विपक्ष की रैली का संदेश

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. की रैली में जुटी भीड़ को लेकर जो भी दावे और प्रतिदावे हों, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि चुनाव के ठीक पहले विपक्षी दलों ने इसके जरिए अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने की काफी हद तक कामयाब कोशिश की है। लगभग सभी प्रमुख दलों के बड़े नेता इसमें शामिल हुए और सबने मोटे तौर पर सत्ता पक्ष की कथित ज्यादतियों और लोकतंत्र पर हो रहे हमलों के इर्दगिर्द ही बातें रखीं।
अंतर्विरोध की छाया : वैसे, I.N.D.I.A. के घटक दलों के आपसी अंतर्विरोध की छाया भी रैली पर इस रूप में दिखी कि इसके मुख्य मकसद को लेकर दो तरह की बातें सामने आईं। आम आदमी पार्टी की तरफ से जहां इसका मकसद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का विरोध करना बताया गया, वहीं कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि विरोध किसी खास व्यक्ति से जुड़ा नहीं बल्कि मौजूदा सरकार की तानाशाही के खिलाफ केंद्रित है।
रैली की टाइमिंग : यह रैली ऐसे समय हुई, जब महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक तमाम राज्यों में टिकट बंटवारे के सवाल पर I.N.D.I.A. से जुड़े दलों की आपसी खटपट की खबरें आ रही थीं। भले ही ये विवाद गिनी-चुनी सीटों को लेकर थे, नैरेटिव ऐसा बन रहा था कि चुनाव सिर पर आने के बाद भी I.N.D.I.A. से जुड़े दल एकजुट नहीं हो पा रहे। रामलीला मैदान की रैली के जरिए इन दलों ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि बड़े मुद्दों पर वे एक स्वर में बोल सकते हैं।


