अंतर्राष्ट्रीय

इजरायल को हमले की खुली छूट, बी-52 बमवर्षक विमान… ईरान को घुटनों पर लाने ट्रंप ने चल दिए सारे हथियार

तेल अवीव: मिडिल ईस्ट में लगी आग को अमेरिका बुझाने की कोशिश कर रहा है या फिर ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश? यमन में ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी हमले के बाद ये सवाल उठ रहे हैं। हूती विद्रोही लंबे समय से लाल सागर में शिपिंग और इजरायल के खिलाफ हमला करते आए हैं, जिसके ठिकानों पर यमन में अमेरिका ने भीषण बमबारी की है। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका का मकसद यमन से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कई स्ट्रैटजिट्स ने अमेरिका के इस फैसले को डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को तात्कालिक और अव्यवस्थित करार दिया है। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का एकमात्र मकसद ईरान को परमाणु समझौता करने के लिए घुटनों पर लाना है और इसके लिए वो इजरायल को हमलों की खुली छूट देने से लेकर यमन, सीरिया और लेबनान में कदम उठा रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने इजरायल को ईरानी ठिकानों पर हमला करने की खुली छूट दे दी है। अमेरिका के किसी भी और प्रशासन ने ऐसा नहीं किया था। इसके अलावा जब इजरायल ने सीजफायर का उल्लंघन करते हुए गाजा में फिर से बमबारी शुरू कर दी तो ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर से बेंजामिन नेतन्याहू का समर्थन कर दिया। जिसका साफ मकसद ईरान पर प्रेशर बनाना है और उसके प्रॉक्सी संगठनों को प्रेशर में लाकर ईरान को घुटनों पर लाना है।

ईरान को काउंटर करने की यमन स्ट्रैटजी
अमेरिका ने 15 मार्च से यमन में हूतियों के खिलाफ हमलों की झड़ी लगा दी है। जिसका तात्कालिक मकसद हूतियों को लाल सागर में शिपिंग कंटेनर्स और इजरायल पर होने वाले हमलों को रोकना है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक इंटरव्यू में कहा है कि “जब हूती हमले करना बंद कर देंगे तो हमारी कार्रवाई भी बंद हो जाएगी।” लेकिन अमेरिकी अधिकारी ने साफ कर दिया है कि हूतियों के हमले के पीछे ईरान है। उन्होंने कहा है हूतियों को ईरान से ट्रेनिंग और पैसे मिलते हैं। खुद ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर हूतियों के हमले बंद नहीं हुए को ईरान को कीमत चुकानी पड़ेगी। लिहाजा हूतियों पर लगातार हमले और ईरान को चेतावनी देने का ट्रंप का मकसद उसे परमाणु समझौता करने के लिए मजबूर करना हो सकता है। लेकिन हूतियों के खिलाफ अमेरिकी अभियान के बावजूद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने झुकने से इनकार कर दिया। उन्होंने परमाणु समझौते पर बातचीत के ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

झुको या युद्ध करो… ईरान के सामने दो विकल्प!
हूतियों के ठिकानों पर अमेरिका के हमलों ने डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी को सही साबित किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान अपने न्यूक्लियर डेवलपमेंट को वापस नहीं लेता है और उसे बंद नहीं करता है, और अगर देश परमाणु बम बनाने की दहलीज तक पहुंचता है तो अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु स्थलों पर विनाशकाली हमले कर सकते हैं। ट्रंप के प्रशासन ने इजरायल के साथ संयुक्त हवाई अभ्यास करके फिर से संदेश भेजने की कोशिश की है। इस सैन्य अभ्यास में अमेरिकी बी-52 बमवर्षक विमान ने हिस्सा लिया था, जिसमें ईरान की सैकड़ों फीट गहरी जमीन के अंदर बनी परमाणु सुविधाओं को ध्वस्त करने की क्षमता है। इसके अलावा सैन्य अभ्यास में इजरायली F-15I और F-35I विमानों ने हिस्सा लिया है, जिसका मकसद साफ है कि ये अभ्यास, ईरान पर हमले का पूर्वाभ्यास था।

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