स्वास्थ्य

बड़े-बुज़ुर्गों को ही नहीं! कोविड के बाद दिल्ली में बढ़े बच्चों के मेंटल हेल्थ के केस

दिल्ली: पूरी दुनिया में इस समय मेंटल हेल्थ को लेकर काफी ज्यादा चर्चाएं हो रही हैं. खासकर जो लोग 20 साल की उम्र से लेकर 40 साल की उम्र के बीच हैं. उनके मेंटल हेल्थ को लेकर इस समय विशेष रूप से चर्चा हो रही है. हमारे देश में तो इस विषय पर और भी ज्यादा बातें हो रही हैं. क्योंकि इनमें से ज्यादातर लोग कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर रहे लोग हैं. वह अपनी जिंदगी में किसी न किसी तरह के संघर्ष से गुजर ही रहे हैं.

इसी वजह से मेंटल हेल्थ इश्यू इस समय एक बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है, जिसके चलते लोगों को कई अन्य तरह की बीमारियों से भी जूझना पड़ रहा है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि दिल्ली-एनसीआर के सबसे मशहूर चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह का कहना है कि अब ये मेंटल हेल्थ इश्यू सिर्फ बड़े-बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं हैं. बल्कि बच्चों में भी देखने को मिल रहे हैं. उन्होंने कुछ आंकड़ों के आधार पर हैरान कर देने वाले तथ्य बताए हैं, जिन्हें लोकल 18 की टीम से जानकारी उन्होंने साझा की. आइये जानते हैं डॉकटर ने क्या-क्या बातें कही

ये हैं वो डराने वाले आंकड़े

दिल्ली के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण ने बताया कि इस समय आंकड़ो के हिसाब से न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर सबसे ज्यादा चर्चा में है. जहां ऑटिज्म और ADHD को लेकर होती है. उनके मामलों में दिल्ली-एनसीआर में करीब 17% की बढ़ोतरी हुई है. खासतौर पर 2 से 9 साल की उम्र के बच्चों में मानसिक विकार और न्यूरो-डेवलपमेंट से जुड़ी बीमारियों के मामलों में 11-12% तक इजाफा देखा गया है.

इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में डेवलपमेंटल, बिहेवियर और न्यूरो-डेवलपमेंटल बीमारियों से जुड़े मरीजों की ओपीडी में आने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. उन्होंने यह भी कहा कि यह इनमे से कुछ आंकड़े इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा दिए गए हैं. साथ ही कुछ आंकड़े दिल्ली एनसीआर के अलग-अलग प्रतिष्ठित संस्थानों ने कई अध्ययनों के बाद दिए हैं.

जानें क्यों बढ़ रहे हैं मरीज 

डॉ. तरुण ने कहा कि खास कर दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण काफी ज्यादा है. यहां पर बच्चों पर इसका असर हर तरह से पड़ता है. इसलिए यहां बच्चों में न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर ज्यादा दिख रहे हैं. वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में यह चीज कोविड के बाद से ज्यादा बढ़ी है. क्योंकि बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि बच्चों में यह समस्या केवल स्क्रीन टाइम बढ़ने से ही नहीं, बल्कि उससे भी ज़्यादा कारणों से बढ़ी है.

बच्चों को ज्यादा समय देने से ठीक हो सकती है समस्या

डॉक्टर का कहना था कि जिस तरह आजकल माता-पिता बच्चों को कम समय देते हैं. उनके साथ कम बातचीत करते हैं. उससे भी यह समस्या बच्चों में बढ़ रही है. अंत में उन्होंने कहा कि अब माता-पिता को ही बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताना होगा. बच्चों को अच्छा वातावरण देने के साथ-साथ पौष्टिक खाना देना होगा और बाहर के खाने को भी कम करना होगा. उन्होंने कहा कि ये चीजें देखने में छोटी लगती हैं, लेकिन इन्हीं सब बातों को ठीक करने से यह समस्या ठीक हो पाएगी.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button