हमारे शूरवीर जवानों ने दिखाया पराक्रम

इस ऑपरेशन की एक खास बात यह थी कि राज्यों को साथ लेकर चला गया। वहां विकास की गति बढ़ाई गई और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया गया। इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया। बड़े पैमाने पर सडक़ें बनाई गईं और स्कूल तथा अस्पताल बनाए गए। आदिवासियों को अपनी उपज बेचने के लिए उनके गांवों में ही सुविधाएं प्रदान की गई। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए जिससे वहां के निवासियों का सरकार पर विश्वास बढ़ा। 19 मई को शुरू हुए ऑपरेशन कगार के तहत 50 घंटे चली भयंकर मुठभेड़ में नक्सलियों का सबसे बड़ा कमांडर बसवराजू मारा गया। उस पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम था और वह सीआरपी के 76 जवानों की हत्या और झीरम घाटी कांड, जिसमें विद्या चरण शुक्ला सहित 28 लोग मारे गए थे, का मास्टरमाइंड था। केन्द्रीय गृह मंत्री ने साफ कर दिया है कि यह अभियान तब तक चलेगा जब तक कि नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया न हो जाए। इसका असर दिख रहा है कि इस साल कुल 174 नक्सली मारे गए और 718 ने आत्मसमर्पण कर दिया है…
भारत का यह दुर्भाग्य रहा कि आजादी के तुरंत बाद उसे न केवल विभाजन की त्रासदी से गुजरना पड़ा, बल्कि आतंकवाद और उग्रवाद का सामना करना पड़ा जो अब जाकर किसी हद तक नियंत्रण में आता दिख रहा है। जम्मू-कश्मीर पर कब्जे की कोशिश में लगे पाकिस्तान ने वहां आतंकवाद की लहर पैदा कर दी थी जिसका असर पूरे देश पर पड़ता रहा। केन्द्र सरकार की पहल पर संसद ने वहां से 5 अगस्त 2019 को धारा 370 खत्म करने को मंजूरी दी। तब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ऐतिहासिक भूल को ठीक करने वाला ऐतिहासिक कदम कहा था। इसके साथ ही इस चर्चा पर विराम लगा दिया कि विवाद का विषय है। उसके बाद से यह भारत का अभिन्न अंग है। लेकिन पाकिस्तान है कि आतंकवाद के जरिए वहां अशांति फैलाना चाहता है। इसी क्रम में वहां आतंकवादियों के गिरोह भेजे जाते रहे हैं जिनका मुकाबला हमारे सुरक्षाकर्मी बहादुरी से कर रहे हैं। पहलगाम में इन आतंकवादियों ने जिस तरह निहत्थे और मासूम लोगों पर गोलियां बरसाईं, उसके बाद सुरक्षा बलों ने कठोर कार्रवाई करते हुए जल्दी ही छह आतिकियों को मौत के घाट उतार दिया। वहां सीमा पार से आने वाले आतंकियों को निबटाने में हमारी सेना के अलावा अर्धसैनिक बलों सीमा सुरक्षा बल, सीआरपीएफ और आईटीबीपी का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। लेकिन हमारे अर्धसैनिक बलों ने जो पराक्रम नक्सलियों के खिलाफ दिखाया है, वह उनके जज्बे और बलिदान का साक्षी है।
सीआरपीएफ और यहां तक कि बीएसएफ ने भी छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में कई ऑपरेशन किए। लेकिन असली लड़ाई 2019 के बाद शुरू हुई जब गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को न केवल खुला हाथ दिया बल्कि आधुनिकतम हथियार, सुविधाएं, संचार साधन और अतिरिक्त बलों की व्यवस्था करवाई। नक्सलियों के पास कई तरह के हथियार थे, उन्हें उन इलाकों के चप्पे-चप्पे का ज्ञान है और वे घात लगाकर हमले करने में सिद्धहस्त रहे हैं। सुरक्षा बलों के हमारे जवान जो उन इलाकों में ऑपरेशन करने जाते हैं, घनघोर जंगलों में लड़ते हैं, जहां सुरक्षा बलों के लिए रास्ते दुर्गम हैं और ऊंची-नीची पहाडिय़ां कठिनाइयां पैदा करती हैं। नक्सली सुरक्षा बलों की हर मूवमेंट पर नजर रखते थे और उसी के अनुसार आईईडी का विस्फोट करके हमले करते थे। ऐसे ही एक हमले में सैकड़ों नक्सलियों ने सीआरपी के 76 जवानों की जान ले ली थी। उन बहादुर जवानों को लडऩे का जरा भी मौका नहीं