स्वास्थ्य

अब बिना बायोप्सी भी पता चल सकेगा कैंसर है या नहीं, वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका

Research: कैंसर का पता लगाने के लिए दुनियाभर में बायोप्सी की जाती है. अब वैज्ञानिकों ने बीमारी का पता लगाने के लिए एक नया दर्द रहित तरीका विकसित किया है.

अल्जाइमर्स और कैंसर जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए दुनियाभर में लोगों की बायोप्सी की जाती है. हालांकि यह प्रक्रिया दर्द भरी होती है और इसी कारण कई लोग बायोप्सी कराने से डरते हैं. नतीजा, समय पर उपचार नहीं मिल पाता और उनका रोग बढ़ जाता है. इसी कारण कई बार कैंसर जैसी बीमारी रोगी के प्राण तक ले लेती है. पारंपरिक बायोप्सी में रोगी के शरीर से ऊतक, यानी टीश्यू का टुकड़ा निकाला जाता है, ताकि पता लगाया जा सके कि रोगी कैंसर या अल्जाइर्स जैसी बीमारी से तो नहीं जूझ रहा है. पर लगता है कि अब जल्द ही रोगियों को इस दर्द भरी प्रक्रिया से मुक्ति मिलने वाली है, क्योंकि लंबे रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पैच विकसित किया है, जो रोगी के टिश्यू से, बिना उन्हें हानि पहुंचाये या हटाये, सूक्ष्म जानकारी (मॉलिक्यूलर डाटा) एकत्र कर सकता है. इस प्रक्रिया में रोगी को दर्द भी नहीं होता है. यह तरीका हेल्थकेयर टीम को रीयल टाइम में बीमारी को मॉनिटर करने में सक्षम बनायेगा. इतना ही नहीं, चूंकि यह प्रक्रिया ऊतक को नष्ट नहीं करती है, इसलिए एक ही ऊतक का नमूना कई बार लिया जा सकता है और उसकी बार-बार जांच की जा सकती है. जो पहले असंभव था.

तेजी से काम करता है पैच

किंग्स कॉलस लंदन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पैच विकसित किया है जिसमें मानव के बाल से भी पतले नैनोनीडल्स लगे हैं. लाखों नैनोनीडल्स से ढका हुआ यह पैच ऊतकों को हटाये या नुकसान पहुंचाये बिना उनसे सूक्ष्म डाटा को दर्द रहित तरीके से निकाल सकता है. यह पैच विशेष रूप से ब्रेन कैंसर और अल्जाइमर्स जैसी स्थितियों के लिए रीयल टाइम बीमारी की निगरानी करेगा और इस तरह यह डॉक्टरों द्वारा बीमारी की पहचान करने और उसका पता लगाने (डॉयग्नॉस व ट्रैक) के तरीके को मौलिक रूप से बदल सकता है. यह पैच तेजी से काम करता है, सामान्य चिकित्सा उपकरणों- जैसे बैंडेज, एंडोस्कोप और कॉन्टैक्ट लेंस- के साथ जुड़ जाता है, और एआइ का उपयोग कर रिजल्ट बता देता है. इससे डॉक्टर पर्सनलाइज्ड मेडिसिन (रोगी के आवश्यकतानुसार) के आधार पर रोगी की बेहतर चिकित्सा और सर्जरी कर सकेंगे. यह रिसर्च साइंटिफिक जर्नल, ‘नेचर नैनोटेक्नोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है.

नैनोनीडल्स पर 12 वर्षों से काम कर रहे वैज्ञानिक

रिसर्च का नेतृत्व करने वाले वैज्ञानिक डॉ सिरो चियापिनो का कहना है कि ‘वे बारह वर्षों से नैनोनीडल्स पर काम कर रहे हैं. वे मानते हैं कि यह उनका अब तक का सबसे अधिक उत्साहित करने वाला विकास है, जो ब्रेन कैंसर और अल्जाइमर्स से जूझ रहे रोगियों समेत पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, यानी रोगी के आवश्यकतानुसार उसकी चिकित्सा, के लिए संभावनाओं के द्वार खोलता है.’ इस तकनीक का उपयोग ब्रेन सर्जरी के दौरान सर्जनों को तेजी से और अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद करने के लिए किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, संदिग्ध क्षेत्र (जिन स्थानों पर संदेह है कि वहां से बीमारी के बारे में पता चल सकता है) पर पैच लगाने से, 20 मिनट के भीतर परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं और कैंसरग्रस्त ऊतक को हटाने के बारे में रीयल टाइम में निर्णय लिया जा सकता है. इस तरह, इस पैच की मदद से बिना देरी किये बीमारी की पहचान और उसका निदान संभव हो सकेगा.

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