प्री-मैच्योर पॉलिसी बंद करने पर अब ज्यादा रिटर्न

नई दिल्ली – प्री मैच्योर पॉलिसी बंद करने पर पॉलिसी होल्डर्स को अब बीमा कंपनी से ज्यादा रिफंड मिलेगा। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईआरडीएआई) ने बीमा कंपनियों को पॉलिसी होल्डर्स को पहले से ज्यादा स्पेशल सरेंडर वैल्यू (एसएसवी) देने का आदेश दिया है। इसके अलावा, पॉलिसी रेगुलेटर आईआरडीएआई ने पॉलिसी बेचने वाली कंपनियों को पहले साल के बाद से ही स्पेशल सरेंडर वैल्यू (एसएसवी) का पेमेंट करने को कहा है, लेकिन इसमें पॉलिसी के लिए कम से कम एक साल तक का प्रीमियम जमा होना चाहिए। इससे पहले अगर कोई बीमा धारक पॉलिसी लेने के एक साल के अंदर सरेंडर करना चाहता था, तो उसे सरेंडर वैल्यू नहीं मिलती थी। यानी अब एक साल प्रीमियम जमा करने के बाद पॉलिसी बंद करने पर आपका पैसा नहीं डूबेगा। गौर हो कि पॉलिसी बंद करने या सरेंडर करने पर जो राशि आपको बीमा कंपनी देती है, उसे सरेंडर वैल्यू कहा जाता है। मान लीजिए आपकी किसी पॉलिसी की मैच्योरिटी 10 साल है, लेकिन आप उस पॉलिसी को 10 साल के पहले ही सरेंडर कर देते हैं, तो जो रकम आपको मिलती है, उसे सरेंडर वैल्यू कहते हैं।
यह रकम मैच्योरिटी पर मिलने वाली फुल सम-एश्योर्ड (प्रीमियम+ इंटरेस्ट+ बोनस) से कम होती है। मान लीजिए कि कोई पॉलिसी होल्डर पांच लाख रुपए की बीमा राशि वाली 10 साल की पॉलिसी के लिए सालाना 50,000 रुपए का प्रीमियम देता है। अब चार साल बाद वह पॉलिसी बंद करना चाहता है। इस दौरान उसने टोटल दो लाख का प्रीमियम चुकाया है और 40,000 रुपए का बोनस जमा कर लिया है। पहले के नियमों के अनुसार, अगर पॉलिसी चौथे और सातवें साल के बीच सरेंडर की जाती है, तो टोटल प्रीमियम का 50 फीसदी अमाउंट ही मिलता है। इस हिसाब से पॉलिसी होल्डर को टोटल दो लाख प्रीमियम और 40,000 रुपए बोनस का 50 फीसदी यानी 1.2 लाख रुपए मिलेंगे। हालांकि, आईआरडीएआई के नए मास्टर सर्कुलर के मुताबिक आपको 1.55 लाख रुपए मिलेंगे।



