संपादकीय

सेना को खुली छूट

प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान, आतंकियों और उनके आकाओं पर प्रहार करने की सेना को खुली छूट दे दी है। हमले का तरीका, जगह, लक्ष्य और समय सेनाएं ही तय करेंगी। प्रधानमंत्री ने देश की सेनाओं की क्षमताओं पर विश्वास जताया है। इतना जरूर स्पष्ट किया गया है कि आतंकवाद को करारा जवाब देना हमारा दृढ़ राष्ट्रीय संकल्प है। कश्मीर में ही उरी और पुलवामा आतंकी हमलों के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को खुली छूट दी थी। हालांकि सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट हवाई हमले की अंतिम स्वीकृति प्रधानमंत्री से जरूर ली गई थी। प्रधानमंत्री ने बीते दो दिनों में दो बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। उन बैठकों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी मौजूद रहे, लेकिन निर्णायक बैठक में तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे। जाहिर है कि प्रधानमंत्री के सामने संभावित हमलों के प्रारूप और रोडमैप रखे गए होंगे! अंतत: सेना को स्वतंत्र छूट दी गई। बुधवार, 30 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी, राजनीतिक और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समितियों की बैठकों में भी व्यापक विमर्श किया गया। कैबिनेट की पूरी बैठक भी की गई। अब सर्वोच्च स्तर पर यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत ने पहलगाम नरसंहार का बदला लेना तय कर लिया है। तीनों सेना प्रमुखों के प्रारूपों में जो संशोधन जरूरी लगे होंगे, वे कैबिनेट की बैठकों में कर लिए गए। अब हमारी सेनाओं का आक्रामक प्रहार क्या होगा, यह उसी पल ही सामने आएगा, जब हमला किया जाएगा। भारत अपनी तरफ से युद्ध का आगाज करने नहीं जा रहा है। जो आतंकवाद के चेहरे हैं, निशाने पर सिर्फ वही होने चाहिए। रक्षा विशेषज्ञ अपने लंबे, सैन्य अनुभवों के आधार पर आकलन कर रहे हैं कि आतंकियों के साथ-साथ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, वहां की फौज और सेना प्रमुख जनरल मुनीर हमारी सेनाओं के निशाने पर हो सकते हैं।

ये ही आतंकवाद का क्रमबद्ध सिलसिला हैं। सेना के ऑपरेशन जमीन और हवा के अलावा समंदर से भी किए जा सकते हैं। हमारी सेनाओं ने दुश्मन का अच्छी तरह अध्ययन कर लिया होगा! हमारी सेनाओं के निशाने पर पाकिस्तान के 30 से ज्यादा महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं, जिन्हें सेनाएं मिसाइल हमलों में ही उड़ा सकती हैं। हमारी सेनाओं के पास ऐसे भी अस्त्र हैं, जिन्हें भारत की सीमा में रहते हुए भी छोड़ा जा सकता है। वे वाकई बेहद विध्वंसक हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सैन्य ऑपरेशन व्यापक और बहुध्रुवीय हो सकता है। बहरहाल सेना जो भी करेगी, पूरी दुनिया के सामने होगा, लेकिन एक बार फिर दोहरा रहे हैं कि यह देश के एकजुट रहने का वक्त है। यह विवादास्पद, घटिया और मानहानि वाले पोस्टर पोस्ट करने का वक्त नहीं है। यह देश के प्रधानमंत्री को अपमानित करने का भी समय नहीं है। हां, हम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस आग्रह को समर्थन देते हैं कि संसद का एकदिनी विशेष सत्र बुलाया जाए और पाकिस्तान, आतंकवाद के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाए। ऐसे विशेष सत्र ‘निर्भया कांड’ के बाद भी बुलाए गए हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, तो मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का नया विचार सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी संसद के भीतर सैन्य रणनीति का खुलासा बिल्कुल न करें। विपक्ष से भी हमारी अपेक्षाएं हैं कि वे फिजूल का दबाव सरकार पर न डालें। एक राष्ट्र के तौर पर, संसद के जरिए, आतंकवाद और पाकिस्तान की भूमिका को पुरजोर बेनकाब करें। बेशक दुनिया भी हमारी संसद से गूंजने वाले हुंकारों को सुनेगी। यदि सरकार संसद का सत्र नहीं बुलाती है, तो कमोबेश अभी उसे सियासत का आधार न बनाएं। भारत को पलटवार कर प्रतिशोध लेने दें, पीडि़त परिवारों को कुछ तसल्ली मिलने दें। देश सामान्य हो जाएगा, तो सरकार का विरोध जायज होगा।

Show More

Daily Live Chhattisgarh

Daily Live CG यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, बिजनेस, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button