छत्तीसगढ़

रायपुर: कांग्रेस में टिकट बंटवारे पर उठे सवाल, एक ही परिवार के दो सदस्यों को टिकट देने से मचा हड़कंप

रायपुर, 29 जनवरी 2025: रायपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के टिकट बंटवारे को लेकर भारी असंतोष पनपता नजर आ रहा है। खबर है कि पार्टी ने एक ही परिवार के दो सदस्यों—एजाज़ ढेबर और उनकी पत्नी अर्जुमन ढेबर—को अलग-अलग वार्डों से पार्षद पद के लिए टिकट दिया है। इस फैसले पर पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है, और इसे लेकर पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो रहे हैं।

अभी तक चार वार्डों पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं

कांग्रेस ने अब तक वार्ड क्रमांक 45, 47, 52 और 56 के प्रत्याशियों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन सूत्रों की मानें तो वार्ड 45 से अर्जुमन ढेबर को टिकट देने की चर्चा जोरों पर है। वहीं, उनके पति और पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर को पं. भगवती चरण शुक्ल वार्ड क्रमांक 57 से टिकट दिया गया है। इस फैसले से कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष व्याप्त हो गया है, क्योंकि पार्टी के कई अन्य दावेदारों को दरकिनार कर एक ही परिवार को प्राथमिकता दी जा रही है।

कार्यकर्ताओं में नाराजगी, उठा बड़ा सवाल

कई कार्यकर्ताओं ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की भूमिका सिर्फ स्वागत करने, नारे लगाने और दरी बिछाने तक सीमित रह गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पार्टी अब केवल चुनिंदा परिवारों के हितों की पूर्ति करने का मंच बन गई है?

एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा, “ढेबर परिवार क्या कांग्रेस पार्टी को संचालित कर रहा है? अगर इसी तरह टिकट बांटे जाएंगे, तो आम कार्यकर्ता का क्या भविष्य होगा?”

कांग्रेस कार्यालय में फूटा आक्रोश

इससे पहले भी कांग्रेस कार्यालय में टिकट वितरण को लेकर गहमागहमी देखी गई थी। दो दिन पहले पार्टी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस भवन में टिकट बंटवारे को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पैसे लेकर टिकट बेचे जा रहे हैं और पार्टी के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।

क्या कांग्रेस को होगा नुकसान?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी को गंभीरता से नहीं लिया, तो इसे आगामी चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पार्टी में भितरघात की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे विपक्ष को सीधा फायदा हो सकता है।

अब क्या करेंगे पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज?

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ नेताओं का क्या रुख होगा, यह देखने वाली बात होगी। क्या वे कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए कोई कदम उठाएंगे, या फिर यह असंतोष आने वाले चुनावों में कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा?

निगम चुनाव से पहले ही कांग्रेस में घमासान

इस घटनाक्रम ने रायपुर नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की गुटबाजी को उजागर कर दिया है। यदि पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इसका खामियाजा उसे चुनावी नतीजों में भुगतना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस नाराजगी को दूर करने के लिए क्या रणनीति अपनाता है।

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