राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में खुली बगावत, टिकट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर मची रार

अजमेर। स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले अजमेर कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समर्थक नेताओं ने शहर जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) के गठन पर तीखा हमला बोलते हुए इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।
भीतरघात के आरोप: जयपुर में हुई कांग्रेस की रणनीति बैठक में विधानसभा चुनाव हारने वाले कई प्रत्याशियों ने पार्टी के भीतर ही भीतरघात करने वालों पर कार्रवाई की मांग उठाई और चेतावनी दी कि ऐसे लोगों को निकाय चुनाव में टिकट नहीं मिलना चाहिए।
वर्चस्व की रार: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के समर्थकों के बीच नेतृत्व व कार्यप्रणाली को लेकर अंदरूनी खींचतान देखी जा रही है।
कांग्रेस का नया चुनावी और टिकट फॉर्मूला
विवाद को थामने और पारदर्शिता दिखाने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने नई घोषणाएं की हैं:
- लिफाफा संस्कृति खत्म: अब बंद लिफाफे में मनमाने नाम भेजने या थोपने वाला सिस्टम बंद कर दिया गया है।
युवाओं को प्राथमिकता: निकाय और पंचायती राज चुनावों में 50 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को 50 प्रतिशत टिकट दिए जाने का निर्णय लिया गया है।
जमीनी फीडबैक: स्थानीय विधायकों, पर्यवेक्षकों और कार्यकर्ताओं के सामूहिक फीडबैक के आधार पर ही केवल ‘जिताऊ’ कार्यकर्ताओं को टिकट बांटे जाएंगे।


