PSC प्री के अभ्यर्थियों को मेंस परीक्षा की तैयारी के लिए दी जाएगी निःशुल्क आवासीय विद्यालय की सुविधा-कलेक्टर

कांकेर. धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के युवाओं में भी अब शिक्षा की अलग जग रही है. यहां के युवा नक्सली विचारधारा और बंदूक छोड़कर अफसर बनने के लिए मेहनत कर रहें हैं. कांकेर कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के नेतृत्व में जिला प्रशासन उनके सपनों पर पंख भर रहा है. 22 फरवरी को आयोजित पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के लिए कलेक्टर निलेश क्षीरसागर, सीईओ हरेश मंडावी और प्रशिक्षु आईपीएस बाबासाहेब प्रतीक ने परीक्षार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाते हुए उन्हें मोटिवेट किया. साथ ही परीक्षा के तैयारी के संबंध में और प्रश्न हल करने के संबंध में उन्हें महत्वपूर्ण टिप्स दिए.
कांकेर जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल करते हुए मावामोदुल चलाया है. यह जिला प्रशासन की ओर से चलाया जा रहा एक निःशुल्क कोचिंग संस्थान है, जिसमें आदिवासी क्षेत्र और धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बच्चों को निःशुल्क सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करवाई जाती हैं. भानुप्रतापपुर में स्थित मावामोदुल परिसर में जिला प्रशासन ने आज पीएससी प्रारंभिक परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया.
इसमें कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ( आईएएस 2011 बैच), जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी( 2013 राज्य प्रशासनिक सेवा), प्रशिक्षु आईपीएस बाबासाहेब प्रतीक ( आईपीएस 2023) ने प्रशिक्षण सत्र में अभ्यर्थियों में आत्मविश्वास भरते हुए परीक्षार्थियों को परीक्षा के संबंध में सुझाव दिए और उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया.
कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ने कहा कि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार का तनाव न लें. शांत और आत्म विश्वास के साथ प्रश्न पत्र हल करें. कलेक्टर ने कहा कि परीक्षा से ठीक पहले कोई भी नई पुस्तक, नया विषय या कोई नया स्टडी मैटेरियल पढ़ने का प्रयास न करें. जिन विषयों का अध्ययन पहले से किया गया है उन्हीं की पुनरावृत्ति करें और अपनी तैयारी पर भरोसा करें. कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ने सफलता के टिप्स देते हुए कहा कि 10 पुस्तक एक-एक बार पढ़ने की बजाय एक पुस्तक को 10 बार पढ़ा जाए तो बेहतर होगा.
कलेक्टर ने अनुभव किया साझा
कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ने अभ्यर्थियों के बीच अपना अनुभव भी साझा किया. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक परीक्षा उनके लिए हमेशा डर का विषय रहा है. उन्होंने बताया कि परीक्षा में कुछ ऐसे प्रश्न होते हैं जिसमें अभ्यार्थियों को लगता है कि इसके जवाब उन्हें पता भी हो सकते हैं या नहीं भी पता हो सकते हैं. ऐसे मान लीजिए 20 प्रश्न है, उनमें से मैं पांच ऐसे प्रश्न बनाता था जिनके मुझे लगता था कि ऑप्शन 50% सही होंगे. पर मेरे पांचों प्रश्न गलत हो जाते थे. इसलिए प्री से मैं थोड़ा डरता था. अभ्यर्थियों को कलेक्टर ने कहा कि यदि उन बीस प्रश्नों में यदि आप तीन में कंफर्म है तो फिर तीन ही बनाएं.
वही प्रशिक्षु आईपीएस बाबासाहेब प्रतीक ने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र में कम से कम एक घंटा पहले पहुंचे तथा आवश्यक दस्तावेजों को एक दिन पहले ही व्यवस्थित कर ले ताकि परीक्षा के दिन किसी भी प्रकार का तनाव या घबराहट ना हो. प्रशिक्षु आईपीएस ने अभ्यर्थियों को आश्वासन देते हुए कहा कि जब भी उन्हें उनकी मदद या सुझाव की आवश्यकता हो तो वे हमेशा उनके लिए उपलब्ध हैं. आईपीएस बाबा साहेब प्रतीक ने कहा कि सभी अभ्यर्थी बिना किसी प्रेशर के अब तक जो भी उन्होंने पढ़ाई की है उसका पूरा उपयोग करते हुए परीक्षा देवें.
जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी ने अभ्यर्थियों को बताया कि 85 प्रश्न हल करने का लक्ष्य अभ्यर्थियों को रखना चाहिए. परंतु इसके लिए ऐसा ना हो कि अभ्यर्थी तुक्का लगाए. उन्होंने तुक्का लगाने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि गलत उत्तर देने से माइनस मार्किंग होने की वजह से नुकसान की आवश्यकता अधिक रहती है. इसलिए सोच समझकर उत्तर देवें.
जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कार्यक्रम से परीक्षार्थियों में उत्साह और आत्मविश्वास का संचार हुआ. उन्होंने अपने डाउट्स भी अधिकारियों के समक्ष रखें. अधिकारियों ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए पूरी तैयारी और सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा में शामिल होने की अपील की.
निःशुल्क आवासीय कोचिंग की व्यवस्था
कलेक्टर निलेश क्षीरसागर ने इस अवसर पर कहा कि जो भी अभ्यर्थी पीएससी प्री निकालेंगे उनके लिए निःशुल्क आवासीय कोचिंग की व्यवस्था रहेगी. उन्होंने बताया कि पीएससी का महत्वपूर्ण चरण मुख्य परीक्षा होता है जो काफी कठिन होने के साथ काफी लंबा भी होता है. जिले के अधिक से अधिक युवा पीएससी में चयनित हो सके इसके लिए प्रारंभिक परीक्षा निकालने वाले अभ्यर्थियों के निःशुल्क आवासीय कोचिंग की व्यवस्था जिला प्रशासन करेगा.



