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रविंद्रनाथ टैगोर का 84 वीं पुण्यतिथि, छत्तीसगढ़ में भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए, उनकी प्रदेश से जुड़ी कहानी…

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. राष्ट्र गौरव नोबेल पुरस्कार विजेता और राष्ट्र गान के रचयिता कविगुरु रविन्द्र नाथ टैगोर की आज 84 वीं पुण्यतिथि पर छत्तीसगढ़ में भी गौरेला बंगाली समाज ने उन्हें याद कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया. रविंद्रनाथ टैगोर का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता है. वे अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने सेनेटोरियम आये थे.

बता दें, रविंद्रनाथ टैगोर साल 1918 में कलकत्ता से बिलासपुर होते हुए पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन उतरकर सेनेटोरियम गुरुकुल में अपनी पत्नी बीनू जो कि टीबी से पीड़ित थीं, उनका इलाज कराने साथ आये थे. लेकिन उनकी पत्नी बीनू की 6 महीने बाद इलाज के दौरान ही मृत्यु हो गई थी.

हमारे राष्ट्रगान “जन-गण-मन” के रचयिता गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर को आज हम याद कर रहे हैं. आज ही के दिन यानी 7 अगस्त 1941 को देवलोक गमन हुआ हुआ था. आज उनकी 84 वीं पुण्य तिथि है. करीब 106  साल पहले सन 1918 में वे अपनी पत्नी के साथ गौरेला पेण्ड्रा के मध्य सेनिटोरियम अस्पताल आए थे. एक समय था, जब टीबी एक लाइलाज बिमारी हुआ करती थी. उस समय इस बिमारी का कोई भी इलाज नहीं था. जो इलाज था भी तो वह बहुत खर्चीला इलाज हुआ करता था. इसी टीबी बीमारी से गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की पत्नी मृणालिनी देवी (बीनू) ग्रसित थीं. उनका इलाज कराने के लिए वे पेंड्रारोड आए थे. उस समय टीबी के इलाज के लिए ब्रिटिश सरकार ने भारत मे केवल तीन जगह पर सेनिटोरियम बनवाया था, जहां टीबी मरीज के लिए अनुकूल वातावरण हो. रविंद्रनाथ टैगोर ने अपनी पत्नी के इलाज के दौरान बहुत सी कविताएं और कहानियां लिखी. लेकिन 6 महीनों में इलाज के दौरान उनकी पत्नी का देहांत हो गया. इसी सेनिटोरियम के प्रांगण में रविंद्रनाथ की पत्नी के शरीर को मिट्टी दी गई और समाधि बनाई गई. पत्नी के गुजर जाने के बाद उनके वियोग में ही रविंद्रनाथ टैगोर ने बिलासपुर स्टेशन में “फांकी” नाम की एक कविता लिखी. उनकी ये कविता आज भी बिलासपुर रेलवे स्टेशन के गेट की दीवार पर अंकित है.

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