेता’ तक की सीढ़ी पर तो बैठे ही हैं। राहुल गान्धी की भी अपनी जिद्द है। जब तक प्रधानमंत्री नहीं बना देते तब तक मेरे ये ‘शेर’ हर जगह, मौके बेमौके ऐसे ही घूमेंगे। लेकिन लगता है पानी सिर से गुजरने लगा है। कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने वाले इन दस नेताओं की पिटाई वहां की साधारण जनता ने कर दी। क्या कांग्रेस या राहुल गान्धी इस प्रकरण से कुछ सीखेंगे? जिन्होंने हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र के चुनावों से कुछ नहीं सीखा, वे अब अपनी ही इन रोबोटनुमा हरकतों से भला क्या सीख सकते हैं। अलबत्ता भारत के लोग इससे अवश्य सीख लेंगे कि यह कांग्रेस अब महात्मा गान्धी वाली कांग्रेस नहीं रही, जिस प्रकार हिमाचल वाली कांग्रेस राजा वीरभद्र वाली कांग्रेस नहीं रही। अब कांग्रेस कृत्रिम बुद्धि से संचालित होती है। इस कृत्रिम बुद्धि का चाकू किसी सही व्यक्ति के हाथ में हो तो सर्जरी के काम आता है और किसी दूसरे के पास चला जाए तो गला काटने के काम आता है। राहुल गान्धी के ये शेर भारत मंडपम में यही काम कर रहे थे।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री

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