राफेल, राष्ट्रवाद का मजाक

अजय राय उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था और पराजित हुए थे। टीवी चैनलों पर एक वीडियो चलता रहा है, जिसमें अजय राय के हाथ में राफेल लड़ाकू विमान का खिलौना है, जिस पर नींबू और हरी मिर्च लटके हैं। यह हमारी प्राचीन परंपरा है। मान्यता है कि नींबू-मिर्च बांधने से दुर्भाग्य की देवी प्रसन्न होती हैं और अनिष्ट नहीं करतीं। जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल का सौदा करने फ्रांस गए थे, तो उन्होंने एक विमान पर ‘स्वास्तिक’ बनाया था और विमान के पहियों पर नींबू-मिर्च बांधे थे। उस यूरोपीय देश को भी वह रीति-रिवाज अटपटे नहीं लगे थे। आस्था, विश्वास और रीति-रिवाज का सम्मान किया जाना चाहिए। अजय राय के अलावा, देश में किसी भी नेता और नागरिक को नींबू-मिर्च बांधने पर कोई आपत्ति नहीं है और न ही किसी ने 4-5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान की ‘आक्रामकता’ पर कोई सवाल किया है। अलबत्ता पहलगाम नरसंहार के बाद जरूर कुछ सवाल किए गए हैं। यही तुष्टिकरण की राजनीति है। शायद उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष को यह जानकारी नहीं है कि कांग्रेस मुख्यालय की नई इमारत पर नींबू-मिर्च अब भी लटके हैं। क्या अजय राय कांग्रेस के इस कथित अंधविश्वास का मजाक उड़ाने का दुस्साहस कर सकते हैं? इधर अजय राय राफेल का खिलौना लेकर देश की सेना का अपमान कर रहे हैं, उधर पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर सुर्खियां छाई हैं कि भारत के सियासतदां मोदी सरकार के अंधविश्वास का मजाक उड़ा रहे हैं। समझ नहीं आता कि कांग्रेस कार्यसमिति में प्रस्ताव पारित किया जाता है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बार-बार दोहरा रहे हैं कि पार्टी इस दौर में मोदी सरकार के साथ खड़ी है।
सरकार पाकिस्तान और आतंकियों के खिलाफ जो भी फैसला लेगी, कांग्रेस उसका समर्थन करेगी, लेकिन कांग्रेस के कुछ प्रमुख नेता और प्रवक्ता अनर्गल सवाल उठा कर देश की फजीहत करने पर आमादा हैं। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने पाकिस्तान में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पर ही सवाल उठाए हैं। बहरहाल राफेल पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अभियान छेड़ा था और ‘चौकीदार चोर है’ का जुमला उछाल कर प्रधानमंत्री मोदी पर घूसखोरी का आरोप चस्पा किया था। बावजूद इसके कांग्रेस के सिर्फ 44 सांसद ही जीत कर संसद में आ पाए थे। सर्वोच्च अदालत ने न केवल फटकार लगाई थी, बल्कि 14 दिसंबर, 2018 को राफेल सौदे संबंधी याचिका को भी खारिज कर दिया था। आज देश युद्ध सरीखे हालात से गुजर रहा है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश भेजे हैं कि हवाई हमले के सायरन बजने, ब्लैक आउट, नागरिकों और छात्रों को युद्ध की आंशिक टे्रनिंग आदि पर ‘मॉक ड्रिल’ की जाए। 1971 के बाद यह कवायद की जा रही है। प्रधानमंत्री ने सभी शीर्ष स्तरीय मुलाकातें और बैठकें की हैं। देश में हलचल महसूस की जा रही है, लेकिन अजय राय सवाल कर रहे हैं कि आखिर राफेल का कब इस्तेमाल किया जाएगा? उसके नींबू-मिर्च कब खोले जाएंगे? युद्ध और हमलों की जानकारी कभी सार्वजनिक की जाती है क्या? राफेल और अन्य सैन्य रणनीतियां भी एक किस्म का ‘राष्ट्रवाद’ हैं। एक डिजिटल आतंकवाद को भी आजकल ‘राष्ट्रवाद’ का नाम दिया जा रहा है। दरअसल ये हरकतें राष्ट्रवाद का मजाक ही हैं। पहलगाम नरसंहार की पीडि़त हिमांशी मात्र 6 दिन ही सुहागिन रह सकीं। उन्होंने अपने पति और देश की नौसेना ने अपने युवा लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को खोया है, लेकिन एक भीड़ सोशल मीडिया के जरिए हिमांशी को ही ट्रोल कर रही है। उसे हिंदू-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक करार दे रही है। हिमांशी ने सिर्फ इतना कहा था कि आतंकियों को सजा दी जाए, लेकिन मुसलमानों और कश्मीरियों को निशाना न बनाया जाए। उसे जो कहा गया, यहीं हम राष्ट्रवाद की असली लड़ाई हार जाते हैं।