मिला और उन पर घातक हथियारों से भयानक हमला हुआ। लेकिन अब बाजी पलट गई है और केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जो बड़े कदम उठाए, उसका असर साफ दिखने लगा है। नक्सलियों का खात्मा होने लगा है। आधुनिक हथियारों, आधुनिक संचार व्यवस्था, बेहतर सुविधाएं, हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता, चौकियों की संख्या में भारी वृद्धि और तमाम सुविधाएं देकर उन्हें शक्तिशाली बनाया जिससे उन्होंने अपने शौर्य तथा वीरता से नक्सलियों के छक्के छुड़ा दिए। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इसी मई महीने में छत्तीसगढ़-तेलांगना सीमा पर स्थित कारेगेट्टालु पर्वतों पर 31 दुर्दांत नक्सलियों को 21 दिनों के जबर्दस्त संघर्ष के बाद मार गिराया जिन पर कुल पौने दो करोड़ रुपए के इनाम थे।
उनके पास आधुनिकतम हथियार जैसे एसॉल्ट राइफलें वगैरह थे। यह मुकाबला इसलिए भी बहुत मायने रखता था कि 45 डिग्री तापमान में सुरक्षा बलों ने घने जंगलों और कंदराओं के इर्द-गिर्द अपना ऑपरेशन चलाया। सैकड़ों गुफाओं के अंदर क्या है, यह जानना मुश्किल था लेकिन उन्होंने बहादुरी से मुकाबला किया। दरअसल यह जगह नक्सली ऑपरेशन का मुख्यालय था जहां से चारों ओर फैले नक्सलियों को निर्देश दिया जाता था। वहां पर सुरक्षा बलों को 450 आईईडी, 818 बीजीएल शेल, सैकड़ों देसी हथियार तथा बड़े पैमाने पर डेटोनेटर मिले। वहां पर सुरक्षा बलों को 12 हजार किलो अनाज तथा भारी मात्रा में दवाएं भी मिलीं। यहां से ही नक्कसलियों के तमाम अड्डों पर अनाज तथा दवाइयों की आपूर्ति की जाती थी। नक्सलियों के इस विशाल मुख्यालय का पता लगाकर नष्ट कर देना हमारे बहादुर जवानों के धैर्य, समर्पण और संकल्प का ज्वलंत प्रतीक है। इस ऑपरेशन में आईईडी विस्फोटों में कोबरा, एसटीएफ और डिस्ट्रिक्ट गार्ड के 18 जवान जख्मी हो गए थे जिन्हें हेलीकॉप्टरों की मदद से अस्पतालों में पहुंचाया गया। 21 दिनों के इस सफल ऑपरेशन को अब तक का सबसे बड़ा नक्सल निरोधी अभियान माना जा रहा है जिसकी पीएम मोदी ने खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश को इन बहादुर जवानों पर गर्व है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जवानों की वीरता की तारीफ की।
राज्यों और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय का यह बेहतरीन उदाहरण है जिसमें नक्सलियों का मुख्यालय ही ध्वस्त हो गया। इस ऑपरेशन की एक खास बात यह थी कि राज्यों को साथ लेकर चला गया। वहां विकास की गति बढ़ाई गई और शिक्षा को भी बढ़ावा दिया गया। इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया। बड़े पैमाने पर सडक़ें बनाई गईं और स्कूल तथा अस्पताल बनाए गए। आदिवासियों को अपनी उपज बेचने के लिए उनके गांवों में ही सुविधाएं प्रदान की गई। गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए जिससे वहां के निवासियों का सरकार पर विश्वास बढ़ा। 19 मई को शुरू हुए ऑपरेशन कगार के तहत 50 घंटे चली भयंकर मुठभेड़ में नक्सलियों का सबसे बड़ा कमांडर बसवराजू मारा गया। उस पर डेढ़ करोड़ रुपए का इनाम था और वह सीआरपी के 76 जवानों की हत्या और झीरम घाटी कांड, जिसमें विद्या चरण शुक्ला सहित 28 लोग मारे गए थे, का मास्टरमाइंड था। केन्द्रीय गृह मंत्री ने साफ कर दिया है कि यह अभियान तब तक चलेगा जब तक कि नक्सलियों का पूरी तरह से सफाया न हो जाए। इसका असर दिख रहा है कि इस साल कुल 174 नक्सली मारे गए और 718 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। राज्य और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से यह संभव हुआ। आशा की जा सकती है कि नक्सलवाद शीघ्र खत्म होगा।-मधुरेंद्र सिन्हा



