मध्यप्रदेश

MP से चार ‘रत्न’: साहित्य-कला-पर्यावरण और विरासत के संरक्षकों को मिलेगा ‘पद्मश्री’

भोपाल: गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों की घोषणा कर दी है। इस वर्ष ‘पीपुल्स पद्म’ की भावना को चरितार्थ करते हुए मध्य प्रदेश की चार ऐसी शख्सियतों को पद्मश्री से नवाजा गया है, जिन्होंने दशकों तक खामोशी से अपनी सेवा और कला से समाज को सींचा है।

पद्म पुरस्कारों के लिए भारत सरकार ने ‘पीपुल्स पद्म और अनसंग हीरोज’ को चुना है। ये ऐसे लोग हैं जो वर्षों और दशकों से चुपचाप समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण, कला, साहित्य और पत्रकारिता सहित तमाम सार्वजनिक क्षेत्रों में काम करते आ रहे हैं। रविवार को राष्ट्रपति द्वारा घोषित किए गए पद्मश्री पुरस्कारों में मध्य प्रदेश से ऐसे चार नाम शामिल हैं। जिनमें बैतूल जिले के मोहन नागर को समाज सेवा, सागर जिले से भगवानदास रायकवार को खेल, कैलाशचंद्र पंच तो शिक्षा और नारायण व्यास को अन्य श्रेणी जिसमें पुरातत्व शामिल हैं के लिए पद्मश्री सर्वोच्च पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

MP से पद्मश्री से लिए चुने गए लोगों का परिचय

  • भगवानदास रैकवार: ‘बुंदेली मार्शल आर्ट’ क्षेत्र: खेल/कला (पारंपरिक युद्ध कला)

सागर के रहने वाले 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार (दाऊ) ने लुप्त हो रही ‘बुंदेली मार्शल आर्ट’ जिसमें लाठी, तलवार, फरसा, बाना सहित अन्य पारंपरिक हथियार चालन, को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। वे छत्रसाल बुंदेला अखाड़े के उस्ताद हैं। रैकवार ने गरीबी और संघर्ष के बावजूद इस शौर्य परंपरा को कभी झुकने नहीं दिया।

  • मोहन नागर: बैतूल, सामाजिक कार्य (पर्यावरण संरक्षण)

वे राजगढ़ के मूल निवासी और वर्तमान में मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं। मोहन नागर ने बैतूल और आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण और वृक्षारोपण की एक नई क्रांति शुरू की। उन्होंने आदिवासी अंचलों में जाकर हजारों लोगों को पर्यावरण से जोड़ा।

  • कैलाश चंद्र पंत: साहित्य एवं शिक्षा (पत्रकारिता)

इंदौर के महू में जन्मे और भोपाल को कर्मभूमि बनाने वाले पंत जी मध्य प्रदेश के वरिष्ठतम पत्रकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने साप्ताहिक पत्रिका ‘जनधर्म’ और ‘हिंदी भवन’ के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में जीवन लगाया है।

  • डॉ. नारायण व्यास: पुरातत्व

भोपाल निवासी डॉ. व्यास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व अधिकारी हैं। उन्होंने भीमबेटका और सांची जैसे यूनेस्को धरोहरों के संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने पुरातत्व को केवल किताबों तक सीमित न रखकर जन-सामान्य तक पहुंचाया। उन्हें मध्य भारत की रॉक पेंटिंग्स (शैलचित्रों) का विशेषज्ञ माना जाता है।

CM मोहन यादव ने दी बधाई, X पर लिखा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की इन चारों विभूतियों को बधाई देते हुए ‘X’ पर लिखा कि मध्यप्रदेश की इन चार विभूतियों का सम्मान संपूर्ण प्रदेश का सम्मान है। आपकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज बनेंगी।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button